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Fatehpur News: मोमबत्ती ने बदली पिंकी की जिंदगी, अब जरूरतमंदों के जीवन में भर रहीं उजाला
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फोटो-08-मोमबत्तियों के साथ पिंकी। स्रोत स्वयं
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फतेहपुर। मझिल गांव निवासी पिंकी किराने की दुकान के साथ मोमबत्ती निर्माण का कार्य कर घर-घर रोशनी पहुंचा रही हैं। इस काम से वह न सिर्फ स्वावलंबी बनी हैं बल्कि आर्थिक रूप से भी सशक्त हुई हैं। साथ ही ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को भी रोजगार के लिए प्रेरित कर रही हैं।
खागा विकास क्षेत्र के मझिल गांव की पिंकी ने बताया कि वर्ष 2019 में वह कृष्णा महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने महिलाओं के समूह बनाकर उन्हें स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित किया। इसी क्रम में वर्ष 2020 में टिफिन सेवा शुरू की जो करीब दो वर्ष तक अच्छी चली।
बाद में तबीयत खराब होने और चिकित्सकों की सलाह पर उन्हें टिफिन सेवा बंद करनी पड़ी। उन्होंने किराने की दुकान शुरू की और महिलाओं को रोजगार के लिए प्रेरित करने का कार्य जारी रखा। तबीयत में सुधार और समय मिलने पर उन्होंने एक बार फिर स्वरोजगार की ओर कदम बढ़ाया।
ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से मोमबत्ती निर्माण का प्रशिक्षण लेकर ऋण के सहारे यह काम शुरू किया। किराने की दुकान होने से बिक्री में भी सुविधा मिली। पिंकी के अनुसार त्योहारों और ग्रामीण इलाकों में उनकी मोमबत्तियों की मांग अधिक रहती है और तैयार माल आसानी से बिक जाता है।
इस कार्य से वह आर्थिक रूप से मजबूत हुई हैं। उनके प्रयासों से गांव में स्वरोजगार का माहौल बन रहा है और अन्य महिलाएं भी प्रेरित होकर आगे आ रही हैं।
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खागा विकास क्षेत्र के मझिल गांव की पिंकी ने बताया कि वर्ष 2019 में वह कृष्णा महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने महिलाओं के समूह बनाकर उन्हें स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित किया। इसी क्रम में वर्ष 2020 में टिफिन सेवा शुरू की जो करीब दो वर्ष तक अच्छी चली।
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बाद में तबीयत खराब होने और चिकित्सकों की सलाह पर उन्हें टिफिन सेवा बंद करनी पड़ी। उन्होंने किराने की दुकान शुरू की और महिलाओं को रोजगार के लिए प्रेरित करने का कार्य जारी रखा। तबीयत में सुधार और समय मिलने पर उन्होंने एक बार फिर स्वरोजगार की ओर कदम बढ़ाया।
ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से मोमबत्ती निर्माण का प्रशिक्षण लेकर ऋण के सहारे यह काम शुरू किया। किराने की दुकान होने से बिक्री में भी सुविधा मिली। पिंकी के अनुसार त्योहारों और ग्रामीण इलाकों में उनकी मोमबत्तियों की मांग अधिक रहती है और तैयार माल आसानी से बिक जाता है।
इस कार्य से वह आर्थिक रूप से मजबूत हुई हैं। उनके प्रयासों से गांव में स्वरोजगार का माहौल बन रहा है और अन्य महिलाएं भी प्रेरित होकर आगे आ रही हैं।

फोटो-08-मोमबत्तियों के साथ पिंकी। स्रोत स्वयं
