राम मंदिर चढ़ावा चोरी: आरोपी अविनाश शुक्ला के कमरे में मिला "रामराज्य कोष" का संदूक, क्यूआर कोड भी लगा
राम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोपी अविनाश शुक्ला के कमरे से एसआईटी को एक संदूक बरामद हुआ है। जिस पर रामराज्य कोष लिखा हुआ है। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
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जांच कर रही एसआईटी ने आरोपी अविनाश शुक्ला के कमरे से एक संदूक बरामद किया है जिस पर 'रामराज्य कोष' लिखा हुआ है और इस पर पेटीएम का QR कोड भी लगा हुआ है। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
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यहां पर मौजूद श्याम साधनालय की योगाचार्य सीमा तिवारी ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि अविनाश शुक्ला पिछले करीब डेढ़ वर्ष से अयोध्या में रह रहे थे और राम मंदिर से जुड़ी गतिविधियों में कार्यरत थे। उनके अनुसार, अविनाश का परिचय योग गुरु डॉ. चैतन्य और उनके भाई अभिषेक के माध्यम से हुआ था।
वहीं, 5 जून के प्रत्यक्षदर्शी सेवादार सुंदरलाल ने बताया कि उस दिन पुलिस कुछ लोगों के साथ अविनाश को किराये के मकान पर लेकर आई थी। उनके अनुसार, घर से एक बैग निकाला गया, जिसमें कुछ नकदी थी। इसके बाद उन्हें बाहर कर दिया गया और पुलिस अविनाश को अपने साथ ले गई।
हालांकि, इन बयानों की पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और अब तक बरामद नकदी या उसके स्रोत को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की गई है।
चढ़ावा चोरी के आरोपियों की जेल में हुई नोकझोंक
राम मंदिर की चढ़ावा चोरी के सभी आठ आरोपी जिला कारागार में बंद है। चर्चा है कि मंगलवार की उनमें आपस में किसी बात को लेकर नोकझोक व विवाद भी हुआ है। हालांकि जेल प्रशासन ने इसकी पुष्टि नहीं की है। वहीं, सुरक्षा के दृष्टिगत जेल प्रशासन विशेष सतर्कता बरत रहा है। आरोपियों को कड़ी सुरक्षा के बीच रखा गया है। बैरकों के बाहर भी सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं।
जेल प्रशासन का प्रयास है कि आरोपी एक दूसरे से मिल ना सके। वहीं, जांच के दौरान यह चौंकाने वाली बात सामने आई है कि जेल में निरुद्ध होने के बाद से लेकर अब तक परिजनों ने आरोपियों से सिर्फ एक बार मुलाकात की है जबकि जेल प्रशासन के नियमानुसार किसी भी विचाराधीन बंदी से सप्ताह में तीन बार मुलाकात का प्रावधान है। वहीं आरोपियों ने किसी से फोन पर भी बातचीत की इच्छा नहीं बताई है। जबकि नियमानुसार दो मोबाइल नंबरों पर कोई भी विचाराधीन बंदी बात कर सकता है। उसके पहले उसका पुलिस सत्यापन कराया जाता है।
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