UP: डैमेज कंट्रोल में जुटे गोपाल राव, ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास से की मुलाकात; एकांत में काफी देर तक हुई चर्चा
राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े हालिया घटनाक्रम के बीच एक वरिष्ठ सदस्य ने ट्रस्टी महंत से बंद कमरे में लंबी मुलाकात की। चर्चा को ट्रस्ट के भीतर मतभेद कम करने और समन्वय बढ़ाने की कोशिश माना जा रहा है। हाल के प्रशासनिक बदलावों और जांच के बाद यह बैठक काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में जारी घटनाक्रम के बीच गोपाल राव ने शुक्रवार को निर्मोही अखाड़ा में ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास से बंद कमरे में मुलाकात की। सूत्रों के अनुसार, दोनों के बीच काफी देर तक एकांत में चर्चा हुई। इस मुलाकात को ट्रस्ट के भीतर चल रहे विवादों के बीच डैमेज कंट्रोल की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
हाल ही में महंत दिनेंद्र दास ने राम मंदिर की व्यवस्थाओं में गोपाल राव की भूमिका को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने ट्रस्ट के भीतर जिम्मेदारियों के निर्धारण और निर्णय प्रक्रिया पर भी अपनी आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा था कि गोपाल राव ट्रस्टी नहीं हैं, फिर भी राम मंदिर की व्यवस्थाओं में उनका पूरा दखल है।
कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि से भी मुलाकात की थी
उन्होंने कहा था कि गोपाल राव को बाहर किया जाना चाहिए। इसके बाद पहली बार दोनों के बीच आमने-सामने विस्तृत बातचीत हुई है। इससे पहले गोपाल राव ने बृहस्पतिवार की शाम चंपत राय व बुधवार की दोपहर राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि से भी मुलाकात की थी।
सूत्रों के अनुसार एसआईटी जांच और हालिया प्रशासनिक बदलावों के बाद ट्रस्ट के भीतर संवाद बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि विवादों को सार्वजनिक होने से रोका जा सके और मंदिर की व्यवस्थाओं पर उसका असर न पड़े।
बंद कमरे में हुई इस मुलाकात ने ट्रस्ट के अंदर जारी हलचल को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि आने वाले दिनों में ट्रस्ट के भीतर समन्वय स्थापित होता है या मतभेद और गहराते हैं।
गोपाल राव बोले- सारे आरोप भ्रामक हैं
कुछ दिन पहले श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के आमंत्रित सदस्य रहे गोपाल राव ने कहा था कि ट्रस्ट की बैठक में वह आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल हुए थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके, चंपत राय और अनिल मिश्रा के खिलाफ लगाए जा रहे अन्य आरोप भ्रामक हैं।
नैतिक आधार पर ट्रस्ट ने उनसे फिलहाल बैठकों से दूर रहने का अनुरोध किया था, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया है। नई व्यवस्था बनने तक जरूरत पड़ने पर सहयोग करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि दानपात्र से चोरी की घटना के अलावा बाकी सभी बातें अफवाह हैं।