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Amroha News: कागजों में पांच हजार तालाब..माैके पर मकान
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Fri, 30 Jan 2026 12:49 AM IST
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अमरोहा। राजस्व अभिलेखों में जिले में तालाबों की संख्या करीब पांच हजार है लेकिन कई जगह तालाबों का अस्तित्व समाप्त हो चुका है। तालाबों को पाटकर या तो भवनों का निर्माण कर लिया गया या कहीं कब्जा कर खेती की जा रही है। अधिकांश तालाबों का अस्तित्व मिट चुका है।
गुजरे जमाने में यह तालाब जल संचयन का प्रमुख स्रोत हुआ करते थे। इनमें गांवों का पानी इकट्टा होता था, जिसको सिंचाई में भी इस्तेमाल कर लिया जाता था लेकिन समय बदला तो तालाबों का स्वरूप भी बदलने लगा। तालाबों को संरक्षित के करने के लिए शासन लगातार प्रयास कर रहा है, लेकिन कार्रवाई दिशा निर्देशों तक सीमित है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की धरोहर इन तालाबाें पर लगातार कब्जे करने के मामले सामने आते रहे हैं। विकास की दौड़ में पुरानी धरोहरें पीछे छूट गई और उनका अस्तित्व ही सिमटने लगा।
यहीं वजह है कि तालाबों का दायरा भी सिमटने लगा है। तालाबों को पाटकर बड़े-बड़े भवन खड़े कर दिए गए है, तो कहीं कब्जा कर फसलें बोई जा रही हैं। पुराने समय में यही तालाब गांवों के पानी की निकासी और जल संचयन के प्रमुख स्रोत हुआ करते थे, लेकिन इनके खत्म होने से गांवाें में पानी की निकासी की समस्या बढ़ गई है। इसी कारण कई गांवों में घरों से निकलने वाला पानी सड़कों पर ही भरा है, जिससे गंदगी तो बढ़ती ही है। साथ ही बीमारी फैलने का खतरा भी बना रहता है। तालाबों को बचाए जाने के लिए स्थानीय प्रशासन की मुहिम भी कागजों में बनकर रह गई है।
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गुजरे जमाने में यह तालाब जल संचयन का प्रमुख स्रोत हुआ करते थे। इनमें गांवों का पानी इकट्टा होता था, जिसको सिंचाई में भी इस्तेमाल कर लिया जाता था लेकिन समय बदला तो तालाबों का स्वरूप भी बदलने लगा। तालाबों को संरक्षित के करने के लिए शासन लगातार प्रयास कर रहा है, लेकिन कार्रवाई दिशा निर्देशों तक सीमित है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की धरोहर इन तालाबाें पर लगातार कब्जे करने के मामले सामने आते रहे हैं। विकास की दौड़ में पुरानी धरोहरें पीछे छूट गई और उनका अस्तित्व ही सिमटने लगा।
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यहीं वजह है कि तालाबों का दायरा भी सिमटने लगा है। तालाबों को पाटकर बड़े-बड़े भवन खड़े कर दिए गए है, तो कहीं कब्जा कर फसलें बोई जा रही हैं। पुराने समय में यही तालाब गांवों के पानी की निकासी और जल संचयन के प्रमुख स्रोत हुआ करते थे, लेकिन इनके खत्म होने से गांवाें में पानी की निकासी की समस्या बढ़ गई है। इसी कारण कई गांवों में घरों से निकलने वाला पानी सड़कों पर ही भरा है, जिससे गंदगी तो बढ़ती ही है। साथ ही बीमारी फैलने का खतरा भी बना रहता है। तालाबों को बचाए जाने के लिए स्थानीय प्रशासन की मुहिम भी कागजों में बनकर रह गई है।
