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बुलंदशहर में कानून को लेकर महाअभियान: स्कूलों में बच्चों को बताएंगे पॉक्सो के प्रावधान, बाल अधिकार भी समझाएंगे
Fri, 25 Sep 2026 03:01 PM IST
Rahul Kumar Tiwari
अमर उजाला नेटवर्क, बुलंदशहर
अमर उजाला नेटवर्क, बुलंदशहर
Published by: Rahul Kumar Tiwari
Updated Fri, 25 Sep 2026 03:01 PM IST
सार
बुलंदशहर में 25 सितंबर से दो अक्तूबर तक किशोरों को पॉक्सो एक्ट, बाल अधिकार और कानूनी प्रावधानों की जानकारी देने के लिए जागरूकता महाअभियान चलेगा। न्यायिक अधिकारी स्कूलों की प्रार्थना सभाओं में विद्यार्थियों को कानून की बारीकियां बताएंगे।
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जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पूर्णकालिक सचिव विकास चौधरी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बुलंदशहर में किशोरावस्था के छात्र-छात्राओं को गंभीर अपराधों और कानूनी बारीकियों से सचेत कर उनका भविष्य सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से जनपद में एक विशेष जागरूकता महाअभियान शुरू किया जा रहा है। 25 सितंबर से दो अक्तूबर (गांधी जयंती) तक चलने वाले इस सघन अभियान के तहत जनपद के न्यायिक अधिकारी स्वयं विभिन्न विद्यालयों में पहुंचकर सुबह की प्रार्थना सभा में विद्यार्थियों को पॉक्सो एक्ट व बाल अधिकारों की जानकारी देंगे।
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राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार, जनपद न्यायाधीश के मार्गदर्शन में यह अभियान विशेष रूप से ग्रामीण एवं सुदूरवर्ती क्षेत्रों के स्कूलों पर केंद्रित रहेगा।
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दो चरणों में आयोजित होगा अभियान
यह महाअभियान दो चरणों में संचालित होगा। पहले चरण में 25 सितंबर से एक अक्तूबर तक न्यायिक अधिकारी अदालती समय से पूर्व स्कूलों की प्रार्थना सभाओं में विद्यार्थियों को पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों, विधिक परिणामों और बाल अधिकारों से रूबरू कराएंगे। दूसरे चरण में दो अक्तूबर (गांधी जयंती) पर प्रभात फेरी, जागरूकता शिविर, स्थानीय बोली में नुक्कड़ नाटक और 'बचपन बचाओ' व 'कानून को जानो, भविष्य संवारो' विषयों पर पेंटिंग व चित्रकला प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी।
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सहमति या शादी का इरादा नहीं बनेगा बचाव
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पूर्णकालिक सचिव विकास चौधरी ने बताया कि अक्सर देखा जाता है कि कानूनी अनभिज्ञता के कारण 19–20 वर्ष तक के युवा गंभीर अपराधों में फंसकर अपना भविष्य अंधकारमय कर बैठते हैं। कानून की दृष्टि में 18 वर्ष से कम आयु के बालक-बालिका की सहमति का कोई विधिक मूल्य नहीं होता। ऐसे मामलों में प्रेम-प्रसंग, सहमति या शादी का इरादा कोई कानूनी बचाव नहीं है। बहला-फुसलाकर ले जाने पर अपहरण की गंभीर धाराएं जुड़ती हैं और कम उम्र होने पर भी आजीवन कारावास तक का कठोर दंड हो सकता है। इसके अलावा 18 वर्ष से कम आयु की कन्या अथवा 21 वर्ष से कम आयु के युवक का विवाह कराना बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध है।