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Ghazipur News: जिले में पहली बार होगी मोती की खेती, एक यूनिट का मिला लक्ष्य

Sun, 26 Jul 2026 01:12 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 26 Jul 2026 01:12 AM IST
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Pearl farming to be undertaken in the district for the first time; target set for one unit.
गाजीपुर। मोती संवर्धन योजना के तहत प्रदेश में पहली बार मोती की खेती होने जा रही है। इसी क्रम में जनपद में भी मोती की खेती की जाने की तैयारी की गई है। किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने व जनपद की अर्थव्यवस्था को गतिशीलता देने के लिए जिले में मोती की की खेती कराने की तैयारी की गई है।
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फिलहाल जनपद में मोती की खेती डेमो के तौर पर की जाएगी। इसके लिए मत्स्य विभाग की ओर से इस बार एक यूनिट का लक्ष्य दिया गया है। प्रयोग सफल होने पर आगे चलकर इससे और किसानों को जोड़ा जाएगा। जनपद के किसानों के लिए मोती की खेती करना पहला अनुभव होगा। इसमें मत्स्य विभाग की ओर से उनका सहयोग किया जाएगा। उनको तकनीकी जानकारी देने के साथ ही उनके उत्पादों को बाजार में बिक्री कराने का भी कार्य किया जाएगा। मोती की खेती के लिए 22x20 मीटर का तालाब होना चाहिए। साथ ही इसमें दो हजार फीट पानी की आवश्यकता होती है। मोती की खेती करने में डेढ़ लाख रुपये का खर्च आएगा। कुल लागत का 40 प्रतिशत यानि 60 हजार रुपये अनुदान विभाग की ओर से दिया जाएगा। इसके लिए किसान मत्स्य विभाग के वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 31 जुलाई निर्धारित की गई है।
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12 से 18 महीने में तैयार हो जाते हैं मोती
मोती की खेती सीप के जरिए पानी में की जाती है। इस काम को शुरू करने के लिए सीप, तालाब या टैंक और न्यूक्लियस (बीज) की मुख्य आवश्यकता होती है। 12 से 18 महीने में मोती तैयार हो जाते हैं। मोती उत्पादन के लिए मीठे पानी की जरूरत होती है। अब तक जनपद के किसान धान, मक्का, बाजरा, जौ, दलहन, सब्जी, केले आदि की परंपरागत खेती ही करते हैं।
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प्रदेश में पहली बार मोती की खेती होने जा रही है। इसी क्रम में जनपद में भी मोती की खेती कराने की तैयारी की गई है। शासन स्तर से इस बार एक यूनिट का लक्ष्य मिला है।- महेश कुमार, मुख्य कार्यकारी अधिकारी मत्स्य विभाग
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