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Ghazipur News: पोर्टल पर सहेजा जा रहा जिले का इतिहास, स्मृतियां और दुर्लभ ग्रंथ
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सैदपुर भीतरी स्थित खुदाई स्थल। संवाद
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गाजीपुर। जिले के इतिहास, स्मृतियों और साक्ष्यों को संस्कृति विभाग के निर्देश पर सहेजने का काम शुरू किया गया है। सालों पुरानी पांडुलिपियों से लेकर पत्रों, दुर्लभग्रंथों, ताड़पत्रों को पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा है। अब तक करीब 1529 स्मृतियों व साक्ष्यों को पोर्टल पर अपलोड किया जा चुका है। जुटाई जा रही यह सामग्री अगली पीढ़ी को साक्ष्यों समेत यहां के इतिहास से रूबरू कराएगी। इस अभियान में ग्रामीण क्षेत्र के लिए डीपीआरओ और शहरी क्षेत्र में सीआरओ को नोडल बनाया गया है। स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर जिले में पुरातन इतिहास से जुड़े कई घटनाक्रम प्रचलित हैं। ये इतिहास अब महज कहानी और कहावत तक ही सीमित नहीं रहेगा। साक्ष्यों समेत सालों पुरानी पांडुलिपियों को ज्ञान भारतम मिशन के तहत संरक्षित किया जाएगा। इसके लिए संस्कृति विभाग ने पहल की है। शासन से निर्देश के बाद सीडीओ आलोक प्रसाद ने बताया कि क्रांतिकारियों व इतिहासकारों समेत साहित्यकारों से संपर्क करते हुए संरक्षण अभियान को गति दी जा रही है। ज्ञान भारतम मोबाइल एप के जरिए फोटो को अपलोड करते हुए जानकारी जुटाई जा रही है। बुजुर्गों से भी राय ली जा रही है। 90 से 100 साल की उम्र वाले बुजुर्ग चर्चित मामलों को साझा भी कर रहे हैं। जिले में कई प्राचीन सभ्यता की विरासत है।
पोर्टल पर सहेजा जा रहा जिले का इतिहास, स्मृतियां और दुर्लभ ग्रंथ
महात्मा गांधी के भारत छोड़ो आंदोलन के आह्वान पर 18 अगस्त 1942 को मुहम्मदाबाद तहसील आजादी की लड़ाई का बड़ा केंद्र बनी थी। डॉ. शिवपूजन राय के नेतृत्व में देशभक्तों का जत्था तहसील पर तिरंगा फहराने के लिए आगे बढ़ा। अंग्रेजी हुकूमत की गोलीबारी में आठ स्वतंत्रता सेनानी शहीद हो गए। शहीदों की स्मृति में हर वर्ष 18 अगस्त को क्षेत्र में शहीद दिवस मनाया जाता है। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में भी गाजीपुर की धरती ने वीरता की मिसाल पेश की थी। गहमर गांव निवासी वीर मैगर सिंह ने अंग्रेजों के खिलाफ लंबे समय तक संघर्ष किया। उनके साहस और नेतृत्व से अंग्रेजी अधिकारी भी भयभीत रहते थे।
ज्ञान भारतम मिशन के लिए अभियान शुरू हो गया है। पोर्टल पर महज लोगों को पांडुलिपि अपलोड करनी है। ये जानकारी आने वाली अगली पीढ़ी को इतिहास से रूबरू कराएगी। - आलोक प्रसाद, सीडीओ
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पोर्टल पर सहेजा जा रहा जिले का इतिहास, स्मृतियां और दुर्लभ ग्रंथ
महात्मा गांधी के भारत छोड़ो आंदोलन के आह्वान पर 18 अगस्त 1942 को मुहम्मदाबाद तहसील आजादी की लड़ाई का बड़ा केंद्र बनी थी। डॉ. शिवपूजन राय के नेतृत्व में देशभक्तों का जत्था तहसील पर तिरंगा फहराने के लिए आगे बढ़ा। अंग्रेजी हुकूमत की गोलीबारी में आठ स्वतंत्रता सेनानी शहीद हो गए। शहीदों की स्मृति में हर वर्ष 18 अगस्त को क्षेत्र में शहीद दिवस मनाया जाता है। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में भी गाजीपुर की धरती ने वीरता की मिसाल पेश की थी। गहमर गांव निवासी वीर मैगर सिंह ने अंग्रेजों के खिलाफ लंबे समय तक संघर्ष किया। उनके साहस और नेतृत्व से अंग्रेजी अधिकारी भी भयभीत रहते थे।
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ज्ञान भारतम मिशन के लिए अभियान शुरू हो गया है। पोर्टल पर महज लोगों को पांडुलिपि अपलोड करनी है। ये जानकारी आने वाली अगली पीढ़ी को इतिहास से रूबरू कराएगी। - आलोक प्रसाद, सीडीओ