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Fatehpur News: दरोगा-होमगार्ड भर्ती के नाम पर तीन युवकों से 8.95 लाख की ठगी
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फतेहपुर। दरोगा और होमगार्ड में भर्ती कराने का झांसा देकर युवक ने धाता थाना क्षेत्र के तीन युवकों से करीब 8.95 लाख की धोखाधड़ी कर ली। नौकरी नहीं मिलने पर तीनों ने बृहस्पतिवार को आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है।
धाता थाना क्षेत्र के कारीकान निवासी सगीर अहमद ने पुलिस को बताया कि अमौली का मूल निवासी दीपांशु कानपुर के नरवल में रहता है। वह खुद को बीएसएफ कर्मी बताता है। उसका पुत्र मो. सफी दरोगा भर्ती परीक्षा में फेल हो गया था। दीपांशु ने बेटे को ट्रेनिंग में भेजने और गृह मंत्रालय की सिफारिश से सूची में नाम आने का झांसा दिया।
उसने 25 मई से 10 जून के बीच आठ लाख रुपये मांगे थे। लेनदेन तय होने पर सगीर ने एक लाख एडवांस चेक और कुछ रुपये ऑनलाइन माध्यम से दीपांशु को दिए। तय समय पर नाम नहीं आया और अब वह फोन भी नहीं उठा रहा है।
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कारीकान नरहीपार निवासी संजय कुमार ने पुलिस को बताया कि वह रायबरेली जिले में स्वच्छता अभियान के तहत संविदा पर नौकरी करता है। गांव के अभिषेक के जरिये उसकी मुलाकात दीपांशु से हुई थी। दीपांशु ने बिना परीक्षा केवल फार्म भरने के बाद दरोगा की नौकरी दिलाने का झांसा दिया। उसने एक से 20 मई के बीच अफसरों को रुपये देने के नाम पर संजय से चार लाख रुपये ऑनलाइन ले लिए।
वहीं कारीकान निवासी आशीष कुमार ने पुलिस को बताया कि वह भी अभिषेक के साथ रायबरेली में स्वच्छता अभियान के तहत संविदा पर नौकरी करता है। अभिषेक ने ही उसकी पहचान दीपांशु से कराई थी। दीपांशु ने उसे बिना परीक्षा होमगार्ड की नौकरी दिलाने का झांसा दिया और 9 मार्च से 9 अप्रैल के बीच अफसरों को देने के नाम पर ऑनलाइन 3.95 लाख रुपये ले लिए।
थानाध्यक्ष अरविंद राय ने बताया कि तीनों युवकों को एक ही युवक ने केंद्र व गृह मंत्रालय में अच्छी पकड़ होने और खुद को बीएसएफ में तैनात बताकर ठगी का शिकार बनाया है। तीनों की तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी गई है।
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धाता थाना क्षेत्र के कारीकान निवासी सगीर अहमद ने पुलिस को बताया कि अमौली का मूल निवासी दीपांशु कानपुर के नरवल में रहता है। वह खुद को बीएसएफ कर्मी बताता है। उसका पुत्र मो. सफी दरोगा भर्ती परीक्षा में फेल हो गया था। दीपांशु ने बेटे को ट्रेनिंग में भेजने और गृह मंत्रालय की सिफारिश से सूची में नाम आने का झांसा दिया।
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उसने 25 मई से 10 जून के बीच आठ लाख रुपये मांगे थे। लेनदेन तय होने पर सगीर ने एक लाख एडवांस चेक और कुछ रुपये ऑनलाइन माध्यम से दीपांशु को दिए। तय समय पर नाम नहीं आया और अब वह फोन भी नहीं उठा रहा है।
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कारीकान नरहीपार निवासी संजय कुमार ने पुलिस को बताया कि वह रायबरेली जिले में स्वच्छता अभियान के तहत संविदा पर नौकरी करता है। गांव के अभिषेक के जरिये उसकी मुलाकात दीपांशु से हुई थी। दीपांशु ने बिना परीक्षा केवल फार्म भरने के बाद दरोगा की नौकरी दिलाने का झांसा दिया। उसने एक से 20 मई के बीच अफसरों को रुपये देने के नाम पर संजय से चार लाख रुपये ऑनलाइन ले लिए।
वहीं कारीकान निवासी आशीष कुमार ने पुलिस को बताया कि वह भी अभिषेक के साथ रायबरेली में स्वच्छता अभियान के तहत संविदा पर नौकरी करता है। अभिषेक ने ही उसकी पहचान दीपांशु से कराई थी। दीपांशु ने उसे बिना परीक्षा होमगार्ड की नौकरी दिलाने का झांसा दिया और 9 मार्च से 9 अप्रैल के बीच अफसरों को देने के नाम पर ऑनलाइन 3.95 लाख रुपये ले लिए।
थानाध्यक्ष अरविंद राय ने बताया कि तीनों युवकों को एक ही युवक ने केंद्र व गृह मंत्रालय में अच्छी पकड़ होने और खुद को बीएसएफ में तैनात बताकर ठगी का शिकार बनाया है। तीनों की तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी गई है।