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Ayodhya News: 500 वर्षों की प्रतीक्षा के बाद साकार हुआ सपना, आमंत्रित सदस्यों ने साझा किए भावुक अनुभव
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Thu, 19 Mar 2026 07:51 PM IST
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राममंदिर में श्री राम यंत्र के स्थापना के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में प्रवेश के पूर्व जय श्री
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नितिन श्रीवास्तव
अयोध्या। श्री राम यंत्र स्थापना के ऐतिहासिक अवसर पर अयोध्या पहुंचे आमंत्रित सदस्यों में गहरा उत्साह और भावनात्मक जुड़ाव देखने को मिला। न भूतो न भविष्यति के भाव के साथ कई श्रद्धालुओं ने इस पल को जीवन का सबसे सौभाग्यशाली क्षण बताया। प्रशासन की ओर से सुबह 8 बजे से ही आमंत्रित अतिथियों को रंग महल बैरियर और रामजन्म भूमि पथ से प्रवेश दिया गया, जिसकी समयसीमा 10 बजे तक निर्धारित थी। तय समय के भीतर सभी दलों ने सुव्यवस्थित तरीके से प्रवेश किया। प्रवेश के दौरान अतिथियों को मोबाइल और शास्त्र ले जाने के लिए पहले ही श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने अपील जारी की थी। ट्रस्ट की ओर से लिए गए तीन हजार कमरों में बुधवार की देर शाम अतिथि पहुंच गए थे। कई राज्यों से अतिथियों को श्रीराम यंत्र की स्थापना कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया था।
अहमदाबाद से आए दल के सदस्य पार्षद मनीष पटेल ने कहा कि 500 वर्षों के लंबे संघर्ष और तपस्या के बाद यह अवसर मिला है, यह हमारे लिए अविस्मरणीय है। ऐसा लग रहा है मानो इतिहास हमारे सामने जीवंत हो उठा हो। उनके साथ आईं भावना पटेल ने इसे जीवन का सबसे पवित्र दिन बताया। मनीष ने कहा कि दो बार कारसेवा करने का अवसर मिला। उस दिन के बाद से आज अयोध्या आगमन हुआ है, पूरी अयोध्या बदल गई है। घनश्याम भाई ने कहा कि 2011 में आया था, तब और अब की अयोध्या में काफी अंतर है। अब यहां रौनक बढ़ गई है। अयोध्या को देखकर लग रहा है कि पूरे विश्व में इसका डंका बजेगा। राम की जन्मभूमि पर आकर जीवन धन्य हो गया है। प्रयागराज से पहुंचे युवाओं में राम जन्मभूमि मंदिर को लेकर काफी उत्साह देखने को मिला। दल की सदस्य आंचल सिंह, युवराज और अंशुमान मिश्र ने कहा कि हमने बचपन से राम मंदिर के बारे में सुना था, लेकिन आज उसे इस रूप में देखना गर्व और आस्था दोनों का संगम है। संदीप ने कहा कि आमंत्रण मिलना ही अपने आप में बड़ी बात है और यह क्षण पीढ़ियों तक याद रखा जाएगा। कार्यक्रम स्थल के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे, जिससे आमंत्रित सदस्यों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। सभी जय श्री राम के जयघोष के साथ सेल्फी लेने के बाद ही राम मंदिर की ओर बढ़ रहे थे। श्रद्धालुओं के चेहरे पर संतोष और आस्था की चमक इस ऐतिहासिक आयोजन की महत्ता को बयां कर रही थी।
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अयोध्या। श्री राम यंत्र स्थापना के ऐतिहासिक अवसर पर अयोध्या पहुंचे आमंत्रित सदस्यों में गहरा उत्साह और भावनात्मक जुड़ाव देखने को मिला। न भूतो न भविष्यति के भाव के साथ कई श्रद्धालुओं ने इस पल को जीवन का सबसे सौभाग्यशाली क्षण बताया। प्रशासन की ओर से सुबह 8 बजे से ही आमंत्रित अतिथियों को रंग महल बैरियर और रामजन्म भूमि पथ से प्रवेश दिया गया, जिसकी समयसीमा 10 बजे तक निर्धारित थी। तय समय के भीतर सभी दलों ने सुव्यवस्थित तरीके से प्रवेश किया। प्रवेश के दौरान अतिथियों को मोबाइल और शास्त्र ले जाने के लिए पहले ही श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने अपील जारी की थी। ट्रस्ट की ओर से लिए गए तीन हजार कमरों में बुधवार की देर शाम अतिथि पहुंच गए थे। कई राज्यों से अतिथियों को श्रीराम यंत्र की स्थापना कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया था।
अहमदाबाद से आए दल के सदस्य पार्षद मनीष पटेल ने कहा कि 500 वर्षों के लंबे संघर्ष और तपस्या के बाद यह अवसर मिला है, यह हमारे लिए अविस्मरणीय है। ऐसा लग रहा है मानो इतिहास हमारे सामने जीवंत हो उठा हो। उनके साथ आईं भावना पटेल ने इसे जीवन का सबसे पवित्र दिन बताया। मनीष ने कहा कि दो बार कारसेवा करने का अवसर मिला। उस दिन के बाद से आज अयोध्या आगमन हुआ है, पूरी अयोध्या बदल गई है। घनश्याम भाई ने कहा कि 2011 में आया था, तब और अब की अयोध्या में काफी अंतर है। अब यहां रौनक बढ़ गई है। अयोध्या को देखकर लग रहा है कि पूरे विश्व में इसका डंका बजेगा। राम की जन्मभूमि पर आकर जीवन धन्य हो गया है। प्रयागराज से पहुंचे युवाओं में राम जन्मभूमि मंदिर को लेकर काफी उत्साह देखने को मिला। दल की सदस्य आंचल सिंह, युवराज और अंशुमान मिश्र ने कहा कि हमने बचपन से राम मंदिर के बारे में सुना था, लेकिन आज उसे इस रूप में देखना गर्व और आस्था दोनों का संगम है। संदीप ने कहा कि आमंत्रण मिलना ही अपने आप में बड़ी बात है और यह क्षण पीढ़ियों तक याद रखा जाएगा। कार्यक्रम स्थल के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे, जिससे आमंत्रित सदस्यों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। सभी जय श्री राम के जयघोष के साथ सेल्फी लेने के बाद ही राम मंदिर की ओर बढ़ रहे थे। श्रद्धालुओं के चेहरे पर संतोष और आस्था की चमक इस ऐतिहासिक आयोजन की महत्ता को बयां कर रही थी।
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