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Amroha News: निजी ब्लड बैंक अब बिना अनुमति नहीं लगा सकेंगे शिविर
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Thu, 30 Apr 2026 12:23 AM IST
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अमरोहा। जिले में खून की कालाबाजारी पर अंकुश लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने सख्त कदम उठाए हैं। प्रभारी सीएमओ डॉ. योगेंद्र सिंह ने निर्देश जारी करते हुए कहा है कि अब कोई भी निजी ब्लड बैंक संचालक बिना अनुमति के रक्तदान शिविर नहीं लगा सकेगा। शिविर आयोजित करने से पहले संचालकों को सीएमओ से अनुमति लेना अनिवार्य होगा, अन्यथा कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
नई व्यवस्था के तहत निजी ब्लड बैंक संचालकों को राज्य रक्त संचरण परिषद की वेबसाइट के माध्यम से अनुमति लेनी होगी। इसके बाद ही वे शिविर लगाकर रक्त संग्रह कर सकेंगे। साथ ही प्रत्येक शिविर में जिला ब्लड बैंक की टीम की मौजूदगी भी सुनिश्चित की जाएगी, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे। सीएमओ ने स्पष्ट किया है कि अब निजी ब्लड बैंकों को एक-एक यूनिट रक्त का पूरा हिसाब देना होगा। हर 15 दिन में रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी, जिसमें यह बताना अनिवार्य होगा कि शिविर में कितना रक्त एकत्र हुआ और किन-किन मरीजों को रक्त उपलब्ध कराया गया। इसके साथ ही मरीजों का नाम, पता और मोबाइल नंबर भी दर्ज करना होगा। दरअसल, जिले में छह निजी ब्लड बैंक संचालित हैं, जो अब तक बिना किसी ठोस निगरानी के स्वैच्छिक रक्तदान शिविर आयोजित कर रहे थे। इससे रक्त के उपयोग और वितरण को लेकर पारदर्शिता की कमी बनी हुई थी। आरोप हैं कि कुछ संचालक मनमाने तरीके से मरीजों को ऊंचे दामों पर रक्त उपलब्ध करा रहे थे। स्वास्थ्य विभाग के इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गंभीर मरीजों को समय पर और उचित दर पर रक्त मिल सके। जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों को जरूरत पड़ने पर मुफ्त रक्त उपलब्ध कराया जाता है, जबकि बाहरी मरीजों के लिए निर्धारित शुल्क लिया जाता है। उधर, निजी ब्लड बैंकों की बढ़ती संख्या के कारण जिला ब्लड बैंक में रक्त की कमी भी देखी जा रही है। कई महत्वपूर्ण ब्लड ग्रुप, खासकर नेगेटिव ग्रुप की उपलब्धता प्रभावित हुई है, जिससे मरीजों को बाहर से रक्त मंगाने की नौबत आ रही है। सीएमओ ने चेतावनी दी है कि नियमों की अनदेखी करने पर संबंधित ब्लड बैंक का पंजीकरण निरस्त कर संचालक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। सभी निजी ब्लड बैंक संचालकों को इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
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नई व्यवस्था के तहत निजी ब्लड बैंक संचालकों को राज्य रक्त संचरण परिषद की वेबसाइट के माध्यम से अनुमति लेनी होगी। इसके बाद ही वे शिविर लगाकर रक्त संग्रह कर सकेंगे। साथ ही प्रत्येक शिविर में जिला ब्लड बैंक की टीम की मौजूदगी भी सुनिश्चित की जाएगी, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे। सीएमओ ने स्पष्ट किया है कि अब निजी ब्लड बैंकों को एक-एक यूनिट रक्त का पूरा हिसाब देना होगा। हर 15 दिन में रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी, जिसमें यह बताना अनिवार्य होगा कि शिविर में कितना रक्त एकत्र हुआ और किन-किन मरीजों को रक्त उपलब्ध कराया गया। इसके साथ ही मरीजों का नाम, पता और मोबाइल नंबर भी दर्ज करना होगा। दरअसल, जिले में छह निजी ब्लड बैंक संचालित हैं, जो अब तक बिना किसी ठोस निगरानी के स्वैच्छिक रक्तदान शिविर आयोजित कर रहे थे। इससे रक्त के उपयोग और वितरण को लेकर पारदर्शिता की कमी बनी हुई थी। आरोप हैं कि कुछ संचालक मनमाने तरीके से मरीजों को ऊंचे दामों पर रक्त उपलब्ध करा रहे थे। स्वास्थ्य विभाग के इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गंभीर मरीजों को समय पर और उचित दर पर रक्त मिल सके। जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों को जरूरत पड़ने पर मुफ्त रक्त उपलब्ध कराया जाता है, जबकि बाहरी मरीजों के लिए निर्धारित शुल्क लिया जाता है। उधर, निजी ब्लड बैंकों की बढ़ती संख्या के कारण जिला ब्लड बैंक में रक्त की कमी भी देखी जा रही है। कई महत्वपूर्ण ब्लड ग्रुप, खासकर नेगेटिव ग्रुप की उपलब्धता प्रभावित हुई है, जिससे मरीजों को बाहर से रक्त मंगाने की नौबत आ रही है। सीएमओ ने चेतावनी दी है कि नियमों की अनदेखी करने पर संबंधित ब्लड बैंक का पंजीकरण निरस्त कर संचालक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। सभी निजी ब्लड बैंक संचालकों को इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
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