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Ghazipur News: शहर के बगल में 20 कॉलोनियाें में न स्ट्रीट लाइटें न ही सड़क, सुविधाएं नजरअंदाज
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पड़ताल की खबर में....रौजा के श्रीराम नगर कॉलोनी में जलभराव का दृश्य-संवाद
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गाजीपुर। शहर से केवल एक किलोमीटर की दूरी पर करीब 20 कॉलोनियां आबाद हैं, जहां लगभग 25 हजार की आबादी रहती है। हालांकि यह क्षेत्र नगर पालिका सीमा से बाहर है, फिर भी इतनी बड़ी आबादी को बुनियादी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। समस्याएं बड़ी नहीं, बल्कि मुख्यतः बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी हैं।
स्ट्रीट लाइट न होने के कारण शाम होते ही कॉलोनियों में अंधेरा छा जाता है। बरसात तो दूर, प्रचंड गर्मी में भी जलभराव की स्थिति बनी रहती है। मार्ग खस्ताहाल हैं, और बजबजाती नालियां इस बात की गवाह हैं कि सफाईकर्मी कभी ड्यूटी पर नहीं आते।
कई लोग बच्चों को अच्छी शिक्षा और चिकित्सा दिलाने की हसरत और शहर के नजदीक रहने की उम्मीद लेकर इन कॉलोनियों में बसे थे। शहर से इतनी कम दूरी होने के कारण उनका मानना था कि भविष्य में शहरी सुविधाओं का लाभ मिलेगा और बुनियादी ढांचा विकसित होगा।
लगभग 10 वर्ष बीत जाने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है, और अब लोगों के सपने टूटते नजर आ रहे हैं। जिस सुविधा की तलाश में उन्होंने शहर के पास घर बसाया था, वह आज भी नहीं मिल सकी। अब स्थिति गांवों से भी बदतर हो गई है। गांवों में आवागमन के लिए बेहतर आरसीसी सड़कें बन रही हैं और स्ट्रीट लाइट से रोशनी हो रही है, लेकिन इन कॉलोनियों में आज भी वही हालात हैं।
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स्ट्रीट लाइट न होने के कारण शाम होते ही कॉलोनियों में अंधेरा छा जाता है। बरसात तो दूर, प्रचंड गर्मी में भी जलभराव की स्थिति बनी रहती है। मार्ग खस्ताहाल हैं, और बजबजाती नालियां इस बात की गवाह हैं कि सफाईकर्मी कभी ड्यूटी पर नहीं आते।
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कई लोग बच्चों को अच्छी शिक्षा और चिकित्सा दिलाने की हसरत और शहर के नजदीक रहने की उम्मीद लेकर इन कॉलोनियों में बसे थे। शहर से इतनी कम दूरी होने के कारण उनका मानना था कि भविष्य में शहरी सुविधाओं का लाभ मिलेगा और बुनियादी ढांचा विकसित होगा।
लगभग 10 वर्ष बीत जाने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है, और अब लोगों के सपने टूटते नजर आ रहे हैं। जिस सुविधा की तलाश में उन्होंने शहर के पास घर बसाया था, वह आज भी नहीं मिल सकी। अब स्थिति गांवों से भी बदतर हो गई है। गांवों में आवागमन के लिए बेहतर आरसीसी सड़कें बन रही हैं और स्ट्रीट लाइट से रोशनी हो रही है, लेकिन इन कॉलोनियों में आज भी वही हालात हैं।
