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गूगल ला रहा AutoFDO तकनीक: अब Android फोन होंगे तेज, बूट टाइम व एप लॉन्चिंग के साथ जानें क्या होंगे बड़े बदलाव

टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Jagriti Updated Sat, 14 Mar 2026 11:42 AM IST
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सार

Google AutoFDO Technology Android: क्या आपका एंड्रॉइड फोन बूट होने या एप्स खोलने में समय लेता है? तो ने इसका समाधान निकाल लिया है। अब एंड्रॉइड स्मार्टफोन की परफॉर्मेंस बेहतर बनाने के लिए गूगल एक नई ऑप्टिमाइजेशन तकनीक ऑटो एफडीओ पर काम कर रहा है। यह तकनीक सिस्टम के सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले कोड को पहचानकर उसे बेहतर तरीके से ऑप्टिमाइज करती है। जानें कैसे यह नया अपडेट आपके पुराने और नए स्मार्टफोन्स की परफॉरमेंस को हमेशा के लिए बदल देगा।
 

Google bringing AutoFDO technology, Android phones faster, know what  major changes with boot time and app lau
गूगल ऑटोएफडीओ तकनीक एंड्रॉइड - फोटो : google blog
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विस्तार

स्मार्टफोन की परफॉर्मेंस बेहतर बनाने के लिए गूगल एक नई ऑप्टिमाइजेशन तकनीक पर काम कर रहा है, जिसका नाम है AutoFDO यानी ऑटोमेटिक फीडबैक डायरेक्ट ऑप्टिमाइजेशन। इस तकनीक का मकसद एंड्रॉइड ऑपरेटिंग सिस्टम को ज्यादा तेज, कुशल और स्मूद बनाना है। गूगल की एंड्रॉइड एललवीएम टूलचेन टीम के अनुचार, इस नई तकनीक के जरिए स्मार्टफोन में एप्स तेजी से खुल सकेंगे। सिस्टम ज्यादा रिस्पॉन्सिव होगा और बैटरी की दक्षता में भी सुधार देखने का मिल सकता है।
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इसमें होगा बड़ा सुधार
एंड्रॉइड सिस्टम का सबसे अहम हिस्सा कर्नेल (Kernel) होता है। यह स्मार्टफोन के हार्डवेयर, प्रोसेसर और ऐप्स के बीच एक पुल की तरह काम करता है। गूगल के अनुसार एंड्रॉइड कर्नेल फोन के सीपीयू समय का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा मैनेज करता है, इसलिए कर्नेल में किया गया छोटा सा सुधार भी पूरे फोन की परफॉर्मेंस पर बड़ा असर डाल सकता है। नई ऑटोएफडीओ तकनीक इसी कर्नेल को ज्यादा स्मार्ट तरीके से ऑप्टिमाइज करने पर केंद्रित है। 
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कैसे काम करती है ऑटोएफडीओ तकनीक?
ऑटोएफडीओ एक डेटा आधारित ऑप्टिमाइजेशन तकनीक है। इसमें सबसे पहले नियंत्रित लैब टेस्ट के दौरान सिस्टम की गतिविधियों को ट्रैक किया जाता है। इस प्रक्रिया में प्रोफाइलिंग टूल्स यह रिकॉर्ड करते हैं कि सिस्टम के कौन से कोड सबसे ज्यादा इस्तेमाल हो रहे हैं। इन हिस्सों को हॉट कोड पैथ्स कहा जाता है, इसके बाद कंपाइलर को निर्देश दिए जाते हैं कि वह इन्हीं महत्वपूर्ण हिस्सों को ज्यादा कुशल तरीके से व्यवस्थित करे। इससे सिस्टम के महत्वपूर्ण ऑपरेशन तेजी से पूरे हो सकते हैं।

बूट टाइम और एप लॉन्चिंग में सुधार
गूगल शुरुआती इंटरनल टेस्ट के अनुसार ऑटोएफडीओ तकनीक के इस्तेमाल से कुछ अहम सुधार देखे गए हैं। जैसे:
  1. डिवाइस का बूट टाइम करीब 2.1% तेज हुआ है।
  2. कोल्ड एप लॉन्च टाइम में लगभग 4.3% सुधार देखा गया है।
  3. सिस्टम की कई अन्य परफॉर्मेंस मैट्रिक्स में भी बेहतर नतीजे मिले
बूट टाइम का मतलब वह समय होता है जो किसी स्मार्टफोन को चालू होने से लेकर होम स्क्रीन तक पहुंचने में लगता है। आम तौर पर मिड-रेंज एंड्रॉइड फोन में यह समय करीब 20 से 40 सेकंड के बीच होता है।

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यूजर को क्या मिलेगा फायदा?
गूगल के शुरुआती टेस्ट बताते हैं कि इस छोटे से बदलाव का असर बहुत बड़ा है। इसलिए ऑटोएफडीओ लागू होने के बाद स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं को कई फायदे मिल सकते हैं। जैसे:
  • बूट टाइम में तेजी: डिवाइस चालू होने का समय 2.1% तक कम हो गया है। यानी अब आपको होम स्क्रीन देखने के लिए कम इंतजार करना होगा।
  • कोल्ड एप लॉन्च: जब आप किसी एप को पहली बार खोलते हैं, तो वह 4.3% तेजी से खुलेगा।
  • स्मूद एक्सपीरियंस: फोन का यूजर इंटरफेस पहले के मुकाबले ज्यादा रिस्पॉन्सिव और स्मूद महसूस होगा।
  • बैटरी की बचत: चूंकि प्रोसेसर को कोड प्रोसेस करने में कम मेहनत करनी पड़ेगी, इसलिए बैटरी लाइफ में भी सुधार देखने को मिलेगा।
यानी कुल मिलाकर फोन का यूजर एक्सपीरियंस बेहतर हो सकता है।

एंड्रॉइड अपडेट में मिल सकती है तकनीक
एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि अगर यह तकनीक सफल रहती है तो इसे आने वाले एंड्रॉइड अपडेट्स में धीरे-धीरे लागू किया जा सकता है। इससे नए ही नहीं बल्कि कई मौजूदा एंड्रॉइड डिवाइस की परफॉर्मेंस में भी सुधार देखने को मिल सकता है।


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