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यूपी: आखिर किसे बचाने के लिए हटाई गई CCTV फुटेज? संदिग्ध टिन्नू के उगले राजों से फंस सकते हैं बड़े चेहरे

सूरज शुक्ला, अमर उजाला नेटवर्क लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Thu, 18 Jun 2026 08:00 AM IST
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सार

Ram Mandir donation controversy: राम मंदिर चंदा चोरी के मामले में जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है वैसे-वैसे यह बात साबित हो रही है कि अभी इस खेल में कई नाम निकल कर आ सकते हैं। 

Ram Temple: Who was the CCTV footage removed to protect? Secrets revealed by suspect Tinnu could implicate pro
राम मंदिर में चंदा चोरी। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार

राम मंदिर चंदा चोरी के मामले में हर दिन नई कड़ियां जुड़ रही हैं। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है यह साफ होता जा रहा है कि बड़े लोगों को बचाने के लिए छोटों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है। एसआईटी को जांच में ऐसे साक्ष्य मिले हैं जिससे आशंका है कि सीसीटीवी फुटेज से छेड़छाड़ की गई थी ताकि रकम पार कर सुबूत मिटाए जा सकें। हालांकि, अब तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। वहीं, निगरानी करने वाले असल जिम्मेदार एसआईटी के सवालों के जवाब नहीं दे पा रहे हैं। जांच टीम ने रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव से भी लंबी पूछताछ की है।



एसआईटी की टीम सोमवार से अयोध्या में डेरा डाले है। पहले दिन करीब साढ़े सात घंटे और मंगलवार को 11 घंटे मंदिर परिसर में रहकर टीम ने जांच की थी। बुधवार को भी जांच का सिलसिला जारी रहा। सुबह करीब दस बजे एसआईटी की टीम मंदिर परिसर पहुंची। जहां ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय समेत अन्य कई पदाधिकारी, कर्मचारी, पुजारी और बैंक कर्मी मौजूद रहे। सूत्रों के मुताबिक टीम ने सीसीटीवी कैमरों की स्थिति को गहनता से परखा। इसमें कुछ ऐसे तथ्य मिले हैं जिससे आशंका है कि चोरी करने वालों ने फुटेज से छेड़छाड़ की है।
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सवालों के उत्तर नहीं?

एसआईटी चंपत राय, गोपाल राव समेत राममंदिर ट्रस्ट के कई अन्य पदाधिकारियों व उनसे जुड़े लोगों से गहनता से पूछताछ कर रही है। सूत्रों के मुताबिक ये लोग कई सवालों के जवाब नहीं दे पा रहे हैं। कई सवालों के गोलमोल जवाब दे रहे हैं। वहीं, दान के दिए गए रिकॉर्ड से भी एसआईटी संतुष्ट नहीं है क्योंकि उसमें भी कई चीजें अस्पष्ट हैं। इसलिए एसआईटी को जांच में अधिक समय लग रहा है। विशेष जांच दल ने पूछताछ के लिए करीब दो सौ लोगों की सूची तैयार की है। इनमें से सवा सौ लोगों से पूछताछ कर चुकी है। इनमें से कुछ से कई बार पूछताछ की है।

सवाल : कब दर्ज होगी एफआईआर

पकड़े गए पांच संदिग्धों से भी एसआईटी ने पूछताछ की है। उनके पास से रकम भी बरामद हुई थी। सूत्रों के मुताबिक इन संदिग्धों ने कई नामों का खुलासा किया है जिनको इस खेल में शामिल बताया है। जांच टीम अब इनके बयानों की तस्दीक कर रही है। अब सवाल है कि क्या एसआईटी की जांच के बीच एफआईआर दर्ज कराई जाएगी या जांच पूरी होने के बाद। इस मामले में एफआईआर दर्ज कराई भी जाएगी या नहीं...ये सवाल अभी बना हुआ है।

बैंक की भी लापरवाही आ रही सामने
दान राशि की गिनती प्रक्रिया में बैंक की अहम भूमिका रहती थी। बैंक कर्मियों की मौजूदगी में ही गिनती होती थी। सूत्रों के मुताबिक एसआईटी की शुरुआती जांच में बैंक की बड़ी लापरवाही सामने आई है। प्रक्रिया में उनकी भूमिका भी संदिग्ध है। हालांकि, जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक बैंक कर्मी ट्रस्ट के पदाधिकारियों के दबाव में रहते थे इसलिए वह हस्तक्षेप नहीं कर पाते थे।

टिन्नू ने अनिल मिश्रा का लिया नाम
आखिरकार एसआईटी ने तीसरे दिन टिन्नू यादव से लंबी पूछताछ की। सूत्रों के मुताबिक एसआईटी ने उसके कार्य के बारे में पूछा, खासकर दान की राशि गणना में उसकी क्या भूमिका रहती थी। टिन्नू सीधे तौर पर अपनी किसी भी तरह की भूमिका से इन्कार करता रहा। वह बोला, उसने कोई गबन चोरी नहीं किया है। वह सिर्फ मंदिर की अन्य व्यवस्थाओं को देखता था। इस दौरान उसने ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा का नाम लेते हुए उनकी जिम्मेदारी बताई। साथ ही तीन गणना इंचार्जों का जिक्र करते हुए कहा कि इन्हीं लोगों की जिम्मेदारी दान की राशि की गणना की रहती थी। सूत्रों का कहना है कि टिन्नू से अभी आगे भी पूछताछ हो सकती है।
 
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