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Ghazipur News: 6 महीने में 25 लोग घायल, दो की मौत, हाईवे हो या बाजार मवेशियों का राज
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गाजीपुर। जनपद में 60 पशु आश्रय स्थल हैं। इनमें 6 हजार गोवंश संरक्षित किए गए हैं। इनके ऊपर हर महीने 95 लाख रुपये खर्च किए जाते हैं। इसके बावजूद हाईवे से लेकर, बाजार व खेत तक में छुट्टा पशुओं का झुंड देखने को मिल रहा है। खेत में मवेशी खेती बर्बाद कर रहे हैं। हाईवे पर वह जानलेवा साबित हो रहे हैं। बृहस्पतिवार को शेखपुर में एक बाइक सवार सड़क पर मवेशी से टकरा कर घायल हो गया। इस तरह छह महीने में 25 लोग मवेशियों से टकराकर घायल हो चुके हैं। दो लोगों की मौत भी हो चुकी है। जबकि शासन का सख्त निर्देश है किसी भी कीमत पर सड़कों पर मवेशी नजर न आएं।
जिले में फोरलेन से लेकर हाईवे, कस्बा के बाजारों से लेकर खेत तक छुट्टा पशुओं का झुंड नजर आ रहे हैं। फोरलेन व हाईवे पर वाहनों के सामने मवेशियों के अचानक आ जाने के कारण हादसे हो रहे हैं। बाजार व कस्बों में मवेशी आपस में लड़ रहे हैं। उनका उग्र व्यवहार लोगों को डराने का काम करता है। बाजार में खरीदारी करते समय लोगों पर कई बार छुट्टा पशु हमला कर देते हैं। वहीं खेतों में किसानों की फसल बर्बाद करने का काम मवेशी कर रहे हैं। इससे किसानों में भी नाराजगी है।
डिवाइडर बना आरामगाह
केस एक
मरदह के पास वाराणसी-गोरखपुर फोरलेन के डिवाइडर पर आए दिन छुट्टा पशुओं का जमावड़ा लगा रहता है। डिवाइडर पर मौजूद मवेशी अचानक फोरलेन के किसी लेन पर आकर दौड़ने लगते हैं। ऐसे में विपरीत दिशा से आ रहे वाहन चालक उनको देखकर अपना नियंत्रण खो बैठते हैं। नतीजतन हादसा होता है।
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श्रद्धालुओं के मन में बना रहता है भय
केस दो
करहिया स्थित मां कामाख्या धाम के पास आए दिन छुट्टा पशु देखे जा सकते हैं। जबकि सामान्य दिनों में कामाख्या धाम दर्शन करने के लिए प्रतिदिन 800 श्रद्धालु आते हैं। विशेष मौकों पर यह संख्या 30 हजार तक पहुंच जाती है। छुट्टा पशुओं के हिंसक होने पर लोग उनसे बचने के लिए जगह तलाशने लगते हैं।
शासन का दावा है कि छुट्टा पशुओं को गो आश्रय स्थलों में संरक्षित कर दिया गया है। लेकिन क्षेत्र में सड़क से लेकर खेतों तक में छुट्टा पशु उधम मचा रहे हैं। - सीताराम यादव, खुदरा
बाजार में प्रतिदिन छुट्टा पशुओं का डेरा लगा रहता है। फल, सब्जियों के ठेलों पर मुंह लगाकर उन्हें नष्ट कर दे रहे हैं। जिम्मेदारों को ध्यान देने की जरूरत है।- सोनू खरवार, नंदगंज
फोरलेन व हाईवे पर छुट्टा पशुओं की मौजूदगी हादसे का सबब बन रही है। इसका खामियाजा वाहन चालकों को भुगतना पड़ रहा है। इस पर रोक लगाने की जरूरत है।- अजय यादव, कबीरपुर
छह महीने में मवेशियों के कारण हुए प्रमुख हादसे
-सैदपुर कोतवाली क्षेत्र के देवचंदपुर में छुट्टा पशु से टकराने के कारण बाइक सवार घायल हो गया।
-भदौरा ब्लॉक क्षेत्र के बारा गांव के पास नेशनल हाईवे 124-सी पर 17 जुलाई को अचानक छुट्टा पशु आ जाने के कारण कार अनियंत्रित होकर गड्ढे में पलट गई। हादसे में कार चालक घायल हो गया।
-शेखपुर के पास वाराणसी-गोरखपुर फोरलेन पर 23 जुलाई को बाइक सवार छुट्टा पशु से टकराकर गंभीर रूप से घायल हो गया।
5 फरवरी को बारा में छुट्टा पशु के हमले में किसान की मौत हो गई।
3 मार्च को मौधा में छुट्टा पशु ने राहगीर को अपने सींग से उठाकर पटक गया। गंभीर रूप से घायल राहगीर की उपचार के दौरान मौत हो गई।
सड़कों, बाजार व खेतों में घूमने वाले छुट्टा पशुओं को गो आश्रय स्थलों में संरक्षित रखने को लेकर समय-समय पर सभी बीडीओ से पत्राचार किया जाता है। जहां भी छुट्टा पशु घूमने का मामला प्रकाश में आता है, तो उसको तुरंत गो आश्रय स्थल भेजने का कार्य किया जाता है। - डॉ. आरके गौतम, उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
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जिले में फोरलेन से लेकर हाईवे, कस्बा के बाजारों से लेकर खेत तक छुट्टा पशुओं का झुंड नजर आ रहे हैं। फोरलेन व हाईवे पर वाहनों के सामने मवेशियों के अचानक आ जाने के कारण हादसे हो रहे हैं। बाजार व कस्बों में मवेशी आपस में लड़ रहे हैं। उनका उग्र व्यवहार लोगों को डराने का काम करता है। बाजार में खरीदारी करते समय लोगों पर कई बार छुट्टा पशु हमला कर देते हैं। वहीं खेतों में किसानों की फसल बर्बाद करने का काम मवेशी कर रहे हैं। इससे किसानों में भी नाराजगी है।
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डिवाइडर बना आरामगाह
केस एक
मरदह के पास वाराणसी-गोरखपुर फोरलेन के डिवाइडर पर आए दिन छुट्टा पशुओं का जमावड़ा लगा रहता है। डिवाइडर पर मौजूद मवेशी अचानक फोरलेन के किसी लेन पर आकर दौड़ने लगते हैं। ऐसे में विपरीत दिशा से आ रहे वाहन चालक उनको देखकर अपना नियंत्रण खो बैठते हैं। नतीजतन हादसा होता है।
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श्रद्धालुओं के मन में बना रहता है भय
केस दो
करहिया स्थित मां कामाख्या धाम के पास आए दिन छुट्टा पशु देखे जा सकते हैं। जबकि सामान्य दिनों में कामाख्या धाम दर्शन करने के लिए प्रतिदिन 800 श्रद्धालु आते हैं। विशेष मौकों पर यह संख्या 30 हजार तक पहुंच जाती है। छुट्टा पशुओं के हिंसक होने पर लोग उनसे बचने के लिए जगह तलाशने लगते हैं।
शासन का दावा है कि छुट्टा पशुओं को गो आश्रय स्थलों में संरक्षित कर दिया गया है। लेकिन क्षेत्र में सड़क से लेकर खेतों तक में छुट्टा पशु उधम मचा रहे हैं। - सीताराम यादव, खुदरा
बाजार में प्रतिदिन छुट्टा पशुओं का डेरा लगा रहता है। फल, सब्जियों के ठेलों पर मुंह लगाकर उन्हें नष्ट कर दे रहे हैं। जिम्मेदारों को ध्यान देने की जरूरत है।- सोनू खरवार, नंदगंज
फोरलेन व हाईवे पर छुट्टा पशुओं की मौजूदगी हादसे का सबब बन रही है। इसका खामियाजा वाहन चालकों को भुगतना पड़ रहा है। इस पर रोक लगाने की जरूरत है।- अजय यादव, कबीरपुर
छह महीने में मवेशियों के कारण हुए प्रमुख हादसे
-सैदपुर कोतवाली क्षेत्र के देवचंदपुर में छुट्टा पशु से टकराने के कारण बाइक सवार घायल हो गया।
-भदौरा ब्लॉक क्षेत्र के बारा गांव के पास नेशनल हाईवे 124-सी पर 17 जुलाई को अचानक छुट्टा पशु आ जाने के कारण कार अनियंत्रित होकर गड्ढे में पलट गई। हादसे में कार चालक घायल हो गया।
-शेखपुर के पास वाराणसी-गोरखपुर फोरलेन पर 23 जुलाई को बाइक सवार छुट्टा पशु से टकराकर गंभीर रूप से घायल हो गया।
5 फरवरी को बारा में छुट्टा पशु के हमले में किसान की मौत हो गई।
3 मार्च को मौधा में छुट्टा पशु ने राहगीर को अपने सींग से उठाकर पटक गया। गंभीर रूप से घायल राहगीर की उपचार के दौरान मौत हो गई।
सड़कों, बाजार व खेतों में घूमने वाले छुट्टा पशुओं को गो आश्रय स्थलों में संरक्षित रखने को लेकर समय-समय पर सभी बीडीओ से पत्राचार किया जाता है। जहां भी छुट्टा पशु घूमने का मामला प्रकाश में आता है, तो उसको तुरंत गो आश्रय स्थल भेजने का कार्य किया जाता है। - डॉ. आरके गौतम, उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी