सुहवल। गंगा नदी पर बने हमीद सेतु की संरचनात्मक सुरक्षा को लेकर बुधवार को राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की ओर से तकनीकी जांच कराई गई। 41 वर्ष पुराने इस पुल की बेयरिंग और एक्सपेंशन ज्वाइंट्स की जांच आधुनिक मोबाइल ब्रिज इंस्पेक्शन यूनिट से की गई। निरीक्षण कार्य शुरू होते ही पुल के दोनों ओर वाहनों का आवागमन आंशिक रूप से डायवर्ट कर दिया गया, जिससे कुछ समय के लिए लंबा जाम लग गया। हालांकि आमजन की परेशानी को देखते हुए प्रशासन और एनएचएआई की टीम समय-समय पर नियंत्रित तरीके से वाहनों को सेतु से गुजरने की अनुमति देती रही। एनएचएआई के असिस्टेंट हाईवे इंजीनियर कृष्णकांत एवं डीपीएम रजनीकांत सिंह ने बताया कि बढ़ते यातायात दबाव और सेतु की बढ़ती आयु को देखते हुए समय-समय पर तकनीकी जांच जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी अप्रिय घटना से बचा जा सके। अधिकारियों ने बताया कि 1050 मीटर लंबा डबल लेन हमीद सेतु कैंटीलीवर सस्पेंडेड तकनीक पर आधारित है। यह पुल 14 पिलरों और 52 बेयरिंग पर टिका है, जबकि इसमें 25 एक्सपेंशन ज्वाइंट लगाए गए हैं।
बताया कि इस सेतु की आधारशिला 975 में रखी गई थी और वर्ष 1985 में इसे आवागमन के लिए खोला गया था। 2015 से 2020 के बीच कई बार पुल की बेयरिंग खिसकने की घटनाएं सामने आई थीं। वर्तमान में इस पुल से अधिकतम 20 टन भार क्षमता वाले वाहनों को ही गुजरने की अनुमति है, जबकि वाहनों की गति सीमा 40 किमी प्रति घंटा निर्धारित की गई है। पहले इस पुल से करीब 50 टन तक क्षमता वाले भारी वाहन भी गुजरते थे। बुधवार को चला निरीक्षण अभियान करीब चार घंटे तक जारी रहा। एनएचएआई के परियोजना निदेशक अजय सिंह ने बताया कि सेतु की बेयरिंग, स्पैन और अन्य तकनीकी हिस्सों की जांच स्पेशल मोबाइल ब्रिज इंस्पेक्शन यूनिट से की जा रही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे मरम्मत और सुरक्षा संबंधी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।