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हाथरस: यूपी बोर्ड से परीक्षा देने वालों की घट रही संख्या, पांच साल में 7644 परीक्षार्थियों ने फेरा मुंह

Mon, 19 Oct 2026 03:07 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस Published by: अलीगढ़ ब्यूरो Updated Mon, 19 Oct 2026 03:07 AM IST
सार

अच्छे अंक पाने की चाह में विद्यार्थी दूसरे बोर्डों की ओर रुख कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में निजी स्कूलों की बढ़ती संख्या भी यूपी बोर्ड की छात्र संख्या घटने की वजह है। अभिभावक प्राथमिक स्तर से ही बच्चों का दाखिला निजी स्कूलों में करा रहे हैं। इससे माध्यमिक विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या लगातार कम हो रही है।

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In five years, 7,644 candidates turned their backs on the UP Board
यूपी बोर्ड। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा में परीक्षार्थियों की संख्या लगातार घट रही है। हाथरस जिले में पांच साल के भीतर 7,644 परीक्षार्थियों ने यूपी बोर्ड से मुंह फेर लिया है। 2027 की बोर्ड परीक्षा के लिए सिर्फ 43,450 विद्यार्थियों ने पंजीकरण कराया है।

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विभागीय आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 में 51,094 परीक्षार्थियों ने पंजीकरण कराया था। इसके बाद हर साल संख्या घटती जा रही है। शिक्षाविदों का कहना है कि परीक्षा में सख्ती इसका प्रमुख कारण है। डबल सीसीटीवी कैमरों की निगरानी और कड़ी जांच से नकल की गुंजाइश कम हुई है।
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अच्छे अंक पाने की चाह में विद्यार्थी दूसरे बोर्डों की ओर रुख कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में निजी स्कूलों की बढ़ती संख्या भी यूपी बोर्ड की छात्र संख्या घटने की वजह है। अभिभावक प्राथमिक स्तर से ही बच्चों का दाखिला निजी स्कूलों में करा रहे हैं। इससे माध्यमिक विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या लगातार कम हो रही है।

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पांच वर्षों में पंजीकरण का आंकड़ा
साल - परीक्षार्थी

2023 : 51,094
2024 : 48,643
2025: 45,911
2026: 44,360
2027: 43,450
5 साल में कुल कमी: 7,644 परीक्षार्थी घटे।

नकलविहीन परीक्षा और निजी स्कूलों का बढ़ता जाल प्रमुख कारण
यूपी बोर्ड की परीक्षाओं में सख्ती और पारदर्शिता बढ़ने से नकल पर लगाम लगी है। डबल कैमरों की निगरानी में परीक्षा होने से नकल की गुंजाइश कम हुई है। अच्छे अंकों की उम्मीद में विद्यार्थी दूसरे बोर्डों की ओर रुख कर रहे हैं। गली-मोहल्लों में निजी स्कूलों की बढ़ती संख्या भी छात्र संख्या घटने का कारण है। - राजेश शुक्ला, प्रधानाचार्य, पीबीएएस इंटर कॉलेज, हाथरस।

धीमा अपडेशन और गैर-शैक्षणिक कार्यों का बोझ भी जिम्मेदार
सीबीएसई बोर्ड समय और आधुनिकता के अनुसार तेजी से बदलाव कर रहा है, जबकि यूपी बोर्ड की रफ्तार धीमी है। सीबीएसई शिक्षकों का पूरा ध्यान पढ़ाई पर रहता है, लेकिन यूपी बोर्ड के शिक्षकों को अतिरिक्त सरकारी कार्य भी करने पड़ते हैं। इससे शिक्षण कार्य प्रभावित होता है और विद्यार्थियों की पढ़ाई में बाधा आती है। - सौरभ जैन, प्रधानाचार्य, उमेशचंद्र कौशिक आदर्श विद्या निकेतन इंटर कॉलेज, हाथरस।

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