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Deoria News: तीन नामजद ठेकेदारों को मिली जमानत
Sun, 25 Oct 2026 12:34 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Sun, 25 Oct 2026 12:34 AM IST
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बघौचघाट। पथरदेवा नगर पंचायत में टेंडर प्रक्रिया को लेकर हुए विवाद के मामले में जिला एवं सत्र न्यायाधीश धीरेंद्र प्रताप सिंह की अदालत ने शनिवार को नामजद तीन ठेकेदारों धीरज, करुणेश मिश्र और वेद दुबे की जमानत मंजूर कर ली।
अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना प्रत्येक आरोपी को एक-एक लाख रुपये के निजी बंधपत्र तथा समान राशि के दो जमानतदार प्रस्तुत करने की शर्त पर रिहा करने का आदेश दिया।
मामला आठ अक्तूबर का है। नगर पंचायत पथरदेवा में टेंडर नहीं खोले जाने को लेकर अधिशासी अधिकारी हिमांशु प्रताप सिंह और ठेकेदारों के बीच विवाद हुआ था। नगर पंचायत अध्यक्ष कमलेश सिंह की सूचना पर नौ अक्तूबर को तरकुलवा थाने में जानलेवा हमला, मारपीट, धमकी और अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
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विवेचना के दौरान पुलिस ने अपहरण की धारा भी बढ़ा दी थी। पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि आरोपियों को राजनीतिक प्रतिशोध के तहत झूठा फंसाया गया है। साथ ही, बताया कि इस प्रकरण में उनकी ओर से क्रॉस प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई है। मामले की विवेचना अभी जारी है। मुकदमे के शीघ्र निस्तारण की संभावना कम होने का हवाला देते हुए जमानत देने की मांग की गई।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध अभिलेखों का अवलोकन करने के बाद अदालत ने निर्धारित शर्तों के अधीन तीनों आरोपितों की जमानत मंजूर कर ली। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह आदेश मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त किए बिना पारित किया गया है।
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अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना प्रत्येक आरोपी को एक-एक लाख रुपये के निजी बंधपत्र तथा समान राशि के दो जमानतदार प्रस्तुत करने की शर्त पर रिहा करने का आदेश दिया।
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मामला आठ अक्तूबर का है। नगर पंचायत पथरदेवा में टेंडर नहीं खोले जाने को लेकर अधिशासी अधिकारी हिमांशु प्रताप सिंह और ठेकेदारों के बीच विवाद हुआ था। नगर पंचायत अध्यक्ष कमलेश सिंह की सूचना पर नौ अक्तूबर को तरकुलवा थाने में जानलेवा हमला, मारपीट, धमकी और अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
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विवेचना के दौरान पुलिस ने अपहरण की धारा भी बढ़ा दी थी। पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि आरोपियों को राजनीतिक प्रतिशोध के तहत झूठा फंसाया गया है। साथ ही, बताया कि इस प्रकरण में उनकी ओर से क्रॉस प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई है। मामले की विवेचना अभी जारी है। मुकदमे के शीघ्र निस्तारण की संभावना कम होने का हवाला देते हुए जमानत देने की मांग की गई।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध अभिलेखों का अवलोकन करने के बाद अदालत ने निर्धारित शर्तों के अधीन तीनों आरोपितों की जमानत मंजूर कर ली। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह आदेश मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त किए बिना पारित किया गया है।