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Amethi News: दूसरों की सहायता करना सच्ची मानवता
Sat, 24 Oct 2026 01:10 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Sat, 24 Oct 2026 01:10 AM IST
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गौरीगंज के भटगवां गांव में कथा सुनते श्रद्धालु। स्रोत: आयोजक
अमेठी सिटी। जीवन की सार्थकता केवल अपने लिए जीने में नहीं, बल्कि दूसरों के काम आने में है। प्रेम से रिश्ते मजबूत होते हैं। त्याग से व्यक्ति के चरित्र में निखार आता है। गौरीगंज के भटगवां गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन शुक्रवार को वृंदावन से आए प्रवाचक दिनकर दिव्य ने श्रद्धालुओं को इन जीवन मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा दी।
प्रवाचक ने कहा कि मनुष्य को अपने व्यवहार में प्रेम और वाणी में मधुरता बनाए रखनी चाहिए। दूसरों की पीड़ा को समझना और जरूरत के समय उनकी सहायता करना सच्ची मानवता है। जीवन में कई बार अपने सुख से पहले दूसरों की जरूरतों को महत्व देना पड़ता है। यही भावना परिवार और समाज में आपसी विश्वास को मजबूत करती है।
उन्हाेंने कहा कि त्याग का अर्थ केवल किसी वस्तु को छोड़ना नहीं, बल्कि अपने स्वार्थ और अहंकार पर नियंत्रण रखना भी है। जो व्यक्ति दूसरों के प्रति सम्मान रखता है और बिना किसी अपेक्षा के सेवा करता है, वह लोगों के दिलों में स्थान बनाता है। प्रेम, सेवा और त्याग को जीवन का हिस्सा बनाकर व्यक्ति न केवल स्वयं संतोष प्राप्त कर सकता है, बल्कि समाज को भी बेहतर बनाने में योगदान दे सकता है। कथा के दौरान दिलीप कुमार उपाध्याय, अविनाश कुमार, तरुण, सुभाषचंद्र, अनुराग और आशीष आदि मौजूद रहे।
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प्रवाचक ने कहा कि मनुष्य को अपने व्यवहार में प्रेम और वाणी में मधुरता बनाए रखनी चाहिए। दूसरों की पीड़ा को समझना और जरूरत के समय उनकी सहायता करना सच्ची मानवता है। जीवन में कई बार अपने सुख से पहले दूसरों की जरूरतों को महत्व देना पड़ता है। यही भावना परिवार और समाज में आपसी विश्वास को मजबूत करती है।
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उन्हाेंने कहा कि त्याग का अर्थ केवल किसी वस्तु को छोड़ना नहीं, बल्कि अपने स्वार्थ और अहंकार पर नियंत्रण रखना भी है। जो व्यक्ति दूसरों के प्रति सम्मान रखता है और बिना किसी अपेक्षा के सेवा करता है, वह लोगों के दिलों में स्थान बनाता है। प्रेम, सेवा और त्याग को जीवन का हिस्सा बनाकर व्यक्ति न केवल स्वयं संतोष प्राप्त कर सकता है, बल्कि समाज को भी बेहतर बनाने में योगदान दे सकता है। कथा के दौरान दिलीप कुमार उपाध्याय, अविनाश कुमार, तरुण, सुभाषचंद्र, अनुराग और आशीष आदि मौजूद रहे।
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