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Amazon: 'गरीबों का टैक्स कम नहीं, पूरी तरह माफ होना चाहिए', जानिए जेफ बेजोस ने सिस्टम पर क्यों उठाए बड़े सवाल?
Tue, 26 May 2026 11:31 AM IST
Suyash Pandey
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Suyash Pandey
Updated Tue, 26 May 2026 11:31 AM IST
सार
Jeff Bezos On Tax: अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस ने न्यूयॉर्क सिटी की पब्लिक स्कूल व्यवस्था और 'टैक्स द रिच' जैसी आर्थिक नीतियों की खुलकर आलोचना की है। उन्होंने अमीरों पर ज्यादा टैक्स लगाने के बजाय समस्याओं की जड़ तक पहुंचकर समाधान निकालने पर जोर दिया। साथ ही बेजोस ने कहा कि कम आय वाले लोगों से इनकम टैक्स पूरी तरह खत्म कर देना चाहिए।
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Jeff Bezos
- फोटो : X
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विस्तार
दुनिया के सबसे सफल कारोबारियों में गिने जाने वाले और अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस अपने बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में उन्होंने न्यूयॉर्क शहर (NYC) के सरकारी स्कूल सिस्टम की कार्यप्रणाली और वहां के राजनेता जोहरान ममदानी की आर्थिक नीतियों की कड़ी आलोचना की है।
एक हालिया चर्चा में बेजोस ने साफ शब्दों में कहा कि समस्याओं पर सिर्फ पैसा बहाने या बजट बढ़ा देने से समाधान नहीं निकलता, बल्कि सिस्टम की कमियों को गहराई से समझना और प्रशासनिक स्तर पर सुधार करना ज्यादा जरूरी है।
स्कूल सिस्टम पर अमेजन वाला तंज: बेजोस ने न्यूयॉर्क की शिक्षा व्यवस्था की सुस्ती को समझाने के लिए अपने ही बिजनेस का उदाहरण दिया। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि अगर अमेजन का संचालन न्यूयॉर्क के स्कूलों की तरह होता तो ग्राहकों को उनका पैकेज मिलने में 6 हफ्ते लग जाते।
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इसके अलावा 100 डॉलर (लगभग 8,400 रुपये) की भारी डिलीवरी फीस चुकानी पड़ती और अंत में डिब्बे से गलत सामान निकलता। उनका स्पष्ट संदेश था कि कॉरपोरेट दुनिया में ऐसी लापरवाही तुरंत बिजनेस खत्म कर सकती है, लेकिन सरकारी तंत्र इसी ढर्रे पर चल रहा है।
शिक्षकों तक नहीं पहुंच रहा पैसा: बेजोस ने एक चौंकाने वाला आंकड़ा पेश किया। न्यूयॉर्क शहर हर साल एक छात्र की शिक्षा पर औसतन 44 हजार डॉलर (करीब 37 लाख रुपये) खर्च करता है। बेजोस ने पूछा कि इतने बड़े निवेश के बाद भी शिक्षा का स्तर और नतीजे इतने खराब क्यों हैं? उनका दावा है कि यह भारी भरकम रकम शिक्षकों की जेब तक नहीं पहुंच रही है। बल्कि सारा पैसा केवल सिस्टम और प्रशासनिक ढांचे को बनाए रखने में बर्बाद हो रहा है।
'अमीरों पर टैक्स' की राजनीति पर प्रहार: बेजोस ने उन राजनेताओं को भी आड़े हाथों लिया जो हर समस्या का समाधान केवल अमीरों पर टैक्स लगाने में खोजते हैं। बेजोस का मानना है कि राजनेता अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए अमीरों को विलेन बना देते हैं। उन्होंने अमेजन की 'द फाइव व्हायज' (The five whys) नीति का जिक्र किया, जहां किसी भी समस्या की जड़ तक पहुंचने के लिए पांच बार क्यों पूछा जाता है। उनके अनुसार, दूसरों पर उंगली उठाने से 10 सेकंड की संतुष्टि जरूर मिल सकती है, लेकिन इससे समाज का कोई भला नहीं होता।
गरीबों का टैक्स पूरी तरह माफ करने की वकालत: चर्चा के दौरान सबसे अहम मुद्दा अमेरिकी टैक्स सिस्टम का रहा। बेजोस ने मांग की कि अमेरिका जैसे दुनिया के सबसे अमीर देश को उन लोगों से बिल्कुल टैक्स नहीं लेना चाहिए जो अपने जीवन में आर्थिक संघर्ष कर रहे हैं या जिन्होंने अभी अपना करियर शुरू किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे लोगों के टैक्स को केवल कम नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि इसे पूरी तरह से खत्म कर देना चाहिए।
मेयर ममदानी का पलटवार
बेजोस के इन दावों पर तीखी प्रतिक्रिया भी देखने को मिली। जोहरान ममदानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर जवाब देते हुए लिखा कि वह क्वींस इलाके के ऐसे कई शिक्षकों को व्यक्तिगत रूप से जानते हैं जो बेजोस की इस टिप्पणी से कतई सहमत नहीं होंगे।
जेफ बेजोस का यह तीखा बयान ऐसे समय में सामने आया है जब उनका परिवार शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठा रहा है। सिस्टम की आलोचना करने के साथ ही बेजोस परिवार ने न्यूयॉर्क शहर में छोटे बच्चों की शुरुआती शिक्षा को बेहतर बनाने के उद्देश्य से 150 मिलियन डॉलर (लगभग 1,260 करोड़ रुपये) दान करने की घोषणा की है।
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एक हालिया चर्चा में बेजोस ने साफ शब्दों में कहा कि समस्याओं पर सिर्फ पैसा बहाने या बजट बढ़ा देने से समाधान नहीं निकलता, बल्कि सिस्टम की कमियों को गहराई से समझना और प्रशासनिक स्तर पर सुधार करना ज्यादा जरूरी है।
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जेफ बेजोस ने इस दौरान कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी राय रखी:
स्कूल सिस्टम पर अमेजन वाला तंज: बेजोस ने न्यूयॉर्क की शिक्षा व्यवस्था की सुस्ती को समझाने के लिए अपने ही बिजनेस का उदाहरण दिया। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि अगर अमेजन का संचालन न्यूयॉर्क के स्कूलों की तरह होता तो ग्राहकों को उनका पैकेज मिलने में 6 हफ्ते लग जाते।
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इसके अलावा 100 डॉलर (लगभग 8,400 रुपये) की भारी डिलीवरी फीस चुकानी पड़ती और अंत में डिब्बे से गलत सामान निकलता। उनका स्पष्ट संदेश था कि कॉरपोरेट दुनिया में ऐसी लापरवाही तुरंत बिजनेस खत्म कर सकती है, लेकिन सरकारी तंत्र इसी ढर्रे पर चल रहा है।
शिक्षकों तक नहीं पहुंच रहा पैसा: बेजोस ने एक चौंकाने वाला आंकड़ा पेश किया। न्यूयॉर्क शहर हर साल एक छात्र की शिक्षा पर औसतन 44 हजार डॉलर (करीब 37 लाख रुपये) खर्च करता है। बेजोस ने पूछा कि इतने बड़े निवेश के बाद भी शिक्षा का स्तर और नतीजे इतने खराब क्यों हैं? उनका दावा है कि यह भारी भरकम रकम शिक्षकों की जेब तक नहीं पहुंच रही है। बल्कि सारा पैसा केवल सिस्टम और प्रशासनिक ढांचे को बनाए रखने में बर्बाद हो रहा है।
'अमीरों पर टैक्स' की राजनीति पर प्रहार: बेजोस ने उन राजनेताओं को भी आड़े हाथों लिया जो हर समस्या का समाधान केवल अमीरों पर टैक्स लगाने में खोजते हैं। बेजोस का मानना है कि राजनेता अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए अमीरों को विलेन बना देते हैं। उन्होंने अमेजन की 'द फाइव व्हायज' (The five whys) नीति का जिक्र किया, जहां किसी भी समस्या की जड़ तक पहुंचने के लिए पांच बार क्यों पूछा जाता है। उनके अनुसार, दूसरों पर उंगली उठाने से 10 सेकंड की संतुष्टि जरूर मिल सकती है, लेकिन इससे समाज का कोई भला नहीं होता।
गरीबों का टैक्स पूरी तरह माफ करने की वकालत: चर्चा के दौरान सबसे अहम मुद्दा अमेरिकी टैक्स सिस्टम का रहा। बेजोस ने मांग की कि अमेरिका जैसे दुनिया के सबसे अमीर देश को उन लोगों से बिल्कुल टैक्स नहीं लेना चाहिए जो अपने जीवन में आर्थिक संघर्ष कर रहे हैं या जिन्होंने अभी अपना करियर शुरू किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे लोगों के टैक्स को केवल कम नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि इसे पूरी तरह से खत्म कर देना चाहिए।
मेयर ममदानी का पलटवार
बेजोस के इन दावों पर तीखी प्रतिक्रिया भी देखने को मिली। जोहरान ममदानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर जवाब देते हुए लिखा कि वह क्वींस इलाके के ऐसे कई शिक्षकों को व्यक्तिगत रूप से जानते हैं जो बेजोस की इस टिप्पणी से कतई सहमत नहीं होंगे।
शिक्षा के लिए 1260 करोड़ का दान
जेफ बेजोस का यह तीखा बयान ऐसे समय में सामने आया है जब उनका परिवार शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठा रहा है। सिस्टम की आलोचना करने के साथ ही बेजोस परिवार ने न्यूयॉर्क शहर में छोटे बच्चों की शुरुआती शिक्षा को बेहतर बनाने के उद्देश्य से 150 मिलियन डॉलर (लगभग 1,260 करोड़ रुपये) दान करने की घोषणा की है।