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Ghazipur News: 100 से ज्यादा गांवों सुविधाएं नहीं, कहीं 15 तो कही 20 किमी दूर है अस्पताल
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जिले में करीब 100 से ज्यादा गांव ऐसे हैं जहां आज भी चिकित्सकीय सुविधाओं का अभाव हैं। स्थिति यह है कि किसी गांव के ग्रामीणों को 15 किमी तो कोई 20 किमी की दूरी तय कर सीएचसी-पीएचसी पहुंचना पड़ रहा है। सबसे बड़ी बात यह है कि बारिश के दिनों में करइल क्षेत्र में एंबुलेंस तक नहीं पहुंच पाती। गंभीर बीमारियों से पीड़ित व सड़क दुर्घटनाओं में घायलों को अस्पताल पहुंचाने में एक घंटे से ज्यादा समय लग जाता है। बरेसर क्षेत्र के जहूराबाद में ग्रामीणों को उपचार के लिए 10 किमी की दूरी तय कर कासिमाबाद और बाराचवर सीएचसी पहुंचना पड़ता है। जहूराबाद के कुंदन जायसवाल ने बताया कि रात में अगर किसी की तबीयत खराब हो जाए तो इन केंद्रों तक पहुंचने में आधे घंटे से एक घंटे तक लग जाता है। हाजीपुर बरेसर निवासी जितेंद्र गुप्ता ने बताया कि सिपाह, माटा, रेंगा फत्तेहसराय गांव से कासिमाबाद व बाराचवर की दूरी करीब 14 किमी है, जबकि सागापाली, झोटारी 15 से 17 किमी और तिराहीपुर की दूरी इससे भी अधिक है।
दुबिहां क्षेत्र के रानीपुर, लोचाइन, सोनाड़ी, अमरूपुर, खैराबारी, चांदपुर, रेवसड़ा, अवथही, डोनपाह, बेलसड़ी, सुरतापुर गांव ऐसे हैं, जहां से गोड़ऊर सीएचसी 12-13 किमी और मुहम्मदाबाद सीएचसी 18-20 किमी दूर है। अवथही निवासी दीवाकर राय और खैराबारी के कृष्णानंद ने बताया कि अचानक तबीयत खराब होने पर मरीजों की हालत रास्ते में ही बिगड़ जाती है। वहीं, गोड़ऊर सीएचसी से मरीजों को अक्सर रेफर कर दिया जाता है। खराब सड़कों के कारण बारिश में एंबुलेंस भी नहीं पहुंच पाती।
सुहवल क्षेत्र के युवराजपुर, ताड़ीघाट, पठकनिया, रमवल, गौरा, बरौड़ा, बेमुई, ईजरी, ढढ़नी, भिख्खीचौरा सहित करीब 28 गांवों के बीच केवल मेदनीगांव में एक न्यू पीएचसी है। ग्रामीणों को गोराबाजार 15 से 22 किमी और रेवतीपुर करीब 15 किमी जाना पड़ता है। भागीरथपुर गांव के बीडीसी सदस्य प्रमोद यादव ने बताया कि यहां का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जर्जर हालत में है।
बहरियाबाद क्षेत्र के फातिमपुर, भवरूपुर, राजापुर, पलिवार, बनकटा और हाजीपुर जैसे गांवों के लोगों को उपचार के लिए मिर्जापुर 12 से 16 किमी और सैदपुर 27 से 31 किमी तक जाना पड़ता है। कई गांवों के लोगों को चिकित्सा सुविधा के लिए एक से दो घंटे तक का समय लग जाता है।
- डॉ. मनोज कुमार, प्रभारी सीएमओ ने कहा कि आबादी के मुताबिक स्वास्थ्य उपकेंद्र, सीएचसी और न्यू पीएचसी स्थापित है, जिससे मरीजों को बेहतर उपचार और चिकित्सकीय सुविधाएं मुहैया कराई जा सके।
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दुबिहां क्षेत्र के रानीपुर, लोचाइन, सोनाड़ी, अमरूपुर, खैराबारी, चांदपुर, रेवसड़ा, अवथही, डोनपाह, बेलसड़ी, सुरतापुर गांव ऐसे हैं, जहां से गोड़ऊर सीएचसी 12-13 किमी और मुहम्मदाबाद सीएचसी 18-20 किमी दूर है। अवथही निवासी दीवाकर राय और खैराबारी के कृष्णानंद ने बताया कि अचानक तबीयत खराब होने पर मरीजों की हालत रास्ते में ही बिगड़ जाती है। वहीं, गोड़ऊर सीएचसी से मरीजों को अक्सर रेफर कर दिया जाता है। खराब सड़कों के कारण बारिश में एंबुलेंस भी नहीं पहुंच पाती।
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सुहवल क्षेत्र के युवराजपुर, ताड़ीघाट, पठकनिया, रमवल, गौरा, बरौड़ा, बेमुई, ईजरी, ढढ़नी, भिख्खीचौरा सहित करीब 28 गांवों के बीच केवल मेदनीगांव में एक न्यू पीएचसी है। ग्रामीणों को गोराबाजार 15 से 22 किमी और रेवतीपुर करीब 15 किमी जाना पड़ता है। भागीरथपुर गांव के बीडीसी सदस्य प्रमोद यादव ने बताया कि यहां का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जर्जर हालत में है।
बहरियाबाद क्षेत्र के फातिमपुर, भवरूपुर, राजापुर, पलिवार, बनकटा और हाजीपुर जैसे गांवों के लोगों को उपचार के लिए मिर्जापुर 12 से 16 किमी और सैदपुर 27 से 31 किमी तक जाना पड़ता है। कई गांवों के लोगों को चिकित्सा सुविधा के लिए एक से दो घंटे तक का समय लग जाता है।
- डॉ. मनोज कुमार, प्रभारी सीएमओ ने कहा कि आबादी के मुताबिक स्वास्थ्य उपकेंद्र, सीएचसी और न्यू पीएचसी स्थापित है, जिससे मरीजों को बेहतर उपचार और चिकित्सकीय सुविधाएं मुहैया कराई जा सके।