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एसआईआर : नाम जुड़वाने के लिए 1987 के कागजात मांगे जा रहे

Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 28 Jan 2026 12:57 AM IST
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SIR: Documents from 1987 are being sought for name addition.
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बिजनौर/झालू। मतदाता गहन पुनरीक्षण अभियान के तहत भरे गए फार्मों में हुई त्रुटियों के बाद अब नाम जुड़वाने में मतदाताओं के पसीने छूट रहे हैं। पहले प्रशासन ने मतदाताओं को नोटिस भेजे। अब नाम जुड़वाने के लिए 1987 के कागजात मांगे जा रहे हैं। तहसील में कोई ठोस समाधान नहीं मिलने पर उन्हें निराश होकर लौटना पड़ रहा है।
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मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए तहसील में मतदाताओं की लाइन लगी रही। इनमें से काफी लोगों को निराशा हाथ लगी। इसका कारण पुराने दस्तावेज हैं। जी हां, तमाम लोग ऐसे हैं, जिनका नाम 2003 की मतदाता सूची में है लेकिन अब अधिकारी 1987 के कागजात मांग रहे हैं। इससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मतदाताओं का कहना है कि बीएलओ स्तर से फार्म भरने में गंभीर लापरवाही बरती गई। गलत प्रविष्टियों के कारण अब उन्हें अनावश्यक रूप से पुराने दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए कहा जा रहा है। तहसील पहुंचने पर कर्मचारियों द्वारा दस्तावेज पूरे कराकर लाओ कहकर वापस भेज दिया जा रहा है।
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क्या बोले लोग
झालू निवासी बलवंत ने बताया कि उनका व उनकी पत्नी वैशाली का नाम वर्ष 2003 की मतदाता सूची में दर्ज है। इसके बावजूद उनसे 1987 से पहले के दस्तावेज मांगे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब पहले से ही नाम मतदाता सूची में है तो इतने पुराने कागजात मांगना समझ से परे है।
जावेद अहमद ने कहा कि उनके नाम के साथ केवल सरनेम जोड़ा गया है, लेकिन इसी छोटी सी त्रुटि के कारण उनसे 1987 से पहले के प्रमाण पत्र लाने को कहा गया है। बीएलओ ने फार्म भरते समय बिना पूरी जानकारी लिए प्रविष्टियां कर दीं, जिसका खामियाजा अब आम मतदाता भुगत रहे हैं।
रुबीना ने बताया कि उससे 2003 की लिस्ट मांगी है। लिस्ट दिखाने के बाद भी 1987 से पहले के बने दस्तावेज मांग रहे है। मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए तहसील के चक्कर लगा रही है।
बिजनौर के गांव तिमरपुर निवासी आशा का कहना है कि उनके पिता व माता की मृत्यु 2003 से पहले हो गई थी। उनसे जुड़े कागज नहीं मिल रहे है। जबकि, सूची में दादी का नाम है। तहसील में कोई सुनने को तैयार नहीं है। अधिकारियों के आने के बाद उसने बात करने को कहा जा रहा है।
नाजिम का कहना है कि वह और उसकी पत्नी दिव्यांग है। बीएलओ की गलती से उनकी पत्नी के नाम नोटिस भेज दिए गए लेकिन सुधार की जिम्मेदारी अब मतदाताओं पर डाल दी गई है। उन्होंने तहसील स्तर पर ही समस्या का समाधान करने की मांग की।
अगर, कोई मतदाता 1987 से पहले का है तो उसे उस समय का कोई एक दस्तावेज देना होगा। 2003 की मतदाता सूची के आधार पर त्रुटि दूर की जा रही है। अभी तक किसी भी मतदाता को परेशान नहीं होने दिया गया। मतदाताओं की समस्या का तुरंत समाधान किया जा रहा है।
....रितु रानी, एसडीएम सदर, बिजनौर
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