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Smart TV: 2026 में स्मार्ट टीवी लेने का सोच रहे हैं? खरीदने से पहले ये 5 बातें जान गए तो पछतावा नहीं होगा

टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जागृति Updated Thu, 15 Jan 2026 07:00 AM IST
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सार

Smart TV : आजकल टीवी केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि घर के सजावट का एक अहम हिस्सा बन चुका है। ऐसे में एक स्मार्ट टीवी चुनना किसी चुनौती से कम नहीं। तकनीक इतनी तेजी से बदल रही है कि सिर्फ बड़ा स्क्रीन होना ही काफी नहीं है। एक गलत फैसला आपके पैसे और देखने के अनुभव दोनों को खराब कर सकता है। स्क्रीन साइज, पैनल टाइप और ऑपरेटिंग सिस्टम का सही चुनाव कैसे करें? जानिए इस लेख में...
 

Thinking buying smart TV in 2026? you know these 5 things before buying you won regret it
पिक्चर क्वॉलिटी भी रखती है मायने - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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आज के समय में स्मार्ट टीवी चुनना सिर्फ बड़ी स्क्रीन या नया मॉडल लेने तक सीमित नहीं है। 2026 में सही स्मार्ट टीवी खरीदने के लिए स्क्रीन साइज, पैनल क्वालिटी, 4K रेजोल्यूशन, ऑपरेटिंग सिस्टम, साउंड, कनेक्टिविटी और गेमिंग सपोर्ट जैसे फैक्टर्स बेहद जरूरी हो गए हैं। गलत चुनाव करने पर पिक्चर क्वालिटी, परफॉर्मेंस और फ्यूचर सपोर्ट में समझौता करना पड़ सकता है। इस लेख में स्मार्ट टीवी खरीदते समय ध्यान रखने वाली पांच अहम बाते जानेंगे, जिससे आपका पैसा भी बचेगा और बेहतरीन व्यूइंग एक्सपीरियंस भी मिलेगा।

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1. कमरे के हिसाब से चुनें परफेक्ट फिट

अक्सर लोगों को लगता है कि बड़ा टीवी अच्छा लुक दे सकता है, लेकिन टीवी खरीदते समय बड़ा मतलब बेहतर वाला फार्मूला हमेशा काम नहीं करता। टीवी की दूरी हमेशा आपकी बैठने की दूरी स्क्रीन के डायगोनल साइज की 1.5 से 2.5 गुना होनी चाहिए। इसलिए 43 इंच का टीवी 6-8 फीट की दूरी के लिए बेस्ट माना जाता है, जबकि 75-इंच का टीवी केवल बड़े हॉल्स के लिए ही लें, ताकि आंखों पर जोर न पड़े।

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2. असली फर्क यहीं से शुरू होता 

टीवी की पिक्चर क्वालिटी का असली फर्क उसके पैनल से ही शुरू होता है। टीवी चाहे कितना भी नया या महंगा क्यों न हो, अगर पैनल अच्छा नहीं है तो देखने का अनुभव फीका ही रहेगा। VA पैनल गहरे ब्लैक्स और मजबूत कंट्रास्ट देता है, इसलिए यह कम रोशनी या डार्क रूम में फिल्म देखने के लिए सबसे बेहतर माना जाता है। वहीं, IPS पैनल का फायदा इसका वाइड व्यूइंग एंगल है, जिससे परिवार के कई लोग अलग-अलग एंगल से टीवी देखें तब भी कलर्स फीके नहीं पड़ते। इसके अलावा QLED या Mini-LED टेक्नोलॉजी ब्राइटनेस और कलर एक्यूरेसी को काफी बेहतर बना देती है, जिससे एचडीआर कंटेंट ज्यादा दमदार और जीवंत नजर आता है।

 

यही वजह है कि 30 हजार और 60 हजार के 4K टीवी के बीच बड़ा अंतर देखने को मिलता है। 30,000 के 4K स्मार्ट टीवी में आपको सिर्फ हाई रेजोल्यूशन मिलता है, लेकिन ब्राइटनेस कम होती है, कलर डेप्थ सीमित रहती है और HDR का असर नाम मात्र का होता है। इसके उलट में अगर 60 हजार रेंज की बात करें तो इसमें बेहतर क्वालिटी का पैनल, मजबूत बैकलाइटिंग, स्मूद मोशन हैंडलिंग और तेज प्रोसेसर मिलता है, जिससे पिक्चर ज्यादा शार्प, कलर्स ज्यादा रिच और पूरा इंटरफेस ज्यादा फास्ट और स्मूद लगता है। यही फर्क रोजमर्रा के इस्तेमाल में साफ नजर आता है और लंबे समय तक बेहतर अनुभव देता है।

3. FHD या HD टीवी अब क्यों न खरीदें?

2026 में HD या Full HD स्मार्ट टीवी खरीदना अब समझदारी का फैसला नहीं माना जाता, क्योंकि टीवी और कंटेंट दोनों तेजी से 4K की तरफ शिफ्ट हो चुके हैं। आज Netflix, प्राइम वीडियो, यूट्यूब जैसे लगभग सभी बड़े ओटीटी प्लेटफॉर्म अपना ज्यादातर नया कंटेंट 4K रिजॉल्यूशन में पेश कर रहे हैं, जिससे एचडी या एफएचडी टीवी पर वही कंटेंट अपनी पूरी क्वालिटी में नजर नहीं आता। खास तौर पर 40-इंच से बड़ी स्क्रीन पर फुल एचडी पिक्चर सॉफ्ट और कम शार्प दिखने लगती है, जबकि 4K में डिटेल्स साफ और नेचुरल लगती हैं।

सबसे बड़ी बात ये है कि 4K टीवी अब महंगे नहीं रहे। भारत में अच्छे 4K स्मार्ट टीवी 20 हजार के आसपास से मिलने लगे हैं, जिससे एचडी या एफएचडी लेने का कोई ठोस कारण नहीं बचता। इसके अलावा, गेमिंग कंसोल जैसे PS5 और Xbox और नए सेट-टॉप बॉक्स भी 4K आउटपुट के लिए डिजाइन किए गए हैं। ऐसे में एचडी या एफएचडी टीवी न तो इन डिवाइसेज का पूरा फायदा उठा पाते हैं और न ही भविष्य के कंटेंट के लिए तैयार रहते हैं। इसलिए, अगर आप चाहते हैं कि आपका टीवी आने वाले कई वर्षों तक रिलायबल और अप-टू-डेट बना रहे, तो एचडी या एफएचडी की बजाय सीधे 4K स्मार्ट टीवी चुनना ही सही फैसला है।

4. बेहतर एक्सपीरियंस के लिए स्मूदनेस जरूरी

स्मार्ट टीवी का असली और रोज का अनुभव उसके ऑपरेटिंग सिस्टम (OS) पर ही निर्भर करता है, क्योंकि यही तय करता है कि टीवी कितना स्मूद, तेज और इस्तेमाल में आसान होगा। गूगल टीवी सबसे ज्यादा एप सपोर्ट देता है और इसका वॉयस कंट्रोल काफी पावरफुल होता है, जिससे आप बोलकर ही कंटेंट सर्च और कंट्रोल कर सकते हैं। WebOS और Tizen अपने फास्ट परफॉर्मेंस, क्लीन इंटरफेस और आसान नेविगेशन के लिए जाने जाते हैं, जिससे पहली बार इस्तेमाल करने वालों को भी परेशानी नहीं होती। वहीं फायर ओएस खास तौर पर एमाजॉन प्राइम वीडियो यूजर्स के लिए बेहतर ऑप्शन साबित हो सकता है। टीवी खरीदते समय मेन्यू की स्पीड, एप लॉन्च होने में लगने वाला समय और वॉयस कमांड कितनी जल्दी काम करता है, इनको भी जरूर ध्यान दें।


5. कैजुअल गेमर्स के लिए भी फायदेमंद

अगर आप गेमिंग करते हैं, चाहे कैजुअल लेवल पर ही क्यों न हो, तो गेमिंग सपोर्ट फीचर्स भी फायदेमंद साबित हो सकते हैं। 120Hz रिफ्रेश रेट, HDMI 2.1, VRR ( वायरेबल रिफ्रेश रेट) और ALLM ( ऑटो लो लेटेंसी मोड) जैसे फीचर्स गेम को ज्यादा स्मूद बनाते हैं और इनपुट लैग कम करते हैं। ये फीचर्स खास तौर पर PS5, Xbox और क्लाउड गेमिंग के लिए जरूरी माने जाते हैं, जिससे गेम खेलते समय बेहतर कंट्रोल और रियल-टाइम रिस्पॉन्स मिलता है।

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