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सत्ता का संग्राम: चांदपुर विधानसभा की जनता का कैसा है मूड, ये होंगे इस बार के चुनावी मुद्दे

Tue, 01 Sep 2026 12:56 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला नेटवर्क, चांदपुर (बिजनौर)
अमर उजाला नेटवर्क, चांदपुर (बिजनौर) Published by: अनुज कुमार Updated Tue, 01 Sep 2026 12:56 PM IST
सार

Satta Ka Sangram: अमर उजाला की टीम 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए चांदपुर पहुंची। टीम ने 'सत्ता का संग्राम' अभियान के तहत मतदाताओं का रुख जाना। उन्होंने किसानों और महिलाओं से स्थानीय मुद्दों तथा आगामी चुनाव की खास बातों पर सवाल किए। इस दौरान किसानों ने 2027 में अपने विधायक के चुनाव को लेकर अपना मन भी बताया।

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satta ka sangram What is the mood of people in Chandpur Assembly constituency
सत्ता का संग्राम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। इसी क्रम में अमर उजाला की टीम 'सत्ता का संग्राम' अभियान के तहत बिजनौर जिला की चांदपुर विधानसभा क्षेत्र पहुंची। टीम ने जनता का मूड और चुनावी प्राथमिकताएं जानने के लिए किसान, महिला और युवाओं से बातचीत की। लोगों ने कृषि, विकास, स्वास्थ्य जैसी स्थानीय व्यवस्थाओं पर खुलकर अपने विचार रखे। उन्होंने मौजूदा विधायक और सरकार के कामकाज के साथ आगामी चुनाव से अपनी उम्मीदें भी साझा कीं।

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चांदपुर में किसानों में गिनवाएं क्या हैं मुद्दे, कितना हुआ समाधान
अमर उजाला की टीम ने चांदपुर विधानसभा क्षेत्र के किसानों से बात की। किसानों ने अपनी समस्याओं और मुद्दों को विस्तार से बताया। उन्होंने वर्तमान विधायक के कामकाज पर भी अपनी राय रखी। दयाराम सिंह ने कहा कि विधायक विकास कार्यों के आधार पर चुना जाएगा। किसानों ने गन्ने का न्यूनतम मूल्य 1000 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग की। नरेंद्र सिंह ने बिजली बिल माफी और पीएम योजना के पैसे मिलने को सकारात्मक बताया। महिपाल सिंह ने आवारा पशुओं और तेंदुओं से फसल नुकसान की समस्या बताई।
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चांदपुर के युवा वोटर्स की विकास, शिक्षा और यातायात पर राय
'सत्ता का संग्राम' अभियान के तहत चांदपुर विधानसभा क्षेत्र में टीम ने युवाओं से उनके चुनावी मुद्दों और विधायक चुनने के मानदंडों पर बातचीत की। युवाओं ने क्षेत्र के विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और यातायात जैसी समस्याओं पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने मौजूदा विधायक के कामकाज और आगामी चुनाव से अपनी अपेक्षाएं भी बताईं। मोहम्मद शाद ने क्षेत्र के समग्र विकास, अच्छी सड़कों और बेहतर शिक्षा पर जोर दिया। उन्होंने विधायक को दस में से सात अंक दिए, लेकिन उनकी अनुपस्थिति और युवाओं से कम मेलजोल पर चिंता जताई। हिमांशु कुमार ने बताया कि युवाओं को अच्छी शिक्षा और अपने कौशल दिखाने का मौका मिलना चाहिए। युवाओं की अपेक्षाएं युवाओं के अनुसार, विधायक को एक दोस्त की तरह होना चाहिए जो उनकी बातें समझे। उन्हें अपने क्षेत्र में विकास, अच्छी पढ़ाई और आगे बढ़ने के अवसर चाहिए। युवा उम्मीदवार में अपना भविष्य और उम्मीदें देखते हैं। वे चाहते हैं कि यातायात, चिकित्सा, पढ़ाई और सड़कें बेहतर हों।




चांदपुर में महिलाएं कितनी सुरक्षित? लड़कियों ने रखी अपनी राय 
आगामी चुनावों से पहले अमर उजाला ने चांदपुर के युवा महिला मतदाताओं से उनकी अपेक्षाएं जानीं। युवाओं ने शिक्षा, महिला सुरक्षा, बुनियादी ढांचा और स्थानीय विधायक के कामकाज पर अपनी राय रखी। अधिकांश युवा महिला शिक्षित और ईमानदार प्रतिनिधियों को चुनने पर जोर दे रहे हैं। अलीशा ने बताया कि देहरादून और हरिद्वार जैसे महानगरों जैसी सोच अभी चांदपुर में नहीं आई है।  उन्होंने बिजनौर जिले की मानसिकता में कमी बताई। नाजिया परवीन पहली बार मतदान करेंगी। वह शिक्षा के क्षेत्र में विकास और कॉलेजों की बेहतर व्यवस्था चाहती हैं। अर्शी भी पहली बार मतदान करेंगी। उन्होंने कहा कि विधायक शिक्षित और ईमानदार होना चाहिए। वह बिना किसी भेदभाव के जनता की सेवा करे और शिक्षा को बढ़ावा दे। अर्शी ने चांदपुर में महिला सुरक्षा को ठीक बताया। उन्हें आने-जाने में कोई परेशानी नहीं हुई।



चांदपुर में स्वास्थ्य और युवा रोजगार प्रमुख चुनावी मुद्दे
अमर उजाला के "सत्ता का संग्राम" कार्यक्रम में चांदपुर विधानसभा क्षेत्र के लोगों से बात की गई। निवासियों ने आगामी चुनाव के लिए अपने विधायक चुनने के मुद्दों पर चर्चा की। मुख्य रूप से विकास, स्वास्थ्य और युवा रोजगार से जुड़ी समस्याओं को उठाया गया। अरुण कुमार अग्रवाल ने बताया कि क्षेत्र में विपक्षी विधायक होने के कारण विशेष कार्य नहीं हुए हैं। तटबंध न होने से 50 गांवों का आवागमन बंद हो जाता है। लाखों रुपये की फसलें बर्बाद होती हैं। अग्रवाल ने शासन से तटबंध निर्माण की अपील की। चांदपुर के महिला चिकित्सालय में 1980-82 से कोई डॉक्टर नियुक्त नहीं हुआ है। ऑनलाइन कारोबार बढ़ने से व्यापार लगातार प्रभावित हो रहा है। प्रशांत भटनागर ने युवाओं के लिए सुविधाओं की कमी बताई। 

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