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Azamgarh News: धरपकड़ नहीं, नौ महीने में बंदरों ने 867 लोगों को काटा
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अतरौलिया में टीनशेड पर झुंड में टहलते बंदर।संवाद
शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों की बाजारों तक बंदरों का उत्पात बढ़ता जा रहा है। इसके बावजूद इनकी धरपकड़ के लिए कोई ठोस योजना नहीं बनाई जा सकी है। जनवरी से सितंबर माह के बीच बंदरों के काटने से 867 लोग अस्पताल पहुंच चुके हैं।
हर माह औसतन 96 लोगों को बंदरों के काटने के बाद उपचार और एंटी रैबीज डोज लगवाने की जरूरत पड़ रही है। शहर के कलेक्ट्रेट, रोडवेज, जिला अस्पताल, रेलवे स्टेशन, सिधारी, चौक समेत सभी इलाकों में बंदरों के झुंड देखे जा सकते हैं।
शहर निवासी मनोज सिंह, हवलदार वर्मा, रितेश जायसवाल और दीपक श्रीवास्तव का कहना है कि बंदरों की बढ़ती संख्या और उनके हमलों से लोग परेशान हैं। घरों की छतों, सड़कों और बाजारों में इनका उत्पात बना हुआ है। कई बार बंदर लोगों को काटकर घायल कर देते हैं, जबकि इनके डर से बचने की कोशिश में भी लोग चोटिल हो जाते हैं।
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बंदरों के उत्पात से आम लोगों को रोजाना परेशानी उठानी पड़ रही है। इसके बावजूद उनकी धरपकड़ के लिए नियमित अभियान नहीं चलाया जा रहा है। नगर पालिका की ओर से करीब डेढ़ साल पहले बंदरों को पकड़ने के लिए अभियान चलाया गया था। उस दौरान कुछ बंदरों को पकड़ा भी गया, लेकिन इसके बाद कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी।
अतरौलिया: कस्बे में बंदरों का उत्पात गंभीर समस्या बन गया है। किसी की जिम्मेदारी तय न होने से इनसे राहत नहीं मिल पा रही है। तीन माह में बंदरों के हमले में 50 से अधिक लोग घायल हो चुके हैं। बाजार, गलियों और रिहायशी इलाकों में बंदरों के झुंड दिनभर सक्रिय रहते हैं, जिससे लोगों का घर से निकलना तक मुश्किल हो गया है।
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सीएचसी पर भी हर महीने 100 लोगों को लग रही एंटी रैबीज
महराजगंज/बरदह। दोनों बाजारों में बंदरों का उत्पात ज्यादा बढ़ गया है। इनसे दुकानदार और घरों के लोग भी परेशान हैं। इनके डर से महिलाएं छत पर कपड़ा सुखाने नहीं जाती हैं। बंदर कपड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं। महिलाएं डंडा लेकर छत पर गेहूं सुखाती हैं। सीएचसी महराजगंज के प्रभारी योगेश कुमार गौतम और बरदह सीएचसी के प्रभारी सोमेशरंजन मिश्रा ने बताया कि हर माह करीब 100 लोग एंटी रैबीज डोज लगवाने पहुंच रहे हैं। प्रत्येक व्यक्ति को चार डोज लगाए जाते हैं। संवाद
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पकड़ने का फिर से चलेगा अभियान
मेंहनगर। कस्बे में बंदरों के उत्पात से व्यापारी और आम राहगीर परेशान हैं। बंदरों के उत्पात के चलते आए दिन दुर्घटनाएं भी हो रही हैं। खासकर मंदिर जाने वाली महिलाओं और विद्यालय जाने वाले छात्रों को बंदरों से परेशानी हो रही है। एक बार कुछ बंदरों को पकड़ा गया था। इस संबंध में ईओ विक्रम ने कहा कि बंदरों को पकड़ने के लिए एक बार फिर अभियान चलाया जाएगा। संवाद
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बंदरों के काटने की घटनाएं
जनवरी - 117
फरवरी - 102
मार्च - 133
अप्रैल - 113
मई - 101
जून - 85
जुलाई - 73
अगस्त - 63
सितंबर - 80
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पहले बंदरों की धरपकड़ की जिम्मेदारी निकाय की थी, तो अभियान चलाकर कुछ बंदरों को पकड़ा गया था। शासन से तीन-चार दिन पहले नया आदेश आया है। अब बंदरों की धरपकड़ वन विभाग के जिम्मे है। वन विभाग ही बंदरों को पकड़ेगा। -डॉ. बृजेश कुमार, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद आजमगढ़।
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हर माह औसतन 96 लोगों को बंदरों के काटने के बाद उपचार और एंटी रैबीज डोज लगवाने की जरूरत पड़ रही है। शहर के कलेक्ट्रेट, रोडवेज, जिला अस्पताल, रेलवे स्टेशन, सिधारी, चौक समेत सभी इलाकों में बंदरों के झुंड देखे जा सकते हैं।
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शहर निवासी मनोज सिंह, हवलदार वर्मा, रितेश जायसवाल और दीपक श्रीवास्तव का कहना है कि बंदरों की बढ़ती संख्या और उनके हमलों से लोग परेशान हैं। घरों की छतों, सड़कों और बाजारों में इनका उत्पात बना हुआ है। कई बार बंदर लोगों को काटकर घायल कर देते हैं, जबकि इनके डर से बचने की कोशिश में भी लोग चोटिल हो जाते हैं।
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बंदरों के उत्पात से आम लोगों को रोजाना परेशानी उठानी पड़ रही है। इसके बावजूद उनकी धरपकड़ के लिए नियमित अभियान नहीं चलाया जा रहा है। नगर पालिका की ओर से करीब डेढ़ साल पहले बंदरों को पकड़ने के लिए अभियान चलाया गया था। उस दौरान कुछ बंदरों को पकड़ा भी गया, लेकिन इसके बाद कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी।
अतरौलिया: कस्बे में बंदरों का उत्पात गंभीर समस्या बन गया है। किसी की जिम्मेदारी तय न होने से इनसे राहत नहीं मिल पा रही है। तीन माह में बंदरों के हमले में 50 से अधिक लोग घायल हो चुके हैं। बाजार, गलियों और रिहायशी इलाकों में बंदरों के झुंड दिनभर सक्रिय रहते हैं, जिससे लोगों का घर से निकलना तक मुश्किल हो गया है।
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सीएचसी पर भी हर महीने 100 लोगों को लग रही एंटी रैबीज
महराजगंज/बरदह। दोनों बाजारों में बंदरों का उत्पात ज्यादा बढ़ गया है। इनसे दुकानदार और घरों के लोग भी परेशान हैं। इनके डर से महिलाएं छत पर कपड़ा सुखाने नहीं जाती हैं। बंदर कपड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं। महिलाएं डंडा लेकर छत पर गेहूं सुखाती हैं। सीएचसी महराजगंज के प्रभारी योगेश कुमार गौतम और बरदह सीएचसी के प्रभारी सोमेशरंजन मिश्रा ने बताया कि हर माह करीब 100 लोग एंटी रैबीज डोज लगवाने पहुंच रहे हैं। प्रत्येक व्यक्ति को चार डोज लगाए जाते हैं। संवाद
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पकड़ने का फिर से चलेगा अभियान
मेंहनगर। कस्बे में बंदरों के उत्पात से व्यापारी और आम राहगीर परेशान हैं। बंदरों के उत्पात के चलते आए दिन दुर्घटनाएं भी हो रही हैं। खासकर मंदिर जाने वाली महिलाओं और विद्यालय जाने वाले छात्रों को बंदरों से परेशानी हो रही है। एक बार कुछ बंदरों को पकड़ा गया था। इस संबंध में ईओ विक्रम ने कहा कि बंदरों को पकड़ने के लिए एक बार फिर अभियान चलाया जाएगा। संवाद
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बंदरों के काटने की घटनाएं
जनवरी - 117
फरवरी - 102
मार्च - 133
अप्रैल - 113
मई - 101
जून - 85
जुलाई - 73
अगस्त - 63
सितंबर - 80
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पहले बंदरों की धरपकड़ की जिम्मेदारी निकाय की थी, तो अभियान चलाकर कुछ बंदरों को पकड़ा गया था। शासन से तीन-चार दिन पहले नया आदेश आया है। अब बंदरों की धरपकड़ वन विभाग के जिम्मे है। वन विभाग ही बंदरों को पकड़ेगा। -डॉ. बृजेश कुमार, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद आजमगढ़।