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सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के खिलाफ इस्तगासा
अमर उजाला ब्यूरो/फैजाबाद
Updated Fri, 02 Sep 2016 12:07 AM IST
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सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के खिलाफ सीजेएम कोर्ट में इस्तगासा दायर किया गया है। बड़ी छावनी, अयोध्या के संत ओमप्रकाश दास चेला स्व. प्रेम नरायनदास ने इस्तगासे में हत्या, आपराधिक साजिश व वर्गों के मध्य शत्रुता कायम करने का आरोप लगाते हुए मुलायम सिंह यादव को तलब कर दंडित करने की याचना की है।
सीजेएम रवींद्र प्रसाद गुप्ता की कोर्ट ने इसे प्रकीर्ण वाद के रूप में दर्ज करते हुए पोषणीयता पर सुनवाई के लिए 3 सितंबर की तिथि नियत की है। अधिवक्ता हरिओम दुबे ने बताया कि ओमप्रकाश दास ने दायर किए केस में कहा है कि वह अयोध्या में भगवान राम की पूजा अर्चना करता है।
बीते 28 अगस्त को समाचार पत्रों व न्यूज चैनलों के माध्यम से मुलायम सिंह के बयान की जानकारी हुई। जिसमें उन्होंने कहा कि यदि अयोध्या में 1990 में 16 के बजाए तीस कारसेवकों की हत्या होती तो भी मुझे कोई हर्ज नहीं होता और मेरे ही इशारे पर कारसेवकों पर गोलियां चलाई गई थीं।
सपा मुखिया के आदेश पर 30 अक्तूबर 1990 को कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर अयोध्या में आए श्रद्धालुओं को पुलिस ने बैरीकेडिंग के अंदर घेरने के बाद बिना किसी चेतावनी के अंधाधुंध गोलियां चलाकर कई श्रद्धालुओं की हत्या कर दी गई। इसके बाद महज 16 हत्याओं की ही पुष्टि प्रशासन ने की।
घटना के 27 साल बाद बीते 27 अगस्त को लखनऊ मेें एक कार्यक्रम के दौरान मुलायम सिंह ने यह स्वीकार किया कि यह कृत्य उनके इशारे पर किया गया। उनके इस बयान से हिन्दू एवं मुस्लिमों के बीच सामाजिक व धार्मिक सौहार्द्र की क्षति हुई तथा लोगों के मध्य विद्वेष की भावना पैदा हुई। मुलायम सिंह की ओर से दिए गए इकबालिया बयान के आधार पर उन्हें तलब करके दंडित करने की याचना इस्तगासे में की गई है।
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सीजेएम रवींद्र प्रसाद गुप्ता की कोर्ट ने इसे प्रकीर्ण वाद के रूप में दर्ज करते हुए पोषणीयता पर सुनवाई के लिए 3 सितंबर की तिथि नियत की है। अधिवक्ता हरिओम दुबे ने बताया कि ओमप्रकाश दास ने दायर किए केस में कहा है कि वह अयोध्या में भगवान राम की पूजा अर्चना करता है।
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बीते 28 अगस्त को समाचार पत्रों व न्यूज चैनलों के माध्यम से मुलायम सिंह के बयान की जानकारी हुई। जिसमें उन्होंने कहा कि यदि अयोध्या में 1990 में 16 के बजाए तीस कारसेवकों की हत्या होती तो भी मुझे कोई हर्ज नहीं होता और मेरे ही इशारे पर कारसेवकों पर गोलियां चलाई गई थीं।
सपा मुखिया के आदेश पर 30 अक्तूबर 1990 को कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर अयोध्या में आए श्रद्धालुओं को पुलिस ने बैरीकेडिंग के अंदर घेरने के बाद बिना किसी चेतावनी के अंधाधुंध गोलियां चलाकर कई श्रद्धालुओं की हत्या कर दी गई। इसके बाद महज 16 हत्याओं की ही पुष्टि प्रशासन ने की।
घटना के 27 साल बाद बीते 27 अगस्त को लखनऊ मेें एक कार्यक्रम के दौरान मुलायम सिंह ने यह स्वीकार किया कि यह कृत्य उनके इशारे पर किया गया। उनके इस बयान से हिन्दू एवं मुस्लिमों के बीच सामाजिक व धार्मिक सौहार्द्र की क्षति हुई तथा लोगों के मध्य विद्वेष की भावना पैदा हुई। मुलायम सिंह की ओर से दिए गए इकबालिया बयान के आधार पर उन्हें तलब करके दंडित करने की याचना इस्तगासे में की गई है।