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Ayodhya News: राम मंदिर परिसर के उप मंदिरों में ध्वजारोहण की तैयारी तेज
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Sun, 22 Mar 2026 10:14 PM IST
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राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में शामिल पदाधिकारी व सदस्य।
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अयोध्या। राम जन्मभूमि परिसर में स्थित उप मंदिरों के शिखरों पर ध्वजारोहण की तैयारियां तेज हो गई हैं। इस संबंध में शनिवार को मणिराम दास छावनी में आयोजित राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में विस्तृत रूपरेखा तय की गई। साथ ही रामनवमी बाद उप मंदिरों में दर्शन शुरू करने पर भी चर्चा हुई। हनुमान मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण हनुमान जयंती (2 अप्रैल, चैत्र पूर्णिमा) के दिन प्रस्तावित है, जबकि अन्य पांच मंदिरों पर 31 मार्च के बीच अलग-अलग तिथियों में यह आयोजन संभावित है।
बैठक में 19 मार्च को वर्ष प्रतिपदा के अवसर पर संपन्न हुए श्रीराम यंत्र स्थापना कार्यक्रम की विस्तार से समीक्षा की गई। बैठक के बाद ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि मुख्य शिखर और माता अन्नपूर्णा मंदिर पर ध्वजारोहण के बाद अब शेष छह उप मंदिरों पर भी ध्वजारोहण की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। तय कार्यक्रम के अनुसार प्रत्येक उप मंदिर के ध्वजारोहण में करीब 50 संत, विशिष्ट जन, साथ ही मंदिर निर्माण से जुड़े अभियंता और श्रमिक शामिल होंगे। ट्रस्ट ने सभी ऐतिहासिक आयोजनों-भूमि पूजन, प्राण प्रतिष्ठा, ध्वजारोहण और राम यंत्र स्थापना को एक स्मरण पुस्तिका के रूप में प्रकाशित करने का निर्णय लिया है, जिसमें इन आयोजनों से जुड़ी तस्वीरें और विस्तृत विवरण शामिल होंगे।
महासचिव चंपत राय के मुताबिक, आगामी दिनों में मंदिर निर्माण से जुड़े श्रमिकों और कार्यदायी संस्थाओं को सम्मानित भी किया जाएगा। बैठक की अध्यक्षता राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास ने की। बैठक में महासचिव चंपत राय, महंत दिनेंद्र दास, कोषाध्यक्ष गोविंददेव गिरि, डॉ़ अनिल मिश्र, डॉ़ कृष्ण मोहन, विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव, महंत कमल नयन दास, जिला प्रशासन के प्रतिनिधि के रूप में डीएम निखिल टीकाराम फुंडे शामिल रहे। जबकि जगद्गुरु विश्व प्रसन्न तीर्थ, केशव पारासरण, जगद्गुरु वासुदेवानंद सरस्वती, परमानंद गिरि, विशेष आमंत्रित सदस्य दिनेश चंद्र, भारत सरकार व प्रदेश सरकार के प्रतिनिधि ऑनलाइन जुड़े रहे।
रामनवमी मेले को लेकर श्रद्धालुओं से विशेष अपील
- ट्रस्ट ने राम नवमी मेले के मद्देनजर श्रद्धालुओं से स्वास्थ्य को लेकर विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। चंपत राय ने गर्मी और धूप से बचाव के लिए सफेद गमछा साथ रखने और नियमित रूप से सत्तू का सेवन करने की सलाह दी गई है। साथ ही यह भी सुझाव दिया गया है कि श्रद्धालु आलू से बने तले-भुने खाद्य पदार्थों, खासकर समोसे से दूरी बनाए रखें, ताकि भीड़ और गर्मी के बीच स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों से बचा जा सके।
दो साल में सात करोड़ ने किए रामलला के दर्शन
- बैठक में श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा पर मंथन किया गया। चंपत राय ने कहा कि मंदिर को सर्वाधिक सुरक्षा के प्रति सतर्क रहना पड़ता है। वहीं, सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था को लेकर भी बैठक में गहन मंथन किया गया। पिछले दो वर्षों में करीब सात करोड़ श्रद्धालु रामलला के दर्शन कर चुके हैं, ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने पर जोर दिया गया है। परकोटे और कुबेर टीला स्थित मंदिरों में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को अभी कुछ और इंतजार करना होगा। मंदिर के चारों द्वारों में से तीन का निर्माण पूरा हो चुका है और जल्द ही उनका लोकार्पण किया जाएगा। ट्रस्ट की अगली बैठक 11 जुलाई 2026 को आयोजित की जाएगी।
27 मार्च को होगा सूर्य तिलक
- चंपत राय ने बताया कि 27 मार्च को रामनवमी के अवसर पर दोपहर 12 बजे एक अद्भुत दृश्य देखने को मिलेगा, जब सूर्य की किरणें सीधे रामलला के मस्तक पर तिलक करेंगी। सूर्य तिलक चार मिनट का होगा। यह ‘सूर्य तिलक’ अत्याधुनिक वैज्ञानिक तकनीक के माध्यम से संभव हुआ है और विशेषज्ञों की मदद से तैयार किए गए यंत्र सफल परीक्षण के बाद स्थापित कर दिए गए हैं। अब अगले 19 वर्षों तक हर रामनवमी पर यह दिव्य क्षण दोहराया जाएगा।
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बैठक में 19 मार्च को वर्ष प्रतिपदा के अवसर पर संपन्न हुए श्रीराम यंत्र स्थापना कार्यक्रम की विस्तार से समीक्षा की गई। बैठक के बाद ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि मुख्य शिखर और माता अन्नपूर्णा मंदिर पर ध्वजारोहण के बाद अब शेष छह उप मंदिरों पर भी ध्वजारोहण की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। तय कार्यक्रम के अनुसार प्रत्येक उप मंदिर के ध्वजारोहण में करीब 50 संत, विशिष्ट जन, साथ ही मंदिर निर्माण से जुड़े अभियंता और श्रमिक शामिल होंगे। ट्रस्ट ने सभी ऐतिहासिक आयोजनों-भूमि पूजन, प्राण प्रतिष्ठा, ध्वजारोहण और राम यंत्र स्थापना को एक स्मरण पुस्तिका के रूप में प्रकाशित करने का निर्णय लिया है, जिसमें इन आयोजनों से जुड़ी तस्वीरें और विस्तृत विवरण शामिल होंगे।
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महासचिव चंपत राय के मुताबिक, आगामी दिनों में मंदिर निर्माण से जुड़े श्रमिकों और कार्यदायी संस्थाओं को सम्मानित भी किया जाएगा। बैठक की अध्यक्षता राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास ने की। बैठक में महासचिव चंपत राय, महंत दिनेंद्र दास, कोषाध्यक्ष गोविंददेव गिरि, डॉ़ अनिल मिश्र, डॉ़ कृष्ण मोहन, विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव, महंत कमल नयन दास, जिला प्रशासन के प्रतिनिधि के रूप में डीएम निखिल टीकाराम फुंडे शामिल रहे। जबकि जगद्गुरु विश्व प्रसन्न तीर्थ, केशव पारासरण, जगद्गुरु वासुदेवानंद सरस्वती, परमानंद गिरि, विशेष आमंत्रित सदस्य दिनेश चंद्र, भारत सरकार व प्रदेश सरकार के प्रतिनिधि ऑनलाइन जुड़े रहे।
रामनवमी मेले को लेकर श्रद्धालुओं से विशेष अपील
- ट्रस्ट ने राम नवमी मेले के मद्देनजर श्रद्धालुओं से स्वास्थ्य को लेकर विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। चंपत राय ने गर्मी और धूप से बचाव के लिए सफेद गमछा साथ रखने और नियमित रूप से सत्तू का सेवन करने की सलाह दी गई है। साथ ही यह भी सुझाव दिया गया है कि श्रद्धालु आलू से बने तले-भुने खाद्य पदार्थों, खासकर समोसे से दूरी बनाए रखें, ताकि भीड़ और गर्मी के बीच स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों से बचा जा सके।
दो साल में सात करोड़ ने किए रामलला के दर्शन
- बैठक में श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा पर मंथन किया गया। चंपत राय ने कहा कि मंदिर को सर्वाधिक सुरक्षा के प्रति सतर्क रहना पड़ता है। वहीं, सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था को लेकर भी बैठक में गहन मंथन किया गया। पिछले दो वर्षों में करीब सात करोड़ श्रद्धालु रामलला के दर्शन कर चुके हैं, ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने पर जोर दिया गया है। परकोटे और कुबेर टीला स्थित मंदिरों में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को अभी कुछ और इंतजार करना होगा। मंदिर के चारों द्वारों में से तीन का निर्माण पूरा हो चुका है और जल्द ही उनका लोकार्पण किया जाएगा। ट्रस्ट की अगली बैठक 11 जुलाई 2026 को आयोजित की जाएगी।
27 मार्च को होगा सूर्य तिलक
- चंपत राय ने बताया कि 27 मार्च को रामनवमी के अवसर पर दोपहर 12 बजे एक अद्भुत दृश्य देखने को मिलेगा, जब सूर्य की किरणें सीधे रामलला के मस्तक पर तिलक करेंगी। सूर्य तिलक चार मिनट का होगा। यह ‘सूर्य तिलक’ अत्याधुनिक वैज्ञानिक तकनीक के माध्यम से संभव हुआ है और विशेषज्ञों की मदद से तैयार किए गए यंत्र सफल परीक्षण के बाद स्थापित कर दिए गए हैं। अब अगले 19 वर्षों तक हर रामनवमी पर यह दिव्य क्षण दोहराया जाएगा।