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Bahraich News: स्पर ही नदी में बह जाएंगे तो बाढ़ से कैसे बचेंगे गांव
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बेलहा बेहरौली तटबंध के किलोमीटर संख्या 49 पर निर्माणाधीन स्पर व बगल में खोदी जा रही मिट्टी।
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बहराइच। सरयू नदी की कटान से 13 गांवों और जलभराव से 400 गांवों को बचाने के लिए 9.65 करोड़ रुपये से स्पर निर्माण के काम पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि स्पर की नोज तैयार करने के लिए निर्माण स्थल से महज 50 मीटर दूर नदी से ही मिट्टी निकाली जा रही है, जिससे तटबंध और निर्माणाधीन स्पर दोनों पर खतरा मंडरा सकता है। ग्रामीणों की शिकायत पर देवीपाटन मंडल की आयुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल ने मामले की जांच जिलाधिकारी को सौंपी है।
हर साल बाढ़ और कटान की तबाही झेलने वाले महसी इलाके के 13 गांवों सहित कुल 400 गांवों की दो की लाख आबादी को बाढ़ से बचाने के लिए स्पर बनाया जा रहा है, लेकिन निर्माण कार्य में लापरवाही भारी पड़ सकती है। आरोप है कि किलोमीटर संख्या 49 पर बन रहे स्पर की नोज तैयार करने के लिए निर्माण स्थल से महज 50 मीटर दूर नदी की तलहटी से जेसीबी मशीनों के जरिये मिट्टी निकाली जा रही है। इससे तटबंध के निकट गहरे गड्ढे बन रहे हैं, जो बाढ़ के दौरान कटान का नया कारण बन सकते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि स्पर और स्टड निर्माण के लिए नदी में करीब 40 मीटर के दायरे में बेस बनाकर खोदाई की जा रही है। ऐसे में बरसात के दौरान नदी में पानी बढ़ने तेज बहाव होने पर पानी इन्हीं कमजोर हिस्सों पर दबाव बनाएगा। इससे तटबंध के कटने का खतरा बढ़ जाएगा। स्थानीय लोगों का दावा है कि यदि नदी ने रुख बदला तो न केवल तटबंध प्रभावित होगा, बल्कि करोड़ों रुपये की लागत से बन रहा स्पर भी नदी में समाहित हो सकता है।
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ग्रामीणों ने पहले सरयू नहर खंड प्रथम के अधिकारियों व जिला प्रशासन से शिकायत की, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। इस पर देवीपाटन मंडल की आयुक्त दुर्गा नागपाल को पूरे प्रकरण से अवगत कराया। आयुक्त ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी को जांच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। साथ ही कहा है कि वह जल्द ही महसी पहुंचकर निर्माण कार्य का स्थलीय निरीक्षण करेंगी और मौके पर व्यवस्थाओं का जायजा लेंगी।
सुरक्षा के लिए बनाए जा रहे दो स्पर
महसी क्षेत्र में बाढ़ के समय लगभग दो लाख की आबादी प्रभावित होती है और 400 से अधिक गांव जलभराव व कटान के संकट से जूझते हैं। इसी समस्या के समाधान के लिए सरयू ड्रेनेज खंड प्रथम ने दो स्पर निर्माण का प्रस्ताव शासन को भेजा था। स्वीकृति मिलने के बाद परियोजना के लिए 9 करोड़ 65 लाख रुपये मंजूर किए गए। विभागीय अभिलेखों के अनुसार किलोमीटर 49.100 पर बनने वाले स्पर पर 4 करोड़ 83 लाख 76 हजार रुपये तथा किलोमीटर 50.100 पर बनने वाले दूसरे स्पर पर 4 करोड़ 81 लाख 81 हजार रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
कमजोर पड़ सकती है संरचना की नींव
सेवानिवृत्त अभियंता एएन वर्मा के अनुसार स्पर और अपरन जैसी बाढ़रोधी संरचनाएं तभी प्रभावी होती हैं, जब उनका निर्माण निर्धारित मानकों के अनुरूप हो। उनका कहना है कि यदि स्पर से मात्र 50 मीटर दूरी पर नोज निर्माण के लिए मिट्टी निकाली जा रही है तो इससे संरचना की नींव कमजोर पड़ सकती है। बाढ़ के समय सरयू नदी लगभग 150 मीटर तक बैकरोलिंग करती है, ऐसे में नदी की लहरें तटबंध और स्पर दोनों पर अतिरिक्त दबाव बना सकती हैं। जो तटबंध के कटने का भी कारण बन सकता है।
कटान का दंश झेलते हैं ये 13 गांव
सरयू नदी के किनारे बसे टिकरी, कोढ़वा, पिपरा, पिपरी, राठौरनपुरवा, किशनगंज चौराहा, गोलागंज, लोधौनी, हलवाईपुरवा, किसानगंज समेत कुल 13 गांवों को कटान और बाढ़ से बचाने के लिए यह परियोजना शुरू की गई है, लेकिन निर्माण कार्य में गुणवत्ता और मानकों की अनदेखी के आरोपों ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है।
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हर साल बाढ़ और कटान की तबाही झेलने वाले महसी इलाके के 13 गांवों सहित कुल 400 गांवों की दो की लाख आबादी को बाढ़ से बचाने के लिए स्पर बनाया जा रहा है, लेकिन निर्माण कार्य में लापरवाही भारी पड़ सकती है। आरोप है कि किलोमीटर संख्या 49 पर बन रहे स्पर की नोज तैयार करने के लिए निर्माण स्थल से महज 50 मीटर दूर नदी की तलहटी से जेसीबी मशीनों के जरिये मिट्टी निकाली जा रही है। इससे तटबंध के निकट गहरे गड्ढे बन रहे हैं, जो बाढ़ के दौरान कटान का नया कारण बन सकते हैं।
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ग्रामीणों का कहना है कि स्पर और स्टड निर्माण के लिए नदी में करीब 40 मीटर के दायरे में बेस बनाकर खोदाई की जा रही है। ऐसे में बरसात के दौरान नदी में पानी बढ़ने तेज बहाव होने पर पानी इन्हीं कमजोर हिस्सों पर दबाव बनाएगा। इससे तटबंध के कटने का खतरा बढ़ जाएगा। स्थानीय लोगों का दावा है कि यदि नदी ने रुख बदला तो न केवल तटबंध प्रभावित होगा, बल्कि करोड़ों रुपये की लागत से बन रहा स्पर भी नदी में समाहित हो सकता है।
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ग्रामीणों ने पहले सरयू नहर खंड प्रथम के अधिकारियों व जिला प्रशासन से शिकायत की, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। इस पर देवीपाटन मंडल की आयुक्त दुर्गा नागपाल को पूरे प्रकरण से अवगत कराया। आयुक्त ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी को जांच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। साथ ही कहा है कि वह जल्द ही महसी पहुंचकर निर्माण कार्य का स्थलीय निरीक्षण करेंगी और मौके पर व्यवस्थाओं का जायजा लेंगी।
सुरक्षा के लिए बनाए जा रहे दो स्पर
महसी क्षेत्र में बाढ़ के समय लगभग दो लाख की आबादी प्रभावित होती है और 400 से अधिक गांव जलभराव व कटान के संकट से जूझते हैं। इसी समस्या के समाधान के लिए सरयू ड्रेनेज खंड प्रथम ने दो स्पर निर्माण का प्रस्ताव शासन को भेजा था। स्वीकृति मिलने के बाद परियोजना के लिए 9 करोड़ 65 लाख रुपये मंजूर किए गए। विभागीय अभिलेखों के अनुसार किलोमीटर 49.100 पर बनने वाले स्पर पर 4 करोड़ 83 लाख 76 हजार रुपये तथा किलोमीटर 50.100 पर बनने वाले दूसरे स्पर पर 4 करोड़ 81 लाख 81 हजार रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
कमजोर पड़ सकती है संरचना की नींव
सेवानिवृत्त अभियंता एएन वर्मा के अनुसार स्पर और अपरन जैसी बाढ़रोधी संरचनाएं तभी प्रभावी होती हैं, जब उनका निर्माण निर्धारित मानकों के अनुरूप हो। उनका कहना है कि यदि स्पर से मात्र 50 मीटर दूरी पर नोज निर्माण के लिए मिट्टी निकाली जा रही है तो इससे संरचना की नींव कमजोर पड़ सकती है। बाढ़ के समय सरयू नदी लगभग 150 मीटर तक बैकरोलिंग करती है, ऐसे में नदी की लहरें तटबंध और स्पर दोनों पर अतिरिक्त दबाव बना सकती हैं। जो तटबंध के कटने का भी कारण बन सकता है।
कटान का दंश झेलते हैं ये 13 गांव
सरयू नदी के किनारे बसे टिकरी, कोढ़वा, पिपरा, पिपरी, राठौरनपुरवा, किशनगंज चौराहा, गोलागंज, लोधौनी, हलवाईपुरवा, किसानगंज समेत कुल 13 गांवों को कटान और बाढ़ से बचाने के लिए यह परियोजना शुरू की गई है, लेकिन निर्माण कार्य में गुणवत्ता और मानकों की अनदेखी के आरोपों ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है।

बेलहा बेहरौली तटबंध के किलोमीटर संख्या 49 पर निर्माणाधीन स्पर व बगल में खोदी जा रही मिट्टी।