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Ghazipur News: बंदरों को मिलेगा स्थायी ठिकाना, भिक्खेपुर में चार हेक्टेयर में बनाया जाएगा कपि वन
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गाजीपुर। बंदरों के उत्पात से परेशान लोगों के लिए राहत भरी खबर है। अब बंदरों को स्थायी ठिकाना देने की तैयारी की गई है। इसके लिए वन विभाग की ओर से नंदगंज क्षेत्र के भिक्खेपुर में चार हेक्टेयर में कपि वन स्थापित किया जाएगा। इसके लिए भूमि चिह्नित कर ली गई है। कपि वन पर वन विभाग की ओर से 7.50 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। वन विकसित करने के साथ ही बंदरों के आहार के लिए इसमें फलदार पौध लगाए जाएंगे। साथ ही पेयजल की भी व्यवस्था की जाएगी।
इन दिनों शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों के लोग बंदरों के शरारत से परेशान हैं। छतों पर उत्पात मचाने के साथ ही बंदर लोगों के बेडरूम व किचन तक दाखिल हो जा रहे हैं। लोगों की शिकायत पर शहरी क्षेत्रों में नगर निकाय व ग्रामीण इलाकों में पंचायती राज विभाग के कर्मी उनको पकड़ते हैं। पकड़ने के बाद उनको इधर-उधर छोड़ दिया जाता है। इसके बाद बंदर दोबारा लौट आते हैं। इसे देखते कपि वन बनाया जाएगा। बंदर सबसे अधिक बड़हल पसंद करते हैं। इसलिए कपि वन में अधिक संख्या में बड़हल के पौधे लगाए जाएंगे। इसके अलावा आम, जामुन, पीपल, पाकड़ व महुआ के पौधे भी लगाए जाएंगे। वन विभाग का दावा है कि एक वर्ष में पौधे वृक्ष बन जाएंगे। इसके बाद कपि वन पूरी तरह से विकसित हो जाएगा।
जनपद में कपि वन बनेगा। इससे बंदरों को स्थायी ठिकाना मिल जाएगा। कपि वन में बंदरों के भोजन के लिए फलदार पौधों का रोपण किया जा रहा है। - अजीत प्रताप सिंह, डीएफओ
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इन दिनों शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों के लोग बंदरों के शरारत से परेशान हैं। छतों पर उत्पात मचाने के साथ ही बंदर लोगों के बेडरूम व किचन तक दाखिल हो जा रहे हैं। लोगों की शिकायत पर शहरी क्षेत्रों में नगर निकाय व ग्रामीण इलाकों में पंचायती राज विभाग के कर्मी उनको पकड़ते हैं। पकड़ने के बाद उनको इधर-उधर छोड़ दिया जाता है। इसके बाद बंदर दोबारा लौट आते हैं। इसे देखते कपि वन बनाया जाएगा। बंदर सबसे अधिक बड़हल पसंद करते हैं। इसलिए कपि वन में अधिक संख्या में बड़हल के पौधे लगाए जाएंगे। इसके अलावा आम, जामुन, पीपल, पाकड़ व महुआ के पौधे भी लगाए जाएंगे। वन विभाग का दावा है कि एक वर्ष में पौधे वृक्ष बन जाएंगे। इसके बाद कपि वन पूरी तरह से विकसित हो जाएगा।
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जनपद में कपि वन बनेगा। इससे बंदरों को स्थायी ठिकाना मिल जाएगा। कपि वन में बंदरों के भोजन के लिए फलदार पौधों का रोपण किया जा रहा है। - अजीत प्रताप सिंह, डीएफओ
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