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Drones: देश में 38,500 से ज्यादा ड्रोन और 40 हजार रिमोट पायलट पंजीकृत, कई क्षेत्रों में बढ़ा उपयोग

टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नीतीश कुमार Updated Tue, 17 Feb 2026 05:24 PM IST
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सार

भारत में ड्रोन सेक्टर तेजी से आगे बढ़ रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, देश में रजिस्टर्ड ड्रोन की संख्या 38,500 के पार पहुंच चुकी है। वहीं, 240 से अधिक मान्यता प्राप्त ड्रोन प्रशिक्षण संस्थान स्थापित किए जा चुके हैं।

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देश में कई सेक्टर्स में ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ा है। - फोटो : संवाद
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विस्तार

देश में ड्रोन इकोसिस्टम जिस तेजी से बढ़ रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, रजिस्टर्ड ड्रोन की संख्या 38,500 के पार पहुंच चुकी है। वहीं फरवरी 2026 तक DGCA से प्रमाणित रिमोट पायलटों की संख्या 39,890 हो गई है। यह संकेत है कि ड्रोन अब सीमित प्रयोग से निकलकर संगठित और प्रशिक्षित ढांचे में काम कर रहे हैं।
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240 से ज्यादा ट्रेनिंग सेंटर तैयार
ड्रोन संचालन और मेंटेनेंस के लिए देशभर में 240 से अधिक मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण संस्थान सक्रिय हैं। ये संस्थान युवाओं को रिमोट पायलटिंग और तकनीकी संचालन की ट्रेनिंग देकर नए रोजगार अवसर तैयार कर रहे हैं। सरकार का मानना है कि स्किल डेवलपमेंट इस सेक्टर की रीढ़ है।
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सरकार के अनुसार, ड्रोन सेक्टर अब केवल उड़ने वाली मशीनों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक संपूर्ण इकोसिस्टम में बदल चुका है। इसमें निर्माता, सॉफ्टवेयर और कंपोनेंट डेवलपर, सेवा प्रदाता, स्टार्टअप, शोध संस्थान, प्रमाणित पायलट और डिजिटल प्लेटफॉर्म शामिल हैं। यह पूरा ढांचा एक समान नियामक व्यवस्था के तहत संचालित हो रहा है, जिससे पारदर्शिता और सुरक्षा दोनों सुनिश्चित होती हैं।

खेत से लेकर शहरों तक बढ़ी ड्रोन की भूमिका
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, ड्रोन अब कृषि, भूमि और संपत्ति सर्वेक्षण, इंफ्रास्ट्रक्चर मॉनिटरिंग, आपदा आकलन और सरकारी सेवाओं में सक्रिय रूप से इस्तेमाल हो रहे हैं। इससे पारदर्शिता बढ़ी है और काम की सटीकता में भी सुधार आया है। भारत सरकार की स्वामित्व योजना के तहत अब तक 3.28 लाख गांवों का ड्रोन से सर्वे किया जा चुका है, जबकि 31 राज्यों के 1.82 लाख गांवों में 2.76 करोड़ संपत्ति कार्ड तैयार किए गए हैं। इससे ग्रामीण इलाकों में संपत्ति अधिकारों को स्पष्टता मिली है।

नमो ड्रोन दीदी से महिला सशक्तिकरण
ड्रोन तकनीक महिलाओं के जीवन में भी बदलाव ला रही है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, महिला स्वयं सहायता समूहों को 1,094 ड्रोन दिए गए हैं। इनमें से 500 से अधिक ड्रोन नमो ड्रोन दीदी पहल के तहत वितरित किए गए हैं। इससे खेती की उत्पादकता बढ़ी है और महिलाओं की आय में भी सुधार देखा गया है।

इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा में इस्तेमाल बढ़ा
ड्रोन का इस्तेमाल रेलवे ट्रैक और राष्ट्रीय राजमार्गों की निगरानी में भी हो रहा है। इससे रखरखाव कार्य तेज और अधिक सटीक हो पाए हैं। सरकार का कहना है कि स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा, कौशल विकास और केंद्र-राज्य योजनाओं के साथ तालमेल से ड्रोन तकनीक का उपयोग सामाजिक-आर्थिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों के लिए अहम साबित होगा।

सरकारी बयान के मुताबिक,  ड्रोन सेक्टर अब पायलट प्रोजेक्ट से निकलकर नवाचार-आधारित और मुख्यधारा का उद्योग बन चुका है।

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