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Ayodhya News: तारुन में खेत बचाओ अभियान के तहत प्राकृतिक खेती अपनाने की सलाह
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Mon, 08 Jun 2026 09:32 PM IST
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तारुन। पिछौरा पंचायत भवन पर सोमवार को खेत बचाओ अभियान के अंतर्गत एक कार्यक्रम हुआ। इसमें मृदा स्वास्थ्य परीक्षण और जागरूकता पर जोर दिया गया। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को रासायनिक खेती छोड़कर प्राकृतिक एवं जैविक खेती अपनाने की सलाह दी।
मृदा परीक्षण प्रयोगशाला अध्यक्ष के.के. मौर्य ने रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम हो रही है और लागत बढ़ रही है। रासायनिक खेती स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है। मौर्य ने किसानों से गोबर की खाद व जैविक उर्वरक अपनाने की अपील की। मृदा परीक्षण सहायक दुर्गेश गुप्ता ने अभियान का उद्देश्य बताया। इसका लक्ष्य खेती की लागत कम करना और किसानों की आय बढ़ाना है। साथ ही भूमि की गुणवत्ता सुधारना भी इस अभियान का प्रमुख उद्देश्य है। केवीके वैज्ञानिक जेडी वर्मा ने गांव स्तर पर किसानों को जागरूक करने की बात कही। इससे किसानों को कम लागत में अधिक लाभ मिल सकेगा। उद्यान वैज्ञानिक चंद्रभान शुक्ला ने हरी खाद व प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग पर जोर दिया।
प्राकृतिक खेती के लाभ
एडीओ कृषि अजय सिंह ने प्राकृतिक खेती को भविष्य का सुरक्षित विकल्प बताया। उन्होंने जैविक खाद और गोमूत्र आधारित कीटनाशक अपनाने का आह्वान किया। पारंपरिक खेती पद्धतियों को भी अपनाने पर जोर दिया गया। राजकीय कृषि बीज भंडार प्रभारी कन्हैया लाल ने रासायनिक उर्वरकों से भूमि की गुणवत्ता प्रभावित होने की बात कही। उन्होंने प्राकृतिक खेती को लागत कम करने का एक प्रभावी जरिया बताया।
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कार्यक्रम में उपस्थिति
इस कार्यक्रम में कई प्रमुख व्यक्तियों और किसानों ने भाग लिया। प्रधान नन्हकू राम भी उपस्थित रहे। प्रज्ञानन्दन, दिवाकर पाण्डेय और विवेकानंद जैसे लोग भी मौजूद थे। राम जीत और मनमोहन सहित अनेक किसान इस जागरूकता कार्यक्रम में शामिल हुए। सभी ने प्राकृतिक खेती के महत्व को समझा।
मृदा परीक्षण प्रयोगशाला अध्यक्ष के.के. मौर्य ने रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम हो रही है और लागत बढ़ रही है। रासायनिक खेती स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है। मौर्य ने किसानों से गोबर की खाद व जैविक उर्वरक अपनाने की अपील की। मृदा परीक्षण सहायक दुर्गेश गुप्ता ने अभियान का उद्देश्य बताया। इसका लक्ष्य खेती की लागत कम करना और किसानों की आय बढ़ाना है। साथ ही भूमि की गुणवत्ता सुधारना भी इस अभियान का प्रमुख उद्देश्य है। केवीके वैज्ञानिक जेडी वर्मा ने गांव स्तर पर किसानों को जागरूक करने की बात कही। इससे किसानों को कम लागत में अधिक लाभ मिल सकेगा। उद्यान वैज्ञानिक चंद्रभान शुक्ला ने हरी खाद व प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग पर जोर दिया।
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प्राकृतिक खेती के लाभ
एडीओ कृषि अजय सिंह ने प्राकृतिक खेती को भविष्य का सुरक्षित विकल्प बताया। उन्होंने जैविक खाद और गोमूत्र आधारित कीटनाशक अपनाने का आह्वान किया। पारंपरिक खेती पद्धतियों को भी अपनाने पर जोर दिया गया। राजकीय कृषि बीज भंडार प्रभारी कन्हैया लाल ने रासायनिक उर्वरकों से भूमि की गुणवत्ता प्रभावित होने की बात कही। उन्होंने प्राकृतिक खेती को लागत कम करने का एक प्रभावी जरिया बताया।
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कार्यक्रम में उपस्थिति
इस कार्यक्रम में कई प्रमुख व्यक्तियों और किसानों ने भाग लिया। प्रधान नन्हकू राम भी उपस्थित रहे। प्रज्ञानन्दन, दिवाकर पाण्डेय और विवेकानंद जैसे लोग भी मौजूद थे। राम जीत और मनमोहन सहित अनेक किसान इस जागरूकता कार्यक्रम में शामिल हुए। सभी ने प्राकृतिक खेती के महत्व को समझा।