Etawah Ground Report: सरकारी योजनाओं का इटावा पर कितना असर? विकास की असल तस्वीर, जानिए इस रिपोर्ट में
आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की आहट तेज हो गई है, और इस चुनावी बिगुल से पहले ही राजनीतिक दलों ने अपनी कमर कसनी शुरू कर दी है। इस परिप्रेक्ष्य में, अमर उजाला की टीम जमीनी हकीकत को टटोलने के लिए प्रदेश के विभिन्न जिलों का दौरा कर रही है। इस बार हमारी टीम इटावा जिले में सरकारी योजनाओं के आम जनजीवन पर पड़े प्रभाव और विकास के दावों की असल तस्वीर को समझने का प्रयास किया गया।
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बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से बढ़ी कनेक्टिविटी और कारोबार
इटावा जिले के चित्तरपुरा गांव के निवासियों ने बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के निर्माण को एक महत्वपूर्ण विकास करार दिया है। उन्होंने बताया कि इस एक्सप्रेसवे के बनने से आवागमन में काफी सुविधा हुई है, जिससे कारोबार में भी वृद्धि हुई है। अब लोग दिन या रात किसी भी समय बेझिझक यात्रा कर सकते हैं। पहले जहां विभिन्न स्थानों तक पहुंचने में अधिक समय लगता था, वहीं अब सीधे एक्सप्रेसवे से जुड़कर आगरा, कानपुर और लखनऊ जैसे प्रमुख शहरों तक आसानी से पहुंचा जा सकता है। इससे वाहन का इंतजार करने की समस्या भी समाप्त हो गई है।
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सैफई विश्वविद्यालय में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार
सैफई उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय में वर्तमान राज्य सरकार के कार्यकाल में स्वास्थ्य सेवाओं में हुए सुधारों का जायजा लिया गया। विश्वविद्यालय के कुलपति अजय कुमार सिंह ने बताया कि यह विश्वविद्यालय एक अनूठा संस्थान है जो ग्रामीण पृष्ठभूमि में स्थापित है और यहां आने वाले अधिकांश मरीज आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े ग्रामीण इलाकों से हैं। उन्होंने कहा, 'हम लोगों ने 24x7 फ्री ट्रीटमेंट सबको दिया। कोई भी चाहे हमारे पास मरीज कहीं से भी आता है। 24 घंटे तक हम उसको फ्री इलाज करते हैं। 24 घंटे मरीज को दवाई उच्च क्वालिटी की मिले उसके लिए हमने एक नया मेडिकल स्टोर खोला है। जन औषधि केंद्र की अभी हमने शुरुआत की है। अभी हम लोगों ने अमृत फार्मेसी की शुरुआत करने हम लोग जा रहे हैं। जहां तक डिपार्टमेंट का सवाल है, हम लोगों ने पिछले एक साल में 150 करोड़ से ज्यादा के इक्विपमेंट खरीदे हैं। मुख्यमंत्री ने हम लोगों को नया ट्रॉमा सेंटर लेवल वन जो कि दिल्ली में है उसी हिसाब से स्थापित करने के लिए मंजूरी दी है और यह एक्सप्रेस हाईवे के आसपास होगा, जो हमारे नियंत्रण में होगा। '
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इटावा के शिवम तिवारी ने आलू की जैविक खेती में सरकार की मदद से मिली 50% सब्सिडी का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि सरकार के समर्थन के बिना इतना बड़ा निवेश करना जोखिम भरा हो सकता था, क्योंकि खेती में असफलता का खतरा रहता है। हालांकि, सरकारी सहायता से जोखिम काफी कम हो गया है। यदि कोई समस्या आती है, तो स्थानीय अधिकारी भी सहयोग प्रदान करते हैं। शिवम तिवारी की नेटवर्थ एक करोड़ रुपये से अधिक है, और उनका कहना है कि 50% सब्सिडी मिलने से निवेश पर जोखिम कम हो जाता है और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहन मिलता है।
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