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Ghazipur News: गंगा किनारे वाले गांवों में बाढ़ के इंतजार में प्रशासन के राहत इंतजाम
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कोनिया के इटहरा में इंटर कॉलेज में बनी बाढ़ चौकी। संवाद
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जिले में मानसून सीजन अच्छ़ी बारिश नहीं हो रही है, लेकिन पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के कारण गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। डीएम ने एक महीने पहले मानसून शुरू होते विभागों को बाढ़ चाैकियों में राहत के इंतजाम करने के निर्देश दिए थे। जिम्मेदारों ने कागजों में 22 बाढ़ चाैकियों को सक्रिय दिया है। हकीकत में बाढ़ चाैकियों में दाना-पानी, दवा, चारा, प्रकाश, बेड की सुविधाएं नहीं हैं। डीएम के आदेश के बाद एक महीने बाद भी जिम्मेदार गंगा किनारे वाले गांवों में बाढ़ का इंतजार कर रहे हैं।
जिले में गंगा का तटीय इलाका 40 किलोमीटर में है। गंगा किनारे 75 गांव हैं। इनमें से पांच अतिसंवेदनशील है। डीघ ब्लॉक के कोनिया क्षेत्र के छेछुआ, भुर्रा, इटहरा और मवैया थानसिंह, हरिरामपुर गांव बाढ़ की दृष्टिकोण से अति संवेदनशील की श्रेणी में हैं। यह हर वर्ष बाढ़ आती है। इस बार जिले में मानसूनी बारिश करीब 20 दिन विलंब से शुरू हुई है। अभी तक अच्छी बारिश नहीं हुई, लेकिन पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही बारिश से जिले में गंगा का जलस्तर बढ़ रहा है। रविवार को हमारी टीम ने धनतुलसी, कोनिया, रामपुर घाट, बिहरोजपुर की बाढ़ चौकियों की पड़ताल की। कहीं बाढ़ चौकी लिखा बोर्ड तक नहीं लगा है न ही सुविधाएं हैं। भवनों में मवेशियों के लिए चारे-पानी दवा अन्य जरूरी सुविधाएं नहीं है। स्कूलों में तो सफाई की गई है जबकि बाढ़ चाैकी वाले भवनों की सफाई तक नहीं हो सकी है। रामपुर घाट बाढ़ के मद्देनजर अति संवेदशील क्षेत्र है। यहां पर परिषदीय विद्यालय को बाढ़ चौकी एवं राहत शिविर बनाया गया है। अभी तक यहां पर कोई सुविधाएं नहीं हैं।
कोनिया के शिवकरन इंटर कॉलेज में भी पशुपालन, स्वास्थ्य, पूर्ति समेत अन्य विभागों की तरफ से कोई सुविधा नहीं भेजी गई है। औराई के डेरवां, खमरिया, द्वारिकापुर, सहसेपुर, डीघ में धनतुलसी, लखनपुर, भदरांव, कटरा, इटहरा, कलिजरा, इनारगांव, बिहरोजपुर में बाढ़ चौकियां स्थापित की गई हैं। सुरियावां के करियांव, अबरना, सांडा, रामनगर, भदोही के सर्रोई, मुंसीलाटपुर, तुलसीचक, मईहरदोपट्टी और ज्ञानपुर में रमईपुर, मतेथु, कसियापुर, श्रीकांतपुर व भगवानपुर शामिल हैं।साल 2026 में भले ही अच्छी बारिश नहीं हो रही है, लेकिन 2025 में गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ा था। खतरे के निशान तक पानी पहुंचने से कोनिया क्षेत्र के कई गांवों के 500 बीघा बाजरा, अरहर और धान की फसल बाढ़ के पानी में डूबकर नष्ट हो गई थी। यही नहीं सड़कों पर पानी भरने से दो से तीन दिनों तक गांव का संपर्क भी टूटा था। इटहरा की डफाली बस्ती के छह परिवारों ने घर छोड़कर कोनिया में शरण लिया था। केंद्रीय जल आयोग के मीटर गेज के अनुसार, शनिवार शाम पांच बजे तक गंगा का जलस्तर 68.540 मीटर था। वहीं रविवार को शाम पांच बजे तक 69.050 मीटर तक पहुंच गया। सीतामढ़ी के घाट के समीप तक पानी पहुंच गया है। इससे लोगों की चिंता भी बढ़ने लगी है। गंगा तटवर्ती इलाकों चेतावनी बिंदु 80 मीटर और 81.200 मीटर खतरा बिंदु हैं।
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- अरूण दीक्षित, एसडीएम ज्ञानपुर ने कहा कि गंगा का जलस्तर कम है। तीन दिन पूर्व तीन तरफ से घिरे छेछुआ गांव का दाैरा किया गया था। बाढ़ चौकियों पर व्यवस्थाएं कराने की जिम्मेदारी विभागों को दी गई हैं। जल्द ही बात कर जरूरी सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी।
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जिले में गंगा का तटीय इलाका 40 किलोमीटर में है। गंगा किनारे 75 गांव हैं। इनमें से पांच अतिसंवेदनशील है। डीघ ब्लॉक के कोनिया क्षेत्र के छेछुआ, भुर्रा, इटहरा और मवैया थानसिंह, हरिरामपुर गांव बाढ़ की दृष्टिकोण से अति संवेदनशील की श्रेणी में हैं। यह हर वर्ष बाढ़ आती है। इस बार जिले में मानसूनी बारिश करीब 20 दिन विलंब से शुरू हुई है। अभी तक अच्छी बारिश नहीं हुई, लेकिन पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही बारिश से जिले में गंगा का जलस्तर बढ़ रहा है। रविवार को हमारी टीम ने धनतुलसी, कोनिया, रामपुर घाट, बिहरोजपुर की बाढ़ चौकियों की पड़ताल की। कहीं बाढ़ चौकी लिखा बोर्ड तक नहीं लगा है न ही सुविधाएं हैं। भवनों में मवेशियों के लिए चारे-पानी दवा अन्य जरूरी सुविधाएं नहीं है। स्कूलों में तो सफाई की गई है जबकि बाढ़ चाैकी वाले भवनों की सफाई तक नहीं हो सकी है। रामपुर घाट बाढ़ के मद्देनजर अति संवेदशील क्षेत्र है। यहां पर परिषदीय विद्यालय को बाढ़ चौकी एवं राहत शिविर बनाया गया है। अभी तक यहां पर कोई सुविधाएं नहीं हैं।
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कोनिया के शिवकरन इंटर कॉलेज में भी पशुपालन, स्वास्थ्य, पूर्ति समेत अन्य विभागों की तरफ से कोई सुविधा नहीं भेजी गई है। औराई के डेरवां, खमरिया, द्वारिकापुर, सहसेपुर, डीघ में धनतुलसी, लखनपुर, भदरांव, कटरा, इटहरा, कलिजरा, इनारगांव, बिहरोजपुर में बाढ़ चौकियां स्थापित की गई हैं। सुरियावां के करियांव, अबरना, सांडा, रामनगर, भदोही के सर्रोई, मुंसीलाटपुर, तुलसीचक, मईहरदोपट्टी और ज्ञानपुर में रमईपुर, मतेथु, कसियापुर, श्रीकांतपुर व भगवानपुर शामिल हैं।साल 2026 में भले ही अच्छी बारिश नहीं हो रही है, लेकिन 2025 में गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ा था। खतरे के निशान तक पानी पहुंचने से कोनिया क्षेत्र के कई गांवों के 500 बीघा बाजरा, अरहर और धान की फसल बाढ़ के पानी में डूबकर नष्ट हो गई थी। यही नहीं सड़कों पर पानी भरने से दो से तीन दिनों तक गांव का संपर्क भी टूटा था। इटहरा की डफाली बस्ती के छह परिवारों ने घर छोड़कर कोनिया में शरण लिया था। केंद्रीय जल आयोग के मीटर गेज के अनुसार, शनिवार शाम पांच बजे तक गंगा का जलस्तर 68.540 मीटर था। वहीं रविवार को शाम पांच बजे तक 69.050 मीटर तक पहुंच गया। सीतामढ़ी के घाट के समीप तक पानी पहुंच गया है। इससे लोगों की चिंता भी बढ़ने लगी है। गंगा तटवर्ती इलाकों चेतावनी बिंदु 80 मीटर और 81.200 मीटर खतरा बिंदु हैं।
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- अरूण दीक्षित, एसडीएम ज्ञानपुर ने कहा कि गंगा का जलस्तर कम है। तीन दिन पूर्व तीन तरफ से घिरे छेछुआ गांव का दाैरा किया गया था। बाढ़ चौकियों पर व्यवस्थाएं कराने की जिम्मेदारी विभागों को दी गई हैं। जल्द ही बात कर जरूरी सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी।