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Ayodhya News: आत्मनिर्भर बनने की हुनर दे रही बृजरानी
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Sun, 22 Feb 2026 11:13 PM IST
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बाबा बाजार। छू ले हर ऊंचाई तू, तुझको किसने रोका है। बात कल कुछ और थी फिर से आज मौका है। यह एक जुझारू महिला की मेहनत पर सिद्ध होती है। कहना है कि अति पिछड़े गोमती नदी के तट पर बसे कंदई मीरमऊ घाट की महिला शिक्षा मित्र बृजरानी यादव जो 2002 में शिक्षा मित्र पद पर नियुक्ति हुई थीं।
प्रदेश में सपा सरकार में 2014 में समायोजन शिक्षक पद पर हुआ था। हाईकोर्ट के फैसले से भाजपा शासनकाल 2017 में समायोजन रद्द होने के बाद मन में शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करने की ठान लीं।
शिक्षक बनने में टीईटी की अनिवार्यता थी, इसमें सफलता हासिल की और फिर अपने गांव के बच्चों को निःशुल्क शिक्षा देने के साथ-साथ सिलाई-कढ़ाई का हुनर सिखाना शुरू कर दीं। आजीविका को चलाने के लिए स्वरोजगार देना लक्ष्य बना लिया। खुद ही गाय के गोबरों से रंग बिरंगे दीपक बनाने लगीं।
अब दूर-दूर से लोग इसकी खरीदारी करने आते हैं। बृजरानी ने इसके साथ-साथ पूजा पाठ के उपयोग में आने वाले गाय गोबर से उपले भी बनाकर बाराबंकी, अमेठी, सुल्तानपुर, अयोध्या जनपदों में आपूर्ति करने का काम कर अपनी एक अलग पहचान बनाई है।
यही नहीं पर्यावरण संबंधी बीच-बीच में विभिन्न गतिविधियों का हिस्सा भी बनी रहती हैं। जैसे क्यू सी शिक्षा केंद्र के माध्यम से कंदई में बच्चों से पॉलिथीन एकत्र कराके गांव को पर्यावरण मुक्त बनाने का प्रयास किया जाना। यह पंक्तियां बृजरानी यादव पर सटीक बैठती हैं कि जब हौसले बुलंद हो तो उम्र, मुश्किलें और हालात भी हार मान लेते हैं। यही नारी शक्ति का उदाहरण है। उम्र के पड़ाव में भी हौसला बुलंद है।
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प्रदेश में सपा सरकार में 2014 में समायोजन शिक्षक पद पर हुआ था। हाईकोर्ट के फैसले से भाजपा शासनकाल 2017 में समायोजन रद्द होने के बाद मन में शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करने की ठान लीं।
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शिक्षक बनने में टीईटी की अनिवार्यता थी, इसमें सफलता हासिल की और फिर अपने गांव के बच्चों को निःशुल्क शिक्षा देने के साथ-साथ सिलाई-कढ़ाई का हुनर सिखाना शुरू कर दीं। आजीविका को चलाने के लिए स्वरोजगार देना लक्ष्य बना लिया। खुद ही गाय के गोबरों से रंग बिरंगे दीपक बनाने लगीं।
अब दूर-दूर से लोग इसकी खरीदारी करने आते हैं। बृजरानी ने इसके साथ-साथ पूजा पाठ के उपयोग में आने वाले गाय गोबर से उपले भी बनाकर बाराबंकी, अमेठी, सुल्तानपुर, अयोध्या जनपदों में आपूर्ति करने का काम कर अपनी एक अलग पहचान बनाई है।
यही नहीं पर्यावरण संबंधी बीच-बीच में विभिन्न गतिविधियों का हिस्सा भी बनी रहती हैं। जैसे क्यू सी शिक्षा केंद्र के माध्यम से कंदई में बच्चों से पॉलिथीन एकत्र कराके गांव को पर्यावरण मुक्त बनाने का प्रयास किया जाना। यह पंक्तियां बृजरानी यादव पर सटीक बैठती हैं कि जब हौसले बुलंद हो तो उम्र, मुश्किलें और हालात भी हार मान लेते हैं। यही नारी शक्ति का उदाहरण है। उम्र के पड़ाव में भी हौसला बुलंद है।
