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PARAM Robodog: बंगलूरू के स्टार्टअप ने बनाया पूरी तरह स्वदेशी रोबोडॉग, खूबियां देख पीएम मोदी भी हुए मुरीद

टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जागृति Updated Thu, 19 Feb 2026 03:25 PM IST
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सार

India AI Impact Expo 2026: दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान एक भारतीय डीप-टेक स्टार्टअप ने टेक इकोसिस्टम का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। बेंगलुरु के स्टार्टअप जनरल ऑटोनॉमी ने अपने स्वदेशी क्वाड्रूपेड रोबोट परम का वीडियो जारी किया, जिसने सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा बटोरी। 
 

Param: India's indigenous Robo-dog streets, PM Modi shares advice; Check out amazing features
क्वाड्रूपेड परम - फोटो : @GeneralAutonomy
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विस्तार

परम एक क्वाड्रूपेड (चार पैरों वाला) रोबोट है, जिसे कठिन इलाकों में काम करने के लिए डिजाइन किया गया है। वायरल वीडियो में यह बेंगलुरु की व्यस्त ट्रैफिक के बीच चलते हुए दिखाई देता है। इसे बनानी वाली कंपनी का दावा है कि परम सिर्फ भारत में असेंबल नहीं किया गया, बल्कि भारतीय इंजीनियरों द्वारा पूरी तरह से डिजाइन और विकसित किया गया है।
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ये क्वाड्रूपेड 30 सेमी तक की सीढ़ियां चढ़ने की क्षमता रखता है। इसके साथ ही लो-हाइट एंट्री के लिए क्रैब वॉक मूवमेंट, ऑटोमैटिक फॉल रिकवरी सिस्टम, स्वायत्त नेविगेशन और टारगेट ट्रैकिंग व बाधाओं की पहचान और उनसे बचाव कर सकता है। इसके ये फीचर्स इसे इंडस्ट्रियल और फील्ड ऑपरेशंस के लिए उपयुक्त बनाते हैं।
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कितने समय में तैयार हुआ ये रोबोडॉग?
स्टार्टअप के अनुसार, ये प्रोजेक्ट लगभग सात महीनों से चल रहा है। हालांकि कंपनी ने यह भी कहा कि उनके पहले विकसित किए गए ह्यूमनॉइड प्रोजेक्ट से मिली तकनीकी सीख का लाभ परम को मिला। हर पखवाड़े में हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर अपग्रेड किए जा रहे हैं, जिससे इसका प्रदर्शन लगातार बेहतर हो रहा है।

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क्वाड्रूपेड परम - फोटो : @GeneralAutonomy
प्रधानमंत्री  के सामने भी हुआ प्रदर्शित
जनवरी में आयोजित डीप टेक शोकेस के दौरान स्टार्टअप के फाउंडर फराज अहसान ने इसे पीएम मोदी के सामने भी पेश किया था, जिसके बाद प्रधानमंत्री ने इसकी तकनीक की सराहना की। साथ ही हल्के-फुल्के अंदाज में सलाह भी दी। उन्होंने कहा कि दिल्ली की कड़ाके की सर्दी में परम का ख्याल रखना। साथ ही स्टार्टअप टीम को तकनीकी नवाचार जारी रखने को भी कहा।

क्वाड्रूपेड रोबोट्स, जिन्हें आमतौर पर रोबोडॉग कहा जाता है, दुनिया भर इसे तेजी से अपनाया जा रहा है। इसका कई जगहों पर इस्तेमाल किया जा सकता है। जैसे इंडस्ट्रियल प्लांट इंस्पेक्शन, खतरनाक सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन, डिफेंस लॉजिस्टिक्स, रिसर्च और सर्विलांस व माइनिंग और ऑयल-रिग मॉनिटरिंग में। इन रोबोट्स की खास बात है कि ये ऐसे भी जोखिल और उबड़-खाबड़ जगहों पर काम कर सकते हैं, जहां पारंपरिक पहिएदार मशीनें असफल हो जाती हैं।

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किस तकनीक का प्रयोग किया गया है?
हालांकि कंपनी ने तकनीकी आर्किटेक्चर का पूरा खुलासा नहीं किया है, लेकिन ऐसे क्वाड्रूपेड सिस्टम आमतौर पर लिडार और विजन सेंसर आधारित मैपिंग, एआई आधारित ऑब्जेक्ट डिटेक्शन, रियल-टाइम मोशन कंट्रोल एल्गोरिद्म, बैलेंसिंग के लिए डायनेमिक स्टेबिलिटी मॉडल, ऑनबोर्ड कंप्यूटिंग यूनिट तकनीक पर आधारित होते हैं। अगर परम इन मानकों पर कार्य करता है, तो ये भारत के डीप-टेक इकोसिस्टम के लिए एक अहम उपलब्धि हो सकता है। 

किस ओर इशारा कर रहा रोबोडॉग?
परम की लॉन्चिंग कई संकेत देती है। जैसे भारत में स्वदेशी रोबोटिक्स मजबूत हो रही है, डिफेंस और इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन में घरेलू समाधान विकसित हो रहे हैं।स्टार्टअप इकोसिस्टम डीप टेक में निवेश बढ़ा रहा है और डिजाइन व डेवलपमेंट इन इंडिया मॉडल पर जोर दिया जा रहा है। 

टेक एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर परम को बड़े पैमाने पर इंडस्ट्रियल या डिफेंस ऑर्डर मिलते हैं, तो ये भारतीय रोबोटिक्स बाजार को नई दिशा दे सकता है। एआई और रोबोटिक्स के इस संयोजन से भारत वैश्विक टेक प्रतिस्पर्धा में अपनी उपस्थिति भी मजबूत कर सकता है।

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