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समरसता के उच्चतम मानकों को प्रस्तुत करता है रामराज्य का आदर्श: राष्ट्रपति
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Thu, 19 Mar 2026 07:40 PM IST
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राममंदिर में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करतीं राष्ट्रपति द्रौपदी।
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अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रीराम यंत्र स्थापना के ऐतिहासिक अवसर पर बृहस्पतिवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रामराज्य को समरसता, समृद्धि और नैतिकता का सर्वोच्च आदर्श बताते हुए कहा कि भारत आज उसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि रामराज्य समरसता के उच्चतम मानकों को प्रस्तुत करता है। देश में आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक सभी आयामों में पुनर्जागरण का दौर चल रहा है।
राष्ट्रपति ने अयोध्या पहुंचकर सबसे पहले रामलला के दर्शन किए और मंदिर परिसर में विभिन्न स्थलों पर पूजन-अर्चन के साथ श्रीराम यंत्र की स्थापना में सहभागिता की। उन्होंने सप्तमंडपम में विराजमान महर्षि बाल्मीकि, अहिल्या, शबरी, निषादराज के मंदिरा में भी दर्शन किया और समरसता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अयोध्या की पवित्र धूलि का स्पर्श करना उनके लिए परम सौभाग्य का विषय है। यह वही भूमि है, जहां प्रभु श्रीराम ने जन्म लिया और जिसे उन्होंने स्वर्ग से भी बढ़कर बताया।
उन्होंने राम मंदिर निर्माण के भूमि पूजन, रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा, राम दरबार के दर्शन और शिखर पर ध्वजारोहण को भारतीय इतिहास और संस्कृति की स्वर्णिम तिथियां बताया। राष्ट्रपति ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास की ओर से वर्णित रामराज्य आज भी हमारे लिए प्रेरणा का स्रोत है। रामराज्य में न कोई दुखी होता है, न निर्धन, न ही कोई उपेक्षित यह समावेशी और न्यायपूर्ण समाज का आदर्श है। उन्होंने आगे कहा कि रामराज्य केवल आध्यात्मिक अवधारणा नहीं, बल्कि आर्थिक समृद्धि और सामाजिक समरसता के उच्चतम मानकों का प्रतीक है। आज भारत जिन लक्ष्यों सामाजिक न्याय, समावेशी विकास और राष्ट्रीय एकता की ओर अग्रसर है, वे उसी आदर्श से प्रेरित हैं।
राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि प्रभु श्रीराम के आशीर्वाद से भारत 2047 तक, या उससे भी पहले, एक विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित हो सकता है। उन्होंने कहा कि श्रीराम यंत्र की स्थापना जैसे आयोजन हमें नैतिकता, धर्माचरण और कर्तव्यबोध के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।
उन्होंने कहा कि मुझमे राम, तुझमे राम, सबमे राम समाए....। नागरिकों से आह्वान किया कि वे प्रभु श्रीराम के प्रति भक्ति और एकता के सूत्र में बंधकर राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं। कहा कि आपसी आत्मीयता और समर्पण की भावना से ही हम एक सशक्त, समृद्ध और समरस भारत का निर्माण कर सकते हैं। इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व गोविंद देव गिरि ने राष्ट्रपति का अभिनंदन किया। मंच पर उनके साथ केरल की मां अमृतानंदमयी और संघ के पूर्व सह कार्यवाह भैयाजी जोशी भी मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने किया।
सात हजार मेहमान बने समारोह के साक्षी
- श्रीराम यंत्र स्थापना के समारोह का साक्षी बनने के लिए उत्तरप्रदेश व उत्तराखंड के सात हजार मेहमान भी मौजूद रहे। राष्ट्रपति ने मंदिर निर्माण में लगे श्रमिकों का भी अभिवादन किया और उनके योगदान को अमूल्य बताया। इससे पहले अयोध्यावासियों ने भी सड़क किनारे खड़े होकर पुष्प वर्षा, जयकारों संग देश की प्रथम नागरिक का गर्मजोशी से स्वागत किया। राष्ट्रपति ने भी अयोध्यावासियों का अभिवादन किया। कार्यक्रम को और भव्य बनाने के लिए रामलीला के अंश, झांकियां, ढोल-नगाड़ा, शंखनाद, वेदपाठ और भजन-कीर्तन जैसी पारंपरिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की गईं, जिससे अयोध्या की समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिली।
एयरपोर्ट पर राज्यपाल व मुख्यमंत्री ने किया स्वागत
अयोध्या। चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिन बृहस्पतिवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू रामनगरी पहुंचीं। यहां उनका भव्य स्वागत किया गया। महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर राज्यपाल आनंदी बेन पटेल व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुष्पगुच्छ देकर उनका स्वागत किया। इस दौरान उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व ब्रजेश पाठक भी मौजूद रहे। महापौर महंत गिरीश पति त्रिपाठी ने राष्ट्रपति का अभिवादन करते हुए उन्हें ‘नगर की चाबी’ भेंट की। यह सम्मान अतिथि को नगर की ओर से दिया जाने वाला सर्वोच्च प्रतीकात्मक सम्मान माना जाता है। अयोध्या एयरपोर्ट से श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के लिए जैसे ही राष्ट्रपति का काफिला रवाना हुआ, पूरे मार्ग पर उत्सव जैसा दृश्य देखने को मिला। सड़क के दोनों ओर करीब 20 सांस्कृतिक मंच सजाए गए थे, जहां लगभग 250 कलाकारों ने रामायण आधारित प्रस्तुतियों के माध्यम से वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
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राष्ट्रपति ने अयोध्या पहुंचकर सबसे पहले रामलला के दर्शन किए और मंदिर परिसर में विभिन्न स्थलों पर पूजन-अर्चन के साथ श्रीराम यंत्र की स्थापना में सहभागिता की। उन्होंने सप्तमंडपम में विराजमान महर्षि बाल्मीकि, अहिल्या, शबरी, निषादराज के मंदिरा में भी दर्शन किया और समरसता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अयोध्या की पवित्र धूलि का स्पर्श करना उनके लिए परम सौभाग्य का विषय है। यह वही भूमि है, जहां प्रभु श्रीराम ने जन्म लिया और जिसे उन्होंने स्वर्ग से भी बढ़कर बताया।
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उन्होंने राम मंदिर निर्माण के भूमि पूजन, रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा, राम दरबार के दर्शन और शिखर पर ध्वजारोहण को भारतीय इतिहास और संस्कृति की स्वर्णिम तिथियां बताया। राष्ट्रपति ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास की ओर से वर्णित रामराज्य आज भी हमारे लिए प्रेरणा का स्रोत है। रामराज्य में न कोई दुखी होता है, न निर्धन, न ही कोई उपेक्षित यह समावेशी और न्यायपूर्ण समाज का आदर्श है। उन्होंने आगे कहा कि रामराज्य केवल आध्यात्मिक अवधारणा नहीं, बल्कि आर्थिक समृद्धि और सामाजिक समरसता के उच्चतम मानकों का प्रतीक है। आज भारत जिन लक्ष्यों सामाजिक न्याय, समावेशी विकास और राष्ट्रीय एकता की ओर अग्रसर है, वे उसी आदर्श से प्रेरित हैं।
राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि प्रभु श्रीराम के आशीर्वाद से भारत 2047 तक, या उससे भी पहले, एक विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित हो सकता है। उन्होंने कहा कि श्रीराम यंत्र की स्थापना जैसे आयोजन हमें नैतिकता, धर्माचरण और कर्तव्यबोध के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।
उन्होंने कहा कि मुझमे राम, तुझमे राम, सबमे राम समाए....। नागरिकों से आह्वान किया कि वे प्रभु श्रीराम के प्रति भक्ति और एकता के सूत्र में बंधकर राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं। कहा कि आपसी आत्मीयता और समर्पण की भावना से ही हम एक सशक्त, समृद्ध और समरस भारत का निर्माण कर सकते हैं। इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व गोविंद देव गिरि ने राष्ट्रपति का अभिनंदन किया। मंच पर उनके साथ केरल की मां अमृतानंदमयी और संघ के पूर्व सह कार्यवाह भैयाजी जोशी भी मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने किया।
सात हजार मेहमान बने समारोह के साक्षी
- श्रीराम यंत्र स्थापना के समारोह का साक्षी बनने के लिए उत्तरप्रदेश व उत्तराखंड के सात हजार मेहमान भी मौजूद रहे। राष्ट्रपति ने मंदिर निर्माण में लगे श्रमिकों का भी अभिवादन किया और उनके योगदान को अमूल्य बताया। इससे पहले अयोध्यावासियों ने भी सड़क किनारे खड़े होकर पुष्प वर्षा, जयकारों संग देश की प्रथम नागरिक का गर्मजोशी से स्वागत किया। राष्ट्रपति ने भी अयोध्यावासियों का अभिवादन किया। कार्यक्रम को और भव्य बनाने के लिए रामलीला के अंश, झांकियां, ढोल-नगाड़ा, शंखनाद, वेदपाठ और भजन-कीर्तन जैसी पारंपरिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की गईं, जिससे अयोध्या की समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिली।
एयरपोर्ट पर राज्यपाल व मुख्यमंत्री ने किया स्वागत
अयोध्या। चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिन बृहस्पतिवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू रामनगरी पहुंचीं। यहां उनका भव्य स्वागत किया गया। महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर राज्यपाल आनंदी बेन पटेल व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुष्पगुच्छ देकर उनका स्वागत किया। इस दौरान उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व ब्रजेश पाठक भी मौजूद रहे। महापौर महंत गिरीश पति त्रिपाठी ने राष्ट्रपति का अभिवादन करते हुए उन्हें ‘नगर की चाबी’ भेंट की। यह सम्मान अतिथि को नगर की ओर से दिया जाने वाला सर्वोच्च प्रतीकात्मक सम्मान माना जाता है। अयोध्या एयरपोर्ट से श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के लिए जैसे ही राष्ट्रपति का काफिला रवाना हुआ, पूरे मार्ग पर उत्सव जैसा दृश्य देखने को मिला। सड़क के दोनों ओर करीब 20 सांस्कृतिक मंच सजाए गए थे, जहां लगभग 250 कलाकारों ने रामायण आधारित प्रस्तुतियों के माध्यम से वातावरण को भक्तिमय बना दिया।