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Ghazipur News: आज से मांगलिक कार्यों पर लगा ब्रेक
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खानपुर। सहालग पर ब्रेक लग गया है। सोमवार से विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण सहित सभी मांगलिक एवं शुभ कार्यों पर विराम लग गया है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार आषाढ़ कृष्ण द्वादशी से बृहस्पति के वार्धक्य आरंभ होने के कारण शुभ मुहूर्त समाप्त हो गए हैं। इसके बाद 15 जुलाई को बृहस्पति अस्त होंगे और 25 जुलाई से देवशयनी एकादशी के साथ चातुर्मास का शुभारंभ होगा।
पंडित शुभम पांडेय ने बताया कि चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु योगनिद्रा में रहते हैं। इसलिए इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। चार माह तक संत-महात्मा एक स्थान पर रहकर जप, तप, पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों में लीन रहते हैं। मंदिरों और आश्रमों में विशेष धार्मिक आयोजन होंगे। उन्होंने बताया कि चातुर्मास आत्मसंयम, साधना और आध्यात्मिक उन्नति का काल माना जाता है। इस दौरान सात्विक भोजन, व्रत-उपवास, दान-पुण्य, धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन तथा भगवान शिव और विष्णु की आराधना का विशेष महत्व है। श्रद्धालुओं को क्रोध, असत्य, नशा और मांसाहार से दूर रहने की सलाह दी जाती है। 21 नवंबर को कार्तिक शुक्ल पक्ष की देवोत्थान एकादशी पर भगवान विष्णु के जागरण के साथ ही चार माह का विराम समाप्त होगा और विवाह सहित अन्य शुभ एवं मांगलिक कार्यों के लिए पुनः शुभ मुहूर्त उपलब्ध होंगे।
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पंडित शुभम पांडेय ने बताया कि चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु योगनिद्रा में रहते हैं। इसलिए इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। चार माह तक संत-महात्मा एक स्थान पर रहकर जप, तप, पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों में लीन रहते हैं। मंदिरों और आश्रमों में विशेष धार्मिक आयोजन होंगे। उन्होंने बताया कि चातुर्मास आत्मसंयम, साधना और आध्यात्मिक उन्नति का काल माना जाता है। इस दौरान सात्विक भोजन, व्रत-उपवास, दान-पुण्य, धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन तथा भगवान शिव और विष्णु की आराधना का विशेष महत्व है। श्रद्धालुओं को क्रोध, असत्य, नशा और मांसाहार से दूर रहने की सलाह दी जाती है। 21 नवंबर को कार्तिक शुक्ल पक्ष की देवोत्थान एकादशी पर भगवान विष्णु के जागरण के साथ ही चार माह का विराम समाप्त होगा और विवाह सहित अन्य शुभ एवं मांगलिक कार्यों के लिए पुनः शुभ मुहूर्त उपलब्ध होंगे।
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