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Ghazipur News: दो महीने में 7% वार्षिक ब्याज की दर से एक लाख रुपये दें
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गाजीपुर। जिला उपभोक्ता न्यायालय के अध्यक्ष सुजीत कुमार श्रीवास्तव, सदस्य रणविजय मिश्र और दीपा रानी ने शनिवार को लखनऊ के मां वाराहाय प्रोजेक्ट एंड सर्विस प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर व सप्लायर के खिलाफ परिवादी का परिवाद स्वीकार कर लिया।
साथ ही दो महीने में सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से एक लाख रुपये का भुगतान करें। न्यायालय ने यह भी आदेश दिया कि परिवादी को आर्थिक क्षति के रूप में 5000 और परिवाद पर खर्च 5000 रुपये भी भुगतान करें। कहा कि निर्धारित अवधि में आदेश का पालन नहीं होता है तो परिवादी विपक्षी के खिलाफ विधिक कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगा।
परिवादी चंद्रसेन ने बीते 31 जनवरी 2023 को जिला उपभोक्ता न्यायालय में परिवाद दायर कर बताया कि लखनऊ के गोमतीनगर विजयंत खंड स्थित मां वाराहाय आवासीय योजना में एक प्लॉट खरीदने के लिए विभिन्न तिथियों में एक लाख रुपये बुकिंग धनराशि खाते में जमा कराई।
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उक्त आवासीय परियोजना को परिवादी ने खुद मौके पर जाकर देखा तो इस योजना में अनेक कमियां व अनियमितताएं थीं। जबकि मां वाराहाय प्रोजेक्ट एंड सर्विस प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधि ने उक्त योजना के संबंध में गलत जानकारी दी थी। ऐसे में परिवादी ने उक्त प्लॉट की बुकिंग को रद्द करने के लिए कई बार विपक्षी डायरेक्टर व प्रतिनिधि से फोन पर बात की गई, कई बार पत्र लिख गया और मैसेज भेजा गया कि जमा राशि एक लाख रुपये वापस कर दिया जाए।
यही नहीं कानूनी नोटिस देने के बावजूद भी एक लाख रुपये वापस नहीं की गई। ऐसे में न्यायालय ने परिवादी का परिवाद स्वीकार करते हुए उक्त फैसला सुनाया है।
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साथ ही दो महीने में सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से एक लाख रुपये का भुगतान करें। न्यायालय ने यह भी आदेश दिया कि परिवादी को आर्थिक क्षति के रूप में 5000 और परिवाद पर खर्च 5000 रुपये भी भुगतान करें। कहा कि निर्धारित अवधि में आदेश का पालन नहीं होता है तो परिवादी विपक्षी के खिलाफ विधिक कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगा।
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परिवादी चंद्रसेन ने बीते 31 जनवरी 2023 को जिला उपभोक्ता न्यायालय में परिवाद दायर कर बताया कि लखनऊ के गोमतीनगर विजयंत खंड स्थित मां वाराहाय आवासीय योजना में एक प्लॉट खरीदने के लिए विभिन्न तिथियों में एक लाख रुपये बुकिंग धनराशि खाते में जमा कराई।
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उक्त आवासीय परियोजना को परिवादी ने खुद मौके पर जाकर देखा तो इस योजना में अनेक कमियां व अनियमितताएं थीं। जबकि मां वाराहाय प्रोजेक्ट एंड सर्विस प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधि ने उक्त योजना के संबंध में गलत जानकारी दी थी। ऐसे में परिवादी ने उक्त प्लॉट की बुकिंग को रद्द करने के लिए कई बार विपक्षी डायरेक्टर व प्रतिनिधि से फोन पर बात की गई, कई बार पत्र लिख गया और मैसेज भेजा गया कि जमा राशि एक लाख रुपये वापस कर दिया जाए।
यही नहीं कानूनी नोटिस देने के बावजूद भी एक लाख रुपये वापस नहीं की गई। ऐसे में न्यायालय ने परिवादी का परिवाद स्वीकार करते हुए उक्त फैसला सुनाया है।