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शास्त्र पढ़ने से ज्ञान की होती है वृद्धि : विमर्श
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फोटो संख्या 2
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। नगर के अजितनाथ सभागार में रविवार को धर्मसभा में जैन संत विमर्श सागर महाराज ने कहा कि शास्त्र पढ़ने से ज्ञान की वृद्धि होती है और संत समागम से अज्ञानता का नाश होता है।
उन्होंने कहा कि अज्ञानता का नाश होने के बाद व्यक्ति आचरण को अंगीकार कर लेता है। इसलिए जैन दर्शन में आचार्य उसी को माना गया है, जो ज्ञान व आचरण दोनों से युक्त है। जो मात्र ज्ञान को ही मिथ्यात्व व संसार को हटाने वाला मानता है, उसकी बुद्धि उल्लू के समान होती है। जिस प्रकार उल्लू सूर्य के प्रकाश को अंधकार का कारण मानता है। महावीर का मार्ग संकल्प का मार्ग है और साधु का संगठन नहीं होता। इस मौके पर महेंद्र जैन, मुकेश जैन, प्रदीप जैन, वरदान जैन, संजीव जैन, वकील चंद जैन, मदन जैन आदि उपस्थित रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। नगर के अजितनाथ सभागार में रविवार को धर्मसभा में जैन संत विमर्श सागर महाराज ने कहा कि शास्त्र पढ़ने से ज्ञान की वृद्धि होती है और संत समागम से अज्ञानता का नाश होता है।
उन्होंने कहा कि अज्ञानता का नाश होने के बाद व्यक्ति आचरण को अंगीकार कर लेता है। इसलिए जैन दर्शन में आचार्य उसी को माना गया है, जो ज्ञान व आचरण दोनों से युक्त है। जो मात्र ज्ञान को ही मिथ्यात्व व संसार को हटाने वाला मानता है, उसकी बुद्धि उल्लू के समान होती है। जिस प्रकार उल्लू सूर्य के प्रकाश को अंधकार का कारण मानता है। महावीर का मार्ग संकल्प का मार्ग है और साधु का संगठन नहीं होता। इस मौके पर महेंद्र जैन, मुकेश जैन, प्रदीप जैन, वरदान जैन, संजीव जैन, वकील चंद जैन, मदन जैन आदि उपस्थित रहे।
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