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Ayodhya News: जैन मंदिर में झंडारोहण के साथ आरंभ हुआ पंचकल्याण महोत्सव
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Wed, 17 Jun 2026 10:11 PM IST
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जैन मंदिर में ध्वजारोहण के दौरान मौजूद रवींद्रकीर्ति स्वामी व जैन श्रद्धालु।
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संवाद न्यूज एजेंसी अयोध्या। प्राचीन जैन मंदिर रायगंज में बुधवार को भगवान मुनिसुव्रतनाथ के पंचकल्याण प्रतिष्ठा महोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। मंदिर परिसर मंत्रोच्चार, घंटियों और श्रद्धालुओं के जयघोष से गूंज उठा। इससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक उल्लास और भक्तिभाव से सराबोर हो गया।
सुबह भगवान श्रीजी के पंचामृत अभिषेक से अनुष्ठान शुरू हुए। दूध, दही, घृत, शहद और शक्कर से अभिषेक किया गया। श्रद्धालुओं की आंखों में भक्ति और हृदय में उल्लास स्पष्ट दिख रहा था। इसके बाद रामनगरी की गलियों में भव्य शोभायात्रा निकाली गई। रंग-बिरंगी वेशभूषा में सजे श्रद्धालु और भक्ति संगीत आकर्षण का केंद्र रहे। महोत्सव में झंडारोहण के साथ धर्मध्वजा आकाश में लहराई। मंडप उद्घाटन, वेदी शुद्धि, कलश स्थापना और यागमंडल विधान भी संपन्न हुए। इंद्र की सुधर्मा सभा और कुबेर की रत्नवृष्टि की प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को दिव्य संसार से जोड़ा। समारोह का आयोजन दिगंबर जैन परंपरा के पीठाधीश रवींद्रकीर्ति स्वामी के निर्देशन में हो रहा है। संचालन डॉ. जीवन प्रकाश जैन ने किया।
प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति
इस अवसर पर आर्यिका चंदनामती, सुव्रतमती, सुदृढ़मती और स्वर्णमती उपस्थित रहीं। क्षुल्लक प्रशांत सागर और प्रतिष्ठाचार्य विजय जैन भी मौजूद थे। डॉ. जीवन प्रकाश जैन ने कार्यक्रम का संचालन किया। झंडारोहण में दिल्ली से प्रमोद जैन और अनिमा जैन ने सहभागिता की। अनिल कुमार जैन और अनीता जैन ने इंद्र-इंद्राणी की भूमिका निभाई। देश के विभिन्न राज्यों से करीब दो हजार जैन श्रद्धालु पहुंचे।
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माता के सोलह स्वप्नों की झांकी
कार्यक्रम का सबसे भावपूर्ण दृश्य माता के सोलह स्वप्नों की झांकी थी। देवियों ने माता की सेवा और स्वप्नों का फल प्रस्तुत किया। गर्भकल्याणक की घोषणा होते ही पूरा पांडाल जयघोषों से गूंज उठा। भगवान ऋषभदेव की पूजा-अर्चना भी की गई। गणिनी प्रमुख ज्ञानमती ने भगवान के जन्म की घोषणा का मंचन किया।
सुबह भगवान श्रीजी के पंचामृत अभिषेक से अनुष्ठान शुरू हुए। दूध, दही, घृत, शहद और शक्कर से अभिषेक किया गया। श्रद्धालुओं की आंखों में भक्ति और हृदय में उल्लास स्पष्ट दिख रहा था। इसके बाद रामनगरी की गलियों में भव्य शोभायात्रा निकाली गई। रंग-बिरंगी वेशभूषा में सजे श्रद्धालु और भक्ति संगीत आकर्षण का केंद्र रहे। महोत्सव में झंडारोहण के साथ धर्मध्वजा आकाश में लहराई। मंडप उद्घाटन, वेदी शुद्धि, कलश स्थापना और यागमंडल विधान भी संपन्न हुए। इंद्र की सुधर्मा सभा और कुबेर की रत्नवृष्टि की प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को दिव्य संसार से जोड़ा। समारोह का आयोजन दिगंबर जैन परंपरा के पीठाधीश रवींद्रकीर्ति स्वामी के निर्देशन में हो रहा है। संचालन डॉ. जीवन प्रकाश जैन ने किया।
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प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति
इस अवसर पर आर्यिका चंदनामती, सुव्रतमती, सुदृढ़मती और स्वर्णमती उपस्थित रहीं। क्षुल्लक प्रशांत सागर और प्रतिष्ठाचार्य विजय जैन भी मौजूद थे। डॉ. जीवन प्रकाश जैन ने कार्यक्रम का संचालन किया। झंडारोहण में दिल्ली से प्रमोद जैन और अनिमा जैन ने सहभागिता की। अनिल कुमार जैन और अनीता जैन ने इंद्र-इंद्राणी की भूमिका निभाई। देश के विभिन्न राज्यों से करीब दो हजार जैन श्रद्धालु पहुंचे।
माता के सोलह स्वप्नों की झांकी
कार्यक्रम का सबसे भावपूर्ण दृश्य माता के सोलह स्वप्नों की झांकी थी। देवियों ने माता की सेवा और स्वप्नों का फल प्रस्तुत किया। गर्भकल्याणक की घोषणा होते ही पूरा पांडाल जयघोषों से गूंज उठा। भगवान ऋषभदेव की पूजा-अर्चना भी की गई। गणिनी प्रमुख ज्ञानमती ने भगवान के जन्म की घोषणा का मंचन किया।