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बर्तनों के पीछे छिपे सांप ने डेढ़ साल के दक्ष को डसा, इलाज के दौरान मौत; रातभर झाड़फूंक कराते रहे परिजन
Thu, 01 Oct 2026 01:49 AM IST
मेरठ ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत
Published by: मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 01 Oct 2026 01:49 AM IST
सार
बड़ौत के बाम गांव में सांप के डसने से डेढ़ साल के बच्चे दक्ष की मौत हो गई। परिजनों ने सीएचसी में एंबुलेंस नहीं मिलने का आरोप लगाया है।
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विस्तार
बड़ौत के बाम गांव में घर में खेल रहे डेढ़ साल के बच्चे को बर्तनों के पीछे छिपे सांप ने डस लिया। परिजन उसे पहले स्थानीय चिकित्सक और फिर बड़ौत सीएचसी लेकर पहुंचे। हालत बिगड़ने पर उसे रेफर किया गया, लेकिन निजी अस्पताल में चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। इसके बाद परिजन बच्चे के बचने की उम्मीद में रातभर झाड़फूंक कराते रहे।
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बर्तनों के पीछे छिपा था सांप
बाम गांव निवासी आशीष कुमार ने बताया कि वह मंगलवार को मजदूरी पर गया था। घर पर उसकी पत्नी, दो बेटे और अन्य परिवार के लोग थे। दोपहर करीब ढाई बजे डेढ़ साल का दक्ष बेड पर चढ़कर स्लैब पर रखे बर्तनों से खेल रहा था। इसी दौरान बर्तनों के पीछे छिपे सांप ने उसके हाथ में डस लिया।
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बच्चे के रोने की आवाज सुनकर उसकी मां मौके पर पहुंची। उसने सांप को दीवार की दरार में घुसते हुए देखा। बच्चे के हाथ पर डसने के निशान मिलने के बाद परिवार में हड़कंप मच गया।
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रस्सी बांधकर पहले स्थानीय चिकित्सक के पास पहुंचे
परिवार और गांव के लोग बच्चे को लेकर स्थानीय चिकित्सक के पास पहुंचे। परिजनों के अनुसार, चिकित्सक ने इंजेक्शन लगाने के बाद बच्चे को बड़ौत सीएचसी ले जाने और एंटी स्नेक वेनम देने की सलाह दी। इसके बाद परिवार बच्चे को बड़ौत सीएचसी लेकर पहुंचा।
आशीष के अनुसार, सीएचसी में चिकित्सक ने बच्चे के हाथ में बंधी रस्सी खोलकर उपचार किया। हालत बिगड़ने पर उसे रेफर कर दिया गया।
परिवार और गांव के लोग बच्चे को लेकर स्थानीय चिकित्सक के पास पहुंचे। परिजनों के अनुसार, चिकित्सक ने इंजेक्शन लगाने के बाद बच्चे को बड़ौत सीएचसी ले जाने और एंटी स्नेक वेनम देने की सलाह दी। इसके बाद परिवार बच्चे को बड़ौत सीएचसी लेकर पहुंचा।
आशीष के अनुसार, सीएचसी में चिकित्सक ने बच्चे के हाथ में बंधी रस्सी खोलकर उपचार किया। हालत बिगड़ने पर उसे रेफर कर दिया गया।
निजी अस्पताल में मृत घोषित, रातभर झाड़फूंक
परिजनों के अनुसार, सीएचसी से रेफर किए जाने के बाद बच्चे को निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद कुछ लोगों ने परिजनों को झाड़फूंक से बच्चे के बचने की सलाह दी। परिवार बच्चे को घर ले आया और सुबह तक कपड़े में लपेटकर रखा। परिजन उस पर पानी भी डालते रहे।
बुधवार सुबह गांव के लोगों ने परिवार को समझाया, जिसके बाद गड्ढा खोदकर बच्चे के शव को दबा दिया गया।
परिजनों के अनुसार, सीएचसी से रेफर किए जाने के बाद बच्चे को निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद कुछ लोगों ने परिजनों को झाड़फूंक से बच्चे के बचने की सलाह दी। परिवार बच्चे को घर ले आया और सुबह तक कपड़े में लपेटकर रखा। परिजन उस पर पानी भी डालते रहे।
बुधवार सुबह गांव के लोगों ने परिवार को समझाया, जिसके बाद गड्ढा खोदकर बच्चे के शव को दबा दिया गया।
पिता ने सीएचसी पर लगाया लापरवाही का आरोप
दक्ष की मौत के बाद पिता आशीष कुमार ने बड़ौत सीएचसी के कर्मचारियों पर लापरवाही का आरोप लगाया। उनका कहना है कि सीएचसी से रेफर करने के बाद बच्चे को जिला अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस नहीं मंगाई गई। वह बच्चे को ई-रिक्शा से ले जाने लगे, लेकिन रास्ते में उसकी हालत और बिगड़ गई। इसके बाद जिला अस्पताल के बजाय बड़ौत के निजी चिकित्सक के यहां पहुंचे, जहां बच्चे को मृत घोषित कर दिया गया।
सीएचसी अधीक्षक डॉ. विजय कुमार ने कहा कि सांप के डसने से बच्चे की मौत का मामला उनकी जानकारी में नहीं है। सीएचसी से रेफर किए जाने पर एंबुलेंस नहीं मंगवाने के आरोप की जांच कराई जाएगी। जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
दो भाइयों में छोटा था दक्ष
आशीष कुमार मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। उनके दो बेटे थे, जिनमें दक्ष छोटा था। अब परिवार में उनका तीन साल का बड़ा बेटा ही रह गया है।
दक्ष की मौत के बाद पिता आशीष कुमार ने बड़ौत सीएचसी के कर्मचारियों पर लापरवाही का आरोप लगाया। उनका कहना है कि सीएचसी से रेफर करने के बाद बच्चे को जिला अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस नहीं मंगाई गई। वह बच्चे को ई-रिक्शा से ले जाने लगे, लेकिन रास्ते में उसकी हालत और बिगड़ गई। इसके बाद जिला अस्पताल के बजाय बड़ौत के निजी चिकित्सक के यहां पहुंचे, जहां बच्चे को मृत घोषित कर दिया गया।
सीएचसी अधीक्षक डॉ. विजय कुमार ने कहा कि सांप के डसने से बच्चे की मौत का मामला उनकी जानकारी में नहीं है। सीएचसी से रेफर किए जाने पर एंबुलेंस नहीं मंगवाने के आरोप की जांच कराई जाएगी। जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
दो भाइयों में छोटा था दक्ष
आशीष कुमार मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। उनके दो बेटे थे, जिनमें दक्ष छोटा था। अब परिवार में उनका तीन साल का बड़ा बेटा ही रह गया है।