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Barabanki News: जेल में 2.50 करोड़ से बनेंगी दो नई बैरक
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Fri, 13 Feb 2026 01:34 AM IST
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- ओवरलोड जिला जेल को मिलेगी बड़ी राहत
- क्षमता लगभग 960 बंदियों की, हो जाते 1500
फोटो- 14
संवाद न्यूज एजेंसी
बाराबंकी। वर्षों से क्षमता से अधिक बंदियों का बोझ झेल रही जिला जेल को आखिरकार बड़ी राहत मिलने जा रही है। करीब ढाई करोड़ रुपये की लागत से दो नई बैरकों के निर्माण को शासन ने प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति दे दी है। साथ ही निर्माण कार्य के लिए धनराशि भी जारी कर दी गई है। राज्य निर्माण सहकारी संघ इनका निर्माण करेगा।
जेल प्रशासन का मानना है कि इन बैरकों के बन जाने से बंदियों को लंबे समय से चली आ रही भीड़भाड़ की समस्या से काफी हद तक राहत मिलेगी। वर्तमान में जिला जेल की अधिकृत क्षमता लगभग 960 बंदियों की है, लेकिन वास्तविकता इससे कहीं अलग है। कई बार यहां 1200 से लेकर 1500 तक बंदी एक साथ निरुद्ध रहते हैं। पुरानी बैरकों में से कई जर्जर स्थिति में पहुंच चुकी हैं। बारिश में सीलन, गर्मी में असहनीय तापमान और सीमित स्थान के कारण बंदियों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। जेल सूत्रों के अनुसार क्षमता से अधिक बंदियों के रहने के कारण सोने की पर्याप्त जगह नहीं मिलती। स्वच्छता व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ता व सुरक्षा और निगरानी में भी चुनौती बढ़ती है। जेल अधीक्षक कुंदन कुमार ने बताया कि करीब 2.50 करोड़ की धनराशि आवंटित कर दी गई है। नई बैरकों के निर्माण से जेल में बंदियों के रहन-सहन की व्यवस्था बेहतर होगी।
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58.14 लाख से लगेगा पंप हाउस
जिला जेल में बंदियों के श्रम से सब्जियों की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। यहां उगाई गई सब्जियां जेल उपयोग के साथ-साथ अन्य जरूरतों को भी पूरा करती हैं। हालांकि, गर्मी के दिनों में सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध न होने से परेशानी हो जाती थी। इस समस्या के समाधान के लिए जेल प्रशासन ने ट्यूबवेल और पंप हाउस बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा था। अब शासन ने 58 लाख 14 हजार रुपये की स्वीकृति देते हुए स्थापना की मंजूरी दे दी है।
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फोटो- 14
संवाद न्यूज एजेंसी
बाराबंकी। वर्षों से क्षमता से अधिक बंदियों का बोझ झेल रही जिला जेल को आखिरकार बड़ी राहत मिलने जा रही है। करीब ढाई करोड़ रुपये की लागत से दो नई बैरकों के निर्माण को शासन ने प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति दे दी है। साथ ही निर्माण कार्य के लिए धनराशि भी जारी कर दी गई है। राज्य निर्माण सहकारी संघ इनका निर्माण करेगा।
जेल प्रशासन का मानना है कि इन बैरकों के बन जाने से बंदियों को लंबे समय से चली आ रही भीड़भाड़ की समस्या से काफी हद तक राहत मिलेगी। वर्तमान में जिला जेल की अधिकृत क्षमता लगभग 960 बंदियों की है, लेकिन वास्तविकता इससे कहीं अलग है। कई बार यहां 1200 से लेकर 1500 तक बंदी एक साथ निरुद्ध रहते हैं। पुरानी बैरकों में से कई जर्जर स्थिति में पहुंच चुकी हैं। बारिश में सीलन, गर्मी में असहनीय तापमान और सीमित स्थान के कारण बंदियों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। जेल सूत्रों के अनुसार क्षमता से अधिक बंदियों के रहने के कारण सोने की पर्याप्त जगह नहीं मिलती। स्वच्छता व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ता व सुरक्षा और निगरानी में भी चुनौती बढ़ती है। जेल अधीक्षक कुंदन कुमार ने बताया कि करीब 2.50 करोड़ की धनराशि आवंटित कर दी गई है। नई बैरकों के निर्माण से जेल में बंदियों के रहन-सहन की व्यवस्था बेहतर होगी।
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58.14 लाख से लगेगा पंप हाउस
जिला जेल में बंदियों के श्रम से सब्जियों की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। यहां उगाई गई सब्जियां जेल उपयोग के साथ-साथ अन्य जरूरतों को भी पूरा करती हैं। हालांकि, गर्मी के दिनों में सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध न होने से परेशानी हो जाती थी। इस समस्या के समाधान के लिए जेल प्रशासन ने ट्यूबवेल और पंप हाउस बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा था। अब शासन ने 58 लाख 14 हजार रुपये की स्वीकृति देते हुए स्थापना की मंजूरी दे दी है।
