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Ghazipur News: 23 को सरस्वती पूजा, प्रतिमाओं को तैयार करने में जुटे मूर्तिकार
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शहर के सकलेनाबाद में सरस्वती प्रतिमा को अंतिम रूप देते त्रिभुवन प्रजापति। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
भड़सर। 23 जनवरी को होने वाली सरस्वती पूजा के लिए माता सरस्वती की प्रतिमाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। पूजन का समय नजदीक आते ही मूर्तिकार दिन-रात एक करके प्रतिमा को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।
पुआल और मिट्टी से तैयार की जा रही प्रतिमाओं पर रंग-रोगन का कार्य तेज हो गया है। कारीगर नई-नई भाव-भंगिमाओं के साथ प्रतिमाओं को आकर्षक रूप देने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
सरस्वती पूजा गांव-गांव और गली-गली में बच्चों व युवाओं की ओर से बड़े उत्साह के साथ मनाई जाती है। इसी कारण हर वर्ष बड़ी संख्या में मूर्तियों की बिक्री होती है। इस वर्ष बढ़ी महंगाई के बाद भी मूर्तियों की मांग में खास कमी नहीं देखी जा रही है।
अधिकांश प्रतिमाओं की एडवांस बुकिंग शुरू हो चुकी है। लोग पसंद के मुताबिक छोटी-बड़ी मूर्तियों का चयन कर अग्रिम राशि का भुगतान रहे हैं, इससे मूर्ति निर्माण स्थलों पर सुबह-शाम भीड़ बनी रहती है।
क्षेत्र के बद्दूपूर नहर के पास मूर्तिकार रामविलास राजभर ने बताया कि वे ऑर्डर पर मूर्तियां तैयार करते हैं। कोविड काल के बाद महंगाई का असर मूर्ति के निर्माण पर भी पड़ा है।
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भड़सर। 23 जनवरी को होने वाली सरस्वती पूजा के लिए माता सरस्वती की प्रतिमाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। पूजन का समय नजदीक आते ही मूर्तिकार दिन-रात एक करके प्रतिमा को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।
पुआल और मिट्टी से तैयार की जा रही प्रतिमाओं पर रंग-रोगन का कार्य तेज हो गया है। कारीगर नई-नई भाव-भंगिमाओं के साथ प्रतिमाओं को आकर्षक रूप देने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
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सरस्वती पूजा गांव-गांव और गली-गली में बच्चों व युवाओं की ओर से बड़े उत्साह के साथ मनाई जाती है। इसी कारण हर वर्ष बड़ी संख्या में मूर्तियों की बिक्री होती है। इस वर्ष बढ़ी महंगाई के बाद भी मूर्तियों की मांग में खास कमी नहीं देखी जा रही है।
अधिकांश प्रतिमाओं की एडवांस बुकिंग शुरू हो चुकी है। लोग पसंद के मुताबिक छोटी-बड़ी मूर्तियों का चयन कर अग्रिम राशि का भुगतान रहे हैं, इससे मूर्ति निर्माण स्थलों पर सुबह-शाम भीड़ बनी रहती है।
क्षेत्र के बद्दूपूर नहर के पास मूर्तिकार रामविलास राजभर ने बताया कि वे ऑर्डर पर मूर्तियां तैयार करते हैं। कोविड काल के बाद महंगाई का असर मूर्ति के निर्माण पर भी पड़ा है।
