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Ayodhya News: श्रीराम का वनगमन धर्म, मर्यादा और आदर्श स्थापना का माध्यम बना
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अयोध्या। राम नगरी राम जन्मोत्सव के उल्लास में डूबी हुई है। मठ-मंदिरों में विभिन्न धार्मिक व सांस्कृतिक आयोजन हो रहे हैं। सरयू तट स्थित सियाराम किला झुनकी घाट में विभिन्न अनुष्ठानों की धूम है। महंत करुणानिधान शरण के सानिध्य में सुबह नवाह पारायण व शाम को रामकथा की सरिता में श्रद्धालु डुबकी लगा रहे हैं। श्रीरामकथा की सुधाव़ृष्टि करते हुए कथा प्रवाचक प्रभंजनानंद शरण ने कहा कि माता कैकेयी ने भगवान श्रीराम को वनवास देकर उन्हें लोककल्याण और आदर्श स्थापना के लिए प्रेरित किया। यह वनगमन केवल कष्ट नहीं, बल्कि धर्म, मर्यादा और आदर्शों की स्थापना का माध्यम बना।
उन्होंने नवधा भक्ति का अत्यंत सरल, भावपूर्ण और विस्तारपूर्वक वर्णन किया। बताया कि नवधा भक्ति के नौ स्वरूप भगवान तक पहुंचने के नौ सरल मार्ग हैं। इन नौ भक्ति मार्गों को अपनाकर कोई भी साधारण व्यक्ति ईश्वर की कृपा का पात्र बन सकता है। श्रीराम कथा के माध्यम से समाज में सदाचार, प्रेम और भाईचारे का संदेश प्रसारित होता है।
वहीं जानकी महल इन दिनों विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। माता सीता के मायके स्वरूप प्रतिष्ठित यह धाम मिथिला परंपरा की सजीव झांकी प्रस्तुत करता है। बृहस्पतिवार को जन्मोत्सव से पूर्व संस्कृत धुनों की सुमधुर प्रस्तुति ने वातावरण को ऐसा आलोकित किया कि मानो स्वयं देवगण अवतरित हो उठे हों। नागपुर की युवा संगीत मंडली ‘द अनहद’ की प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को आकर्षित किया। जानकी महल के ट्रस्टी आदित्य सुल्तानिया ने बताया कि 27 मार्च को प्रभु श्रीराम का जन्मोत्सव अत्यंत धूमधाम और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर विशेष पूजन-अर्चन, प्रसाद वितरण और विविध धार्मिक आयोजनों की भव्य शृंखला आयोजित होगी। इसी तरह अन्य मठ-मंदिरों में भी उत्सव की धारा प्रवाहित हो रही है।
उन्होंने नवधा भक्ति का अत्यंत सरल, भावपूर्ण और विस्तारपूर्वक वर्णन किया। बताया कि नवधा भक्ति के नौ स्वरूप भगवान तक पहुंचने के नौ सरल मार्ग हैं। इन नौ भक्ति मार्गों को अपनाकर कोई भी साधारण व्यक्ति ईश्वर की कृपा का पात्र बन सकता है। श्रीराम कथा के माध्यम से समाज में सदाचार, प्रेम और भाईचारे का संदेश प्रसारित होता है।
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वहीं जानकी महल इन दिनों विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। माता सीता के मायके स्वरूप प्रतिष्ठित यह धाम मिथिला परंपरा की सजीव झांकी प्रस्तुत करता है। बृहस्पतिवार को जन्मोत्सव से पूर्व संस्कृत धुनों की सुमधुर प्रस्तुति ने वातावरण को ऐसा आलोकित किया कि मानो स्वयं देवगण अवतरित हो उठे हों। नागपुर की युवा संगीत मंडली ‘द अनहद’ की प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को आकर्षित किया। जानकी महल के ट्रस्टी आदित्य सुल्तानिया ने बताया कि 27 मार्च को प्रभु श्रीराम का जन्मोत्सव अत्यंत धूमधाम और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर विशेष पूजन-अर्चन, प्रसाद वितरण और विविध धार्मिक आयोजनों की भव्य शृंखला आयोजित होगी। इसी तरह अन्य मठ-मंदिरों में भी उत्सव की धारा प्रवाहित हो रही है।