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राम मंदिर दान राशि गबन मामला: ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों पर भी संदेह, संलिप्तता मिलने पर कम हो सकते हैं अधिकार

अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 15 Jun 2026 06:35 AM IST
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सार

सूत्रों के अनुसार, मामले में केवल कर्मचारियों या बाहरी लोगों की भूमिका ही नहीं, बल्कि ट्रस्ट से जुड़े कुछ प्रभावशाली पदाधिकारियों और ट्रस्टियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।

Ram Mandir donation embezzlement case: Some Trust officials also under suspicion
ट्रस्ट के भीतर भी बनी है असहज स्थिति - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

राम मंदिर दान राशि गबन प्रकरण की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इसके दायरे के विस्तार की चर्चा भी तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, मामले में केवल कर्मचारियों या बाहरी लोगों की भूमिका ही नहीं, बल्कि ट्रस्ट से जुड़े कुछ प्रभावशाली पदाधिकारियों और ट्रस्टियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।



बताया जा रहा है कि जिन पांच संदिग्धों के नाम अब तक सामने आए हैं, उनमें से कुछ का संबंध ट्रस्ट के प्रभावशाली लोगों से होने की बात भी सामने आ रही है। इसी वजह से गठित एसआईटी केवल धन के लेन-देन और तकनीकी पहलुओं की ही जांच नहीं करेगी, बल्कि यह भी पता लगाएगी कि किसी स्तर पर संरक्षण, लापरवाही या मिलीभगत तो नहीं हुई।
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प्रारंभिक स्तर पर मामले की पड़ताल ट्रस्ट की ओर से आंतरिक रूप से कराई जा रही थी, लेकिन प्रकरण की गंभीरता और राष्ट्रीय स्तर पर इसकी संवेदनशीलता को देखते हुए शासन स्तर पर स्वतंत्र जांच की आवश्यकता महसूस की गई। इसके बाद तीन वरिष्ठ अधिकारियों वाली एसआईटी का गठन किया गया, जिसे सात दिन में प्रारंभिक और 15 दिन में अंतिम रिपोर्ट देने का दायित्व सौंपा गया है।
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सूत्रों के मुताबिक एसआईटी यह भी जांच करेगी कि दान राशि के कथित गबन की प्रक्रिया कितने समय से चल रही थी, इसमें किन-किन लोगों की भूमिका थी और क्या किसी जिम्मेदार पदाधिकारी की जानकारी या लापरवाही के कारण यह संभव हो पाया। यदि जांच में किसी ट्रस्टी या पदाधिकारी की संलिप्तता अथवा गंभीर प्रशासनिक चूक के प्रमाण मिलते हैं, तो उनके अधिकार सीमित किए जाने या अन्य कार्रवाई की भी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि जांच पूरी होने के बाद ही जिम्मेदारी और भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।

ट्रस्ट के भीतर भी बनी है असहज स्थिति
सूत्रों का दावा है कि मामले के उजागर होने के बाद ट्रस्ट के भीतर भी असहज स्थिति बनी हुई है। चर्चा है कि ट्रस्ट के शीर्ष स्तर पर कुछ लोगों के बीच संवाद लगभग बंद हो गया है। पिछले कुछ दिनों से एक प्रमुख ट्रस्टी की ओर से ट्रस्ट के महासचिव चपंत राय से लगातार संपर्क साधने के प्रयासों के बावजूद अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिलने की चर्चा तेज है।

संतों की जांच करना सनातन का अपमान    
मामले की योगी सरकार के एसआईटी जांच के आदेश पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सवाल उठाए। उन्होंनेे कहा, श्रीराम मंदिर के चढ़ावे में चोरी के बाद अब अफसर साधु-संतों की जांच करेंगे। यह सनातन का अपमान है। वहां कैमरे और लाइट बंद कर दो। जो लेकर गया है, वह प्रभु श्रीराम के सामने अपने आप चढ़ावा वापस कर जाएगा। भगवान भी माफ कर देंगे।

नृपेंद्र मिश्र ने एसआईटी पर जताया भरोसा
 राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने जांच के लिए गठित एसआईटी पर भरोसा जताते हुए कहा कि राज्य सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए 24 घंटे से भी कम समय में जांच समिति गठित कर दी। सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने समिति गठन के निर्णय की प्रशंसा करते हुए कहा कि एसआईटी में अनुभवी और वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है, जिससे निष्पक्ष जांच की उम्मीद है। मिश्र ने कहा कि राम मंदिर की फसाड लाइटिंग का कार्य एक माह की देरी से चल रहा है, लेकिन इसे 15 अगस्त तक हैंडओवर करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।


चढ़ावे में घपले की जांच के लिए पीएमओ से अयोध्या आए अफसर
मामले के तूल पकड़ने के बाद केंद्र भी सक्रिय हो गया है। रविवार को पीएमओ की तरफ एक बड़े अफसर के मंदिर पहुंचने की चर्चा है। अफसर अपने स्तर से जांच पड़ताल के बाद जानकारी जुटाकर पीएमओ को देंगे। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है। 

  • चंपत राय बीमार, अनिल मिश्रा चिकित्सकीय जांच के लिए केरल गए : एसआईटी के अयोध्या पहुंचने की तैयारी के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय अस्वस्थ बताए जा रहे हैं। ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य अनिल मिश्रा चिकित्सकीय परामर्श के लिए केरल गए हैं। 
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