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'मुझसे गलती हुई...': OpenAI के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने माना, जानिए एआई को लेकर क्यों फेल हुई उनकी भविष्यवाणी?
Mon, 24 Aug 2026 03:28 PM IST
नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Mon, 24 Aug 2026 03:28 PM IST
सार
OpenAI के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने स्वीकार किया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से होने वाले बदलावों को लेकर उनका अनुमान गलत था। उनका मानना था कि AI आते ही इकॉनमी बदल जाएगी, लेकिन लोगों और कंपनियों का पुराना तरीका न छोड़ने की वजह से यह बदलाव बेहद धीमा है।
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सैम ऑल्टमैन, सीईओ, ओपनएआई
- फोटो : एआई जनरेटेड
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विस्तार
क्या आपको भी लगता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) बहुत जल्द हमारी नौकरियों और बिजनेस करने के तरीके को पूरी तरह खत्म कर देगा? अगर हां, तो OpenAI के सीईओ सैम ऑल्टमैन का नया बयान आपको जरूर सुनना चाहिए। ऑल्टमैन ने पहली बार यह खुलकर स्वीकार किया है कि एआई के असर को लेकर उन्होंने जो तेज बदलाव की भविष्यवाणी की थी, वह असल में गलत साबित हुई है।
बाजार की 'जड़ता' को समझने में हुई चूक
हाल ही में जाने-माने पॉडकास्टर डेविड सेंड्रा के साथ एक इंटरव्यू के दौरान, ऑल्टमैन ने अपनी पुरानी भविष्यवाणियों पर विचार किया। उन्होंने बताया कि उन्हें लगा था कि एआई के आते ही इकॉनमी में भूचाल आ जाएगा, लेकिन उन्होंने बाजार और इंसानी फितरत के 'इनेर्शिया' (जड़ता) को कम आंकने की भूल की। ऑल्टमैन ने आसान भाषा में समझाया कि लोग आज भी अपने पुराने प्रोडक्ट्स, जानी-पहचानी कंपनियों और काम करने के उसी पुराने तरीके से चिपके रहना पसंद करते हैं, भले ही उनके सामने कोई नई और बेहतरीन तकनीक क्यों न मौजूद हो।
GPT-4 से थी रातों-रात बदलाव की उम्मीद
ऑल्टमैन ने बताया कि जब साल 2023 में GPT-4 लॉन्च हुआ था, तब उन्हें पूरी उम्मीद थी कि सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री में तुरंत उथल-पुथल मच जाएगी। उनका अनुमान था कि कई सॉफ्टवेयर बिजनेस रातों-रात खतरे में पड़ जाएंगे और चीजों को आसानी से रिप्लेस कर दिया जाएगा। लेकिन हकीकत में ऐसा कुछ नहीं हुआ।
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ऑल्टमैन ने अपनी गलती मानते हुए कहा, "मुझे लगता है कि मैं कुछ चीजों को लेकर गलत था, खासकर स्पीड के मामले में। हमारी इकॉनमी में बहुत अधिक जड़ता है।" उनके मुताबिक, तकनीक में कोई कमी नहीं है, बल्कि एक पूरी अर्थव्यवस्था और समाज को बदलने में लंबा वक्त लगता है। कोई भी व्यक्ति या कंपनी रातों-रात अपना काम करने का तरीका नहीं बदलती।
धीमी रफ्तार क्यों है फायदेमंद?
दिलचस्प बात यह है कि ऑल्टमैन बदलाव की इस धीमी रफ्तार को बुरा नहीं मानते। उनका मानना है कि यह धीमा बदलाव असल में समाज और कंपनियों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। सब कुछ एक झटके में बदलने के बजाय, यह क्रमिक बदलाव लोगों को यह समझने का पूरा मौका दे रहा है कि एआई को उनके रोजमर्रा के काम में कैसे और कहां फिट किया जाए। ऑल्टमैन के अनुसार, "यह जड़ता बदलाव के इस दौर को ज्यादा आसान और सुरक्षित बना सकती है।"
हालांकि, ऑल्टमैन ने यह भी साफ किया कि धीमी रफ्तार का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि एआई का असर कम होगा। असर उतना ही बड़ा होगा, बस इसमें उनके पहले के अनुमान से ज्यादा समय लगेगा।
संक्षेप में समझें तो एआई तकनीक भले ही काफी तेजी से आगे बढ़ रही हो, लेकिन इसे अपनाने वाले लोग और बिजनेस अभी भी बहुत धीरे चल रहे हैं। तकनीक की स्पीड और समाज के अपनाने की रफ्तार के बीच का यही अंतर तय करेगा कि भविष्य में एआई की दुनिया कैसी होगी।
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बाजार की 'जड़ता' को समझने में हुई चूक
हाल ही में जाने-माने पॉडकास्टर डेविड सेंड्रा के साथ एक इंटरव्यू के दौरान, ऑल्टमैन ने अपनी पुरानी भविष्यवाणियों पर विचार किया। उन्होंने बताया कि उन्हें लगा था कि एआई के आते ही इकॉनमी में भूचाल आ जाएगा, लेकिन उन्होंने बाजार और इंसानी फितरत के 'इनेर्शिया' (जड़ता) को कम आंकने की भूल की। ऑल्टमैन ने आसान भाषा में समझाया कि लोग आज भी अपने पुराने प्रोडक्ट्स, जानी-पहचानी कंपनियों और काम करने के उसी पुराने तरीके से चिपके रहना पसंद करते हैं, भले ही उनके सामने कोई नई और बेहतरीन तकनीक क्यों न मौजूद हो।
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GPT-4 से थी रातों-रात बदलाव की उम्मीद
ऑल्टमैन ने बताया कि जब साल 2023 में GPT-4 लॉन्च हुआ था, तब उन्हें पूरी उम्मीद थी कि सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री में तुरंत उथल-पुथल मच जाएगी। उनका अनुमान था कि कई सॉफ्टवेयर बिजनेस रातों-रात खतरे में पड़ जाएंगे और चीजों को आसानी से रिप्लेस कर दिया जाएगा। लेकिन हकीकत में ऐसा कुछ नहीं हुआ।
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ऑल्टमैन ने अपनी गलती मानते हुए कहा, "मुझे लगता है कि मैं कुछ चीजों को लेकर गलत था, खासकर स्पीड के मामले में। हमारी इकॉनमी में बहुत अधिक जड़ता है।" उनके मुताबिक, तकनीक में कोई कमी नहीं है, बल्कि एक पूरी अर्थव्यवस्था और समाज को बदलने में लंबा वक्त लगता है। कोई भी व्यक्ति या कंपनी रातों-रात अपना काम करने का तरीका नहीं बदलती।
धीमी रफ्तार क्यों है फायदेमंद?
दिलचस्प बात यह है कि ऑल्टमैन बदलाव की इस धीमी रफ्तार को बुरा नहीं मानते। उनका मानना है कि यह धीमा बदलाव असल में समाज और कंपनियों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। सब कुछ एक झटके में बदलने के बजाय, यह क्रमिक बदलाव लोगों को यह समझने का पूरा मौका दे रहा है कि एआई को उनके रोजमर्रा के काम में कैसे और कहां फिट किया जाए। ऑल्टमैन के अनुसार, "यह जड़ता बदलाव के इस दौर को ज्यादा आसान और सुरक्षित बना सकती है।"
हालांकि, ऑल्टमैन ने यह भी साफ किया कि धीमी रफ्तार का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि एआई का असर कम होगा। असर उतना ही बड़ा होगा, बस इसमें उनके पहले के अनुमान से ज्यादा समय लगेगा।
संक्षेप में समझें तो एआई तकनीक भले ही काफी तेजी से आगे बढ़ रही हो, लेकिन इसे अपनाने वाले लोग और बिजनेस अभी भी बहुत धीरे चल रहे हैं। तकनीक की स्पीड और समाज के अपनाने की रफ्तार के बीच का यही अंतर तय करेगा कि भविष्य में एआई की दुनिया कैसी होगी।