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अयोध्या झूलनोत्सव: 200 साल पुरानी परंपरा का अद्भुत नजारा,  रामनगरी के रंगमहल में झूले पर विराजे श्रीसीताराम

Thu, 06 Aug 2026 06:36 PM IST
Bhupendra Singh अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या
अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या Published by: Bhupendra Singh Updated Thu, 06 Aug 2026 06:36 PM IST
सार

अयोध्या में 200 साल पुरानी परंपरा का अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है। श्रीसीताराम रंगमहल में झूले पर विराजे हैं। पूरे उल्लास के साथ झूलनोत्सव मनाया जा रहा है। सावन की पूर्व संध्या से शुरू हुए उत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ रहे हैं। यहां एकादशी की 'गलबहियां झांकी' मुख्य आकर्षण होंगी। आगे पढ़ें पूरी खबर...

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Ayodhya Jhulanotsav magnificent spectacle of 200-year-old tradition Shri SitaRam seated on swing at Rang Mahal
रंगमहल में सजी झूलनोत्सव की झांकी व मौजूद महंत रामशरण दास। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी।

विस्तार

रामनगरी अयोध्या के प्राचीन रंगमहल मंदिर में करीब 200 वर्ष पुरानी झूलनोत्सव की परंपरा इन दिनों पूरे श्रद्धा, उल्लास और आध्यात्मिक वातावरण के बीच निभाई जा रही है। सावन माह की पूर्व संध्या से शुरू हुआ यह उत्सव पूरे सावन भर चलेगा। प्रतिदिन भगवान श्रीसीताराम को झूले पर विराजमान कर विशेष पूजा-अर्चना की जा रही है और भजन-कीर्तन से मंदिर परिसर भक्तिमय बना हुआ है।

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रंगमहल की परंपरा अयोध्या के अन्य मंदिरों से अलग मानी जाती है। जहां अधिकांश मंदिरों में झूलनोत्सव सावन शुक्ल तृतीया से शुरू होता है, वहीं रंगमहल में यह आयोजन हर वर्ष सावन शुरू होने से पहले ही आरंभ हो जाता है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान के झूला विहार के दर्शन करने पहुंच रहे हैं। 

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संत स्वामी सरयूशरण ने इस परंपरा की शुरुआत की थी

मंदिर के वर्तमान महंत रामशरणदास ने बताया कि लगभग दो शताब्दी पहले संत स्वामी सरयूशरण ने इस परंपरा की शुरुआत की थी। उनके लिए भगवान केवल पूजनीय विग्रह नहीं, बल्कि सजीव और चैतन्य स्वरूप थे। उसी आध्यात्मिक भाव को आज भी रंगमहल में पूरी श्रद्धा के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है।

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उन्होंने बताया कि झूलनोत्सव के दौरान प्रतिदिन विशेष शृंगार, भोग, संकीर्तन और झूला सेवा हो रही है। वहीं सावन कृष्ण एकादशी (9 अगस्त) को सजने वाली 'गलबहियां झांकी' इस महोत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण होगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस झांकी में भगवान श्रीराम और माता सीता एक-दूसरे के कंधे में बांह डालकर सावन के आनंद का संदेश देते हैं। 

उत्सव में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही

पूरे सावन माह चलने वाले इस उत्सव में प्रतिदिन श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है और झूलनोत्सव के विभिन्न धार्मिक आयोजनों का क्रम निरंतर जारी है। इसी तरह गोलाघाट स्थित सद्गुरु सदन में भी एक माह तक झूलनोत्सव की परंपरा का निर्वहन भक्ति भाव से किया जा रहा है।

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