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Ghazipur News: डेंगू, मलेरिया से बचने को न टीम बनी, न हॉटस्पॉट पहचाने, दवाओं का छिड़काव तक नहीं
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बरेसर गांव में नालियों की साफ-सफाई करते सफाईकर्मी। (स्रोत- फाइल फोटो)
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गाजीपुर। बारिश के मौसम के साथ ही मच्छर जनित बीमारियों मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियों का प्रकोप बढ़ने लगता है। ऐसे में डेंगू से निपटने की तैयारी आधी-अधूरी हैं। जबकि तीन साल पहले शहर के पांच इलाके हाॅटस्पॉट बने थे। इधर, ग्रामीण इलाकों में आशाओं तो नगर निकायों में निगरानी समिति की जिम्मेदारी का दावा किया जा रहा है। लेकिन सरकारी अस्पतालों में मच्छरदानी वाले बेड सुरक्षित करने का दावा भी हवा-हवाई ही है। लार्वा रोधी दवा का छिड़काव भी नालियों में नहीं कराया जा रहा है।
मौसम में उतार-चढ़ाव व कभी धूप तो कभी बारिश का असर लोगों पर ऐसा पड़ रहा है कि वह वायरल बुखार की चपेट में आ रहे हैं, जिससे मेडिकल कॉलेज अस्पताल की ओपीडी में वायरल बुखार के प्रतिदिन 100 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। इसके बाद मच्छर जनित बीमारियां लोगों को चपेट में लेनी लगती है। ऐसे में जिम्मेदारों की ओर से डेंगू जैसी बीमारी से बचाव के लिए तैयारी अभी आधी- अधूरी ही दिखाई पड़ रही है। स्थिति यह है कि अब तक टीम गठित नहीं हो सकी है। ग्रामीण इलाकों में आशाओं के कंधे पर तो नगर निकायों में निगरानी समिति के कंधों पर ही जिम्मेदारी दे दी गई है। वहीं, 16 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर पांच बेड सुरक्षित करने का दावा भी पूरी आधा-अधूरा है। हालांकि, जिम्मेदार जनपद में सितंबर, अक्तूबर व नवंबर में डेंगू मरीजों के मिलने का दावा करते हैं, बावजूद तैयारियां न के बराबर है।
वहीं, जिला मलेरिया अधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि ग्रामीण इलाकों में आशाएं तो नगर निकायों में निगरानी समिति द्वारा नजर रखी जा रही है। जनपद में सितंबर, अक्टूबर और नवंबर माह में डेंगू मरीज मिलते हैं। डेंगू व मलेरिया से निपटने के लिए समय-समय पर अभियान चलाया जाता है।
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सीएचसी पर मच्छदानीयुक्त पांच बेड सुरक्षित करने का निर्देश दे दिया गया है। साथ ही पर्याप्त मात्रा में प्रारंभिक जांच के लिए किट भी उपलब्ध करा दिया गया है, जिससे मरीजों की जांच व उपचार को लेकर कोई परेशानी न उठानी पड़े।- डॉ. एसके पांडेय, सीएमओ
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पुराने हॉटस्पॉट इलाके में जांच को लेकर नहीं शुरू हुआ अभियान
गाजीपुर। मारकीनगंज, रूईमंडी, स्टीमरघाट, लंका और पुलिस लाइन का इलाके में तीन वर्ष पूर्व डेंगू के अधिक मरीज मिले थे। ऐसे में इन इलाकों को हॉटस्पाट घोषित किया गया गया था। साथ ही घर- घर पहुंच जांच अभियान भी चलाया गया था, जिससे डेंगू के मरीजों की संख्या में काफी कमी आई थी। बावजूद अबतक इन इलाकों में अबतक जांच अभियान चलाने को लेकर अबतक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
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मौसम में उतार-चढ़ाव व कभी धूप तो कभी बारिश का असर लोगों पर ऐसा पड़ रहा है कि वह वायरल बुखार की चपेट में आ रहे हैं, जिससे मेडिकल कॉलेज अस्पताल की ओपीडी में वायरल बुखार के प्रतिदिन 100 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। इसके बाद मच्छर जनित बीमारियां लोगों को चपेट में लेनी लगती है। ऐसे में जिम्मेदारों की ओर से डेंगू जैसी बीमारी से बचाव के लिए तैयारी अभी आधी- अधूरी ही दिखाई पड़ रही है। स्थिति यह है कि अब तक टीम गठित नहीं हो सकी है। ग्रामीण इलाकों में आशाओं के कंधे पर तो नगर निकायों में निगरानी समिति के कंधों पर ही जिम्मेदारी दे दी गई है। वहीं, 16 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर पांच बेड सुरक्षित करने का दावा भी पूरी आधा-अधूरा है। हालांकि, जिम्मेदार जनपद में सितंबर, अक्तूबर व नवंबर में डेंगू मरीजों के मिलने का दावा करते हैं, बावजूद तैयारियां न के बराबर है।
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वहीं, जिला मलेरिया अधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि ग्रामीण इलाकों में आशाएं तो नगर निकायों में निगरानी समिति द्वारा नजर रखी जा रही है। जनपद में सितंबर, अक्टूबर और नवंबर माह में डेंगू मरीज मिलते हैं। डेंगू व मलेरिया से निपटने के लिए समय-समय पर अभियान चलाया जाता है।
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सीएचसी पर मच्छदानीयुक्त पांच बेड सुरक्षित करने का निर्देश दे दिया गया है। साथ ही पर्याप्त मात्रा में प्रारंभिक जांच के लिए किट भी उपलब्ध करा दिया गया है, जिससे मरीजों की जांच व उपचार को लेकर कोई परेशानी न उठानी पड़े।- डॉ. एसके पांडेय, सीएमओ
पुराने हॉटस्पॉट इलाके में जांच को लेकर नहीं शुरू हुआ अभियान
गाजीपुर। मारकीनगंज, रूईमंडी, स्टीमरघाट, लंका और पुलिस लाइन का इलाके में तीन वर्ष पूर्व डेंगू के अधिक मरीज मिले थे। ऐसे में इन इलाकों को हॉटस्पाट घोषित किया गया गया था। साथ ही घर- घर पहुंच जांच अभियान भी चलाया गया था, जिससे डेंगू के मरीजों की संख्या में काफी कमी आई थी। बावजूद अबतक इन इलाकों में अबतक जांच अभियान चलाने को लेकर अबतक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।