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RCS Spam: स्पैम मैसेज-कॉल से निपटने के लिए गूगल ने एयरटेल से मिलाया हाथ, नेटवर्क स्तर पर होगी रियल-टाइम जांच
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Nitish Kumar
Updated Mon, 02 Mar 2026 03:24 PM IST
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सार
भारत में आरसीएस मैसेजिंग पर बढ़ती स्पैम शिकायतों के बीच गूगल ने बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने एयरटेल के साथ साझेदारी कर नेटवर्क स्तर पर स्पैम फिल्टरिंग शुरू करने की तैयारी की है, ताकि फर्जी संदेशों और धोखाधड़ी पर लगाम लगाई जा सके।
एयरटेल
- फोटो : PTI
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विस्तार
भारत में गूगल की रिच कम्युनिकेशन सर्विस (RCS) को लेकर स्पैम की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। यूजर्स को अवांछित विज्ञापन और संदिग्ध मैसेज मिलने से प्लेटफॉर्म की विश्वसनीयता पर असर पड़ा है। इसी चुनौती से निपटने के लिए गूगल ने टेलीकॉम कंपनियों के साथ बेहतर समन्वय बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
एयरटेल के साथ साझेदारी
इस पहल के तहत गूगल ने भारती एयरटेल के साथ हाथ मिलाया है। मकसद है कि आरसीएस इकोसिस्टम में नेटवर्क स्तर पर ही स्पैम मैसेज को रोका जा सके। नई व्यवस्था के तहत एयरटेल की नेटवर्क इंटेलिजेंस को गूगल के आरसीएस प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा। इससे बिजनेस मैसेजिंग की रियल-टाइम जांच संभव होगी।
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एयरटेल के साथ साझेदारी
इस पहल के तहत गूगल ने भारती एयरटेल के साथ हाथ मिलाया है। मकसद है कि आरसीएस इकोसिस्टम में नेटवर्क स्तर पर ही स्पैम मैसेज को रोका जा सके। नई व्यवस्था के तहत एयरटेल की नेटवर्क इंटेलिजेंस को गूगल के आरसीएस प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा। इससे बिजनेस मैसेजिंग की रियल-टाइम जांच संभव होगी।
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कैसे काम करेगा नया सिस्टम?
इस एकीकृत सिस्टम के जरिए मैसेज भेजने वाले की पहचान सत्यापित की जाएगी। संदिग्ध या स्पैम मैसेज का पता लगाया जाएगा। यूजर्स की “डू नॉट डिस्टर्ब” (DND) प्राथमिकताओं को लागू किया जाएगा। टेलीकॉम कंपनी के मुताबिक, यह पहली बार है जब किसी दूरसंचार ऑपरेटर की स्पैम फिल्टरिंग प्रणाली को सीधे किसी ओवर-द-टॉप (OTT) मैसेजिंग प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा रहा है।
यह भी पढ़ें: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर, यूएई में एपल के 5 स्टोर अस्थायी रूप से बंद, 3 दिन की सुरक्षा एडवाइजरी लागू
क्या है रिच कम्युनिकेशन सर्विस?
रिच कम्युनिकेशन सर्विसेज (RCS) पारंपरिक एसएमएस का एक आधुनिक विकल्प है, जो एंड्रॉइड और अब आईफोन (iOS 18+) पर डिफॉल्ट मैसेजिंग एप में काम करता है। यह वाई-फाई या डेटा का उपयोग करके उच्च-गुणवत्ता वाली तस्वीरें, वीडियो, ग्रुप चैट 'रीड रिसीप्ट्स' (संदेश पढ़े जाने का संकेत) और टाइपिंग इंडिकेटर जैसी सुविधाएं प्रदान करता है। यह व्हाट्सएप जैसे एप्स की तरह काम करता है, लेकिन इसके लिए किसी अलग एप की आवश्यकता नहीं होती। यह एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन प्रदान करता है जिससे बातचीत सुरक्षित रहती है। यह अधिकांश आधुनिक एंड्रॉइड फोन में गूगल मैसेज एप के माध्यम से आता है।
यह भी पढ़ें: दुबई में अमेजन के डेटा सेंटर में आग, ईरानी हमलों के बीच कंपनी को बंद करनी पड़ी पॉवर सप्लाई
आरसीएस स्पैम क्या है?
आरसीएस (RCS) स्पैम एंड्रॉइड के 'गूगल मैसेज' एप के माध्यम से आता है, जिसमें स्कैमर्स वेरिफाइड बिजनेस प्रोफाइल या फेक अकाउंट्स का इस्तेमाल करते हैं। ये नकली इनाम, नौकरी या लॉटरी के लालच के साथ वीडियो/GIF भेजते हैं, जो आमतौर पर व्हाट्सएप जैसे एप्स से ज्यादा भरोसेमंद लगते हैं। कई लोग इनके चक्कर में फंसकर पैसे गंवा रहे हैं।
इस एकीकृत सिस्टम के जरिए मैसेज भेजने वाले की पहचान सत्यापित की जाएगी। संदिग्ध या स्पैम मैसेज का पता लगाया जाएगा। यूजर्स की “डू नॉट डिस्टर्ब” (DND) प्राथमिकताओं को लागू किया जाएगा। टेलीकॉम कंपनी के मुताबिक, यह पहली बार है जब किसी दूरसंचार ऑपरेटर की स्पैम फिल्टरिंग प्रणाली को सीधे किसी ओवर-द-टॉप (OTT) मैसेजिंग प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा रहा है।
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क्या है रिच कम्युनिकेशन सर्विस?
रिच कम्युनिकेशन सर्विसेज (RCS) पारंपरिक एसएमएस का एक आधुनिक विकल्प है, जो एंड्रॉइड और अब आईफोन (iOS 18+) पर डिफॉल्ट मैसेजिंग एप में काम करता है। यह वाई-फाई या डेटा का उपयोग करके उच्च-गुणवत्ता वाली तस्वीरें, वीडियो, ग्रुप चैट 'रीड रिसीप्ट्स' (संदेश पढ़े जाने का संकेत) और टाइपिंग इंडिकेटर जैसी सुविधाएं प्रदान करता है। यह व्हाट्सएप जैसे एप्स की तरह काम करता है, लेकिन इसके लिए किसी अलग एप की आवश्यकता नहीं होती। यह एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन प्रदान करता है जिससे बातचीत सुरक्षित रहती है। यह अधिकांश आधुनिक एंड्रॉइड फोन में गूगल मैसेज एप के माध्यम से आता है।
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आरसीएस स्पैम क्या है?
आरसीएस (RCS) स्पैम एंड्रॉइड के 'गूगल मैसेज' एप के माध्यम से आता है, जिसमें स्कैमर्स वेरिफाइड बिजनेस प्रोफाइल या फेक अकाउंट्स का इस्तेमाल करते हैं। ये नकली इनाम, नौकरी या लॉटरी के लालच के साथ वीडियो/GIF भेजते हैं, जो आमतौर पर व्हाट्सएप जैसे एप्स से ज्यादा भरोसेमंद लगते हैं। कई लोग इनके चक्कर में फंसकर पैसे गंवा रहे हैं।