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Ayodhya: राम मंदिर चढ़ावा चोरी के लिए रामलला से माफी मांग रहे आचार्य, की जा रही प्रायश्चित पूजा

Fri, 17 Jul 2026 07:47 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या
अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या Published by: Ishwar Ashish Bhartiya Updated Fri, 17 Jul 2026 07:47 PM IST
सार

श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों का कहना है कि इस अनुष्ठान का उद्देश्य भगवान के समक्ष क्षमा-याचना के साथ मंदिर की आध्यात्मिक गरिमा और पवित्रता को अक्षुण्ण बनाए रखना है।

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Ayodhya: Acharya seeks forgiveness from Ram Lalla for the theft of Ram Mandir offerings
प्रायश्चित पूजा कर रहे आचार्य। - फोटो : amar ujala

विस्तार

श्रीराम जन्मभूमि परिसर में चढ़ावा चोरी की घटना के बाद मंदिर की धार्मिक परंपराओं के अनुरूप नौ दिवसीय प्रायश्चित पूजन शुरू कराया गया है। यह अनुष्ठान गुप्त नवरात्र के अवसर पर शुरू हुआ है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से गुप्त नवरात्र के शुभारंभ पर 15 जुलाई को शुरू कराए गए अनुष्ठान का समापन 23 जुलाई को होगा। अनुष्ठान में भगवान श्रीराम का विशेष पूजन किया जा रहा है और उनसे वैदिक क्रियाओं के माध्यम से क्षमा मांगी जा रही है और परिसर का शुद्धिकरण कराया जाएगा।

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इस विशेष अनुष्ठान में मंदिर परिसर के भीतर और आसपास कुल 70 वैदिक आचार्य शामिल होकर वैदिक विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर रहे हैं। प्रायश्चित पूजन राम मंदिर के गर्भगृह, यज्ञ मंडप और परकोटा के शिव मंदिर में एक साथ संपन्न कराया जा रहा है। अनुष्ठान के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार, हवन, रुद्राभिषेक और भगवान श्रीराम का विशेष पूजन किया जा रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार मंदिर में किसी भी प्रकार की अशुभ या अपवित्र मानी जाने वाली घटना के बाद शुद्धिकरण और प्रायश्चित के लिए ऐसे अनुष्ठान कराए जाते हैं।
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ट्रस्ट के पदाधिकारियों का कहना है कि इस अनुष्ठान का उद्देश्य भगवान के समक्ष क्षमा-याचना के साथ मंदिर की आध्यात्मिक गरिमा और पवित्रता को अक्षुण्ण बनाए रखना है। अनुष्ठान में शामिल आचार्य विट्ठल ने बताया कि प्रायश्चित का सबसे बड़ा अर्थ अपनी भूल को स्वीकार कर उसे दोबारा न होने देना है। उन्होंने बताया कि अनुष्ठान सुबह नौ से 12:30 बजे और दोपहर 3:30 बजे से सात बजे तक हो रहा है। प्रायश्चित पूजन में दिल्ली, जम्मू कश्मीर, महाराष्ट्र समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों से 10 आचार्य शामिल हैं। शेष आचार्य अन्य अनुष्ठानों में लगे हैं।

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