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Bijnor News: छिलका रहित जौ से बदलेगी किसानों की तकदीर
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बिजनौर। जौ की खेती को लाभकारी बनाने की दिशा में कृषि विज्ञान केंद्र नगीना में छिलका रहित जौं की नई किस्म डीडब्ल्यूआरबी 223 का प्रदर्शन (परीक्षण) किया जा रहा है। वैज्ञानिक डॉ. केके सिंह ने बताया कि यह उन्नत प्रजाति भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (आईआईडब्लूबीआर) द्वारा विकसित की गई है, जो परंपरागत जौ की तुलना में अधिक उपयोगी और लाभकारी मानी जा रही है।
किसानों की आय बढ़ाने और पोषण सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र नगीना के प्रभारी अधिकारी डॉ. केके सिंह ने बताया कि डीडब्ल्यूआरबी 223 जौ की प्रमुख विशेषता यह है कि यह छिलका रहित प्रजाति है।
इसके दोनों पर छिलका नहीं होता इससे इसे छीलने की आवश्यकता नहीं पड़ती और यह सीधे खाने के लिए उपयुक्त होती है। इस किस्म से बनी रोटी स्वाद और बनावट में गेहूं की रोटी जैसी ही होती है, जिससे इसकी बाजार में मांग बढ़ने की पूरी संभावना है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस किस्म की खेती से किसानों को बेहतर दाम मिलने के साथ-साथ प्रसंस्करण लागत भी कम होगी, जिससे कुल मुनाफा बढ़ेगा। वैज्ञानिक डॉ. केके सिंह ने बताया कि आगे किसानों को फसल उत्पादन के लिए बीज दिया जाएगा।
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किसानों की आय बढ़ाने और पोषण सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र नगीना के प्रभारी अधिकारी डॉ. केके सिंह ने बताया कि डीडब्ल्यूआरबी 223 जौ की प्रमुख विशेषता यह है कि यह छिलका रहित प्रजाति है।
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इसके दोनों पर छिलका नहीं होता इससे इसे छीलने की आवश्यकता नहीं पड़ती और यह सीधे खाने के लिए उपयुक्त होती है। इस किस्म से बनी रोटी स्वाद और बनावट में गेहूं की रोटी जैसी ही होती है, जिससे इसकी बाजार में मांग बढ़ने की पूरी संभावना है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस किस्म की खेती से किसानों को बेहतर दाम मिलने के साथ-साथ प्रसंस्करण लागत भी कम होगी, जिससे कुल मुनाफा बढ़ेगा। वैज्ञानिक डॉ. केके सिंह ने बताया कि आगे किसानों को फसल उत्पादन के लिए बीज दिया जाएगा।
